{"_id":"5a865ece4f1c1b8e268ba5db","slug":"this-64-year-old-women-save-millions-of-lives-by-motivating-people-for-blood-donation","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इस महिला ने लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करके बचाई लाखों जिंदगियां","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
इस महिला ने लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करके बचाई लाखों जिंदगियां
लता अमाशी
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:19 PM IST
विज्ञापन
lata
दस साल के एक बच्चे को डेंगू था। उसे खून की सख्त जरूरत थी। मैंने उसके लिए खून का इंतजाम किया। बच्चे को मेरे बारे में पता चला, तो आश्चर्यजनक तरीके से उसने मुझे 'परी आंटी' कहकर पुकारा। वह आईसीयू में भर्ती था। उसने मेरे सामने एक इच्छा रखी कि कुछ ही दिनों में आने वाले अपने जन्मदिन पर वह मेरे हाथों से बेक किया गया केक खाना चाहता है। मैंने उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए डॉक्टर से अस्पताल में उसका जन्मदिन मनाने की अनुमति मांगी। डॉक्टर ने दूसरे मरीजों का हवाला देते हुए पहले तो मना कर दिया, लेकिन बाद में कुछ शर्तों के आधार पर मान गए। मैंने दस मिनट के भीतर जन्मदिन समारोह निपटाकर उस बच्चे की ख्वाहिश पूरी की। अगली ही सुबह मुझे पता चला कि वह बच्चा इस दुनिया में नहीं रहा। उसकी मां ने मुझे उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने का आग्रह किया कि खून देने के नाते मैं उस बच्चे के परिवार का हिस्सा हूं।
ऐसी कई मार्मिक घटनाएं हैं, जिन्हें मैंने अपनी जिंदगी में अनुभव किया है। मैं बंगलूरू में रहती हूं और मेरे माता-पिता कर्नाटक से ही हैं, मगर मेरी परवरिश दिल्ली में हुई है। मेरे पिता संयुक्त राष्ट्र में एक वरिष्ठ अधिकारी थे। समाज सेवा की असली प्रेरणा मुझे अपने मां-बाप से ही मिली है। स्नातक करने के बाद मैंने सिंडिकेट बैंक की नौकरी से अपना करियर शुरू किया। वहां काम करते हुए मैं अक्सर वरिष्ठ मैनेजर के साथ स्थानीय बाजारों में जाया करती थी, जहां अनेक रेहड़ी वालों की आर्थिक समस्या से रू-ब-रू होती थी। मैं अपनी बचत उनके बच्चों की स्कूल फीस भरने में खर्च करती थी।
विज्ञापन
ऐसी कई मार्मिक घटनाएं हैं, जिन्हें मैंने अपनी जिंदगी में अनुभव किया है। मैं बंगलूरू में रहती हूं और मेरे माता-पिता कर्नाटक से ही हैं, मगर मेरी परवरिश दिल्ली में हुई है। मेरे पिता संयुक्त राष्ट्र में एक वरिष्ठ अधिकारी थे। समाज सेवा की असली प्रेरणा मुझे अपने मां-बाप से ही मिली है। स्नातक करने के बाद मैंने सिंडिकेट बैंक की नौकरी से अपना करियर शुरू किया। वहां काम करते हुए मैं अक्सर वरिष्ठ मैनेजर के साथ स्थानीय बाजारों में जाया करती थी, जहां अनेक रेहड़ी वालों की आर्थिक समस्या से रू-ब-रू होती थी। मैं अपनी बचत उनके बच्चों की स्कूल फीस भरने में खर्च करती थी।
विज्ञापन
Trending Videos
कुछ समय बाद मैंने पारिवारिक कारणों से बैंक की नौकरी छोड़ बंगलूरू विश्वविद्यालय में पढ़ाने का काम शुरू कर दिया। एक तरह से यहीं से वंचितों के लिए काम करने की मेरी शुरुआत हुई। मैंने सोचा कि व्यक्तिगत स्तर के बजाय टीम के साथ काम करके ज्यादा लोगों की मदद की जा सकती है। मैं सामाजिक काम करने वाले रोटरी क्लब से जुड़ गई। आठ साल में मैंने करीब तीस हजार गरीबों का मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया। लोगों को उनकी आंखों की ज्योति वापस दिलाने का सुख मेरे लिए अमूल्य था। और यही वजह थी कि मैं अपने आसपास के दूसरे जरूरतमंदों की मदद करना चाहती थी। इसी इच्छा के साथ मैं रोटरी क्लब के दूसरे प्रकल्प- रक्तदान से जुड़ गई। डेढ़ साल पहले एक निश्चित समय सीमा के भीतर करीब तीन हजार लीटर खून एकत्रित करके मैंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।
सिर्फ रक्तदान के क्षेत्र में काम करते हुए मुझे ग्यारह वर्ष हो गए हैं। मैंने अपने दम पर अब तक दो लाख से ज्यादा यूनिट खून इकट्ठा किया है। माना जाता है कि एक यूनिट खून चार लोगों की जान बचाता है, इस तरह कितने लाख लोगों को मेरे काम से फायदा हुआ है, यह स्पष्ट है।
मेरी उम्र चौंसठ साल है। मैं भविष्य में लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के साथ एक दूसरे तरह का काम पूरा करने की उम्मीद करती हूं। दरअसल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश में स्टेम सेल रजिस्ट्री न के बराबर या विश्व में सर्वाधिक कम है। यह एक विशेष पंजीकरण है, जो कैंसर रोगियों को एक नई जिंदगी दे सकता है। बिना इस पंजीकरण के किसी भी कैंसर रोगी की मदद नहीं की जा सकती। इसके साथ मैं लोगों में मधुमेह को लेकर जागरूकता फैलाती रहती हूं।
सिर्फ रक्तदान के क्षेत्र में काम करते हुए मुझे ग्यारह वर्ष हो गए हैं। मैंने अपने दम पर अब तक दो लाख से ज्यादा यूनिट खून इकट्ठा किया है। माना जाता है कि एक यूनिट खून चार लोगों की जान बचाता है, इस तरह कितने लाख लोगों को मेरे काम से फायदा हुआ है, यह स्पष्ट है।
मेरी उम्र चौंसठ साल है। मैं भविष्य में लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के साथ एक दूसरे तरह का काम पूरा करने की उम्मीद करती हूं। दरअसल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश में स्टेम सेल रजिस्ट्री न के बराबर या विश्व में सर्वाधिक कम है। यह एक विशेष पंजीकरण है, जो कैंसर रोगियों को एक नई जिंदगी दे सकता है। बिना इस पंजीकरण के किसी भी कैंसर रोगी की मदद नहीं की जा सकती। इसके साथ मैं लोगों में मधुमेह को लेकर जागरूकता फैलाती रहती हूं।