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27 साल की एक फुटबॉल खिलाड़ी, 'ब्रिटेन में खेला है, भारत में सिखाती हूं'

Mon, 20 Nov 2017 01:53 PM IST
तन्वी हंस
तन्वी हंस Updated Mon, 20 Nov 2017 01:53 PM IST
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success story of twenty-seven year old British football player Tanvi Hans, who born in delhi
Tanvie Hans

स्नातक के अंतिम दिनों में जब मैंने फुटबॉल में अपने सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए पुरस्कार जीता, उस दिन मुझे पक्का यकीन हुआ कि पढ़ाई की तुलना में खेलों में मेरे लिए ज्यादा संभावनाएं हैं। मेरे लिए वह अब तक का सबसे यादगार दिन है। मैंने शुरू से ही अपने भाइयों और अन्य लड़कों के साथ सभी खेलों में भाग लिया है। लेकिन फुटबॉल से मेरा विशेष लगाव था।

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मैं भाग्यशाली थी कि मेरा स्कूल उस समय दिल्ली में लड़कियों की फुटबॉल टीम शुरू करने वाला पहला स्कूल था। यही वजह रही कि दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का मुझे मौका मिला। और इसी से मुझे फुटबॉल के उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षण जारी रखने की प्रेरणा मिली।
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मैं दिल्ली में जन्मी सत्ताईस साल की एक ब्रिटिश फुटबॉल खिलाड़ी हूं। मेरा बचपन दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में बीता है। यहीं के वसंत वैली स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद मैंने जीसस ऐंड मैरी कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद इंटरनेशनल मैनेजमेंट में मास्टर्स की पढ़ाई करने मैं इंग्लैंड चली गई। मैं दिल्ली की टीम के लिए अंडर-14, 16 और 19 आयु वर्ग में खेल चुकी हूं। वर्ष 2008 में मेरा चयन अंडर-19 भारतीय फुटबॉल के लिए भी हुआ।

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success story of twenty-seven year old British football player Tanvi Hans, who born in delhi
Tanvie Hans - फोटो : Facebook

​मुझे ग्वालियर कैंप के लिए भी बुलाया गया, पर मेरे पास ब्रिटिश पासपोर्ट होने के कारण नागरिकता का मामला फंस गया और मैं भारत के लिए नहीं खेल सकी। इंग्लैंड जाने के कुछ समय बाद ही मुझे प्रीमियर लीग सदर्न डिविजन में टॉटेन्हम की टीम के लिए खेलने का मौका मिला। मैं एक दूसरे क्लब फुलहैम के लिए भी खेली हूं। ब्रिटेन में करीब तीन साल एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में बिताने के बाद मैं पिछले साल भारत लौटी। दरअसल मैं हमेशा से भारत के लिए खेलना चाहती थी, पर नियमों के मुताबिक हाथ बंधे होने के कारण ऐसा नहीं हो सका।

फिर भी जिस दिन इस कानून में संशोधन किया जाएगा और एआईएफएफ (अखिल भारतीय फुटबॉल संघ) मुझे अपने देश के लिए खेलने की अनुमति देगा, वह दिन मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी वाला होगा। भारत में फुटबॉल का स्तर अभी बहुत नीचे है और उसमें महिलाओं की स्थिति तो और भी बुरी है। यहां के लोगों, खासतौर से लड़कियों को मैं फुटबॉल सिखाना चाहती हूं, ताकि भारतीय महिला फुटबॉल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके। इसी उद्देश्य के साथ मैं फुटबॉल से जुड़ी कई योजनाओं पर काम कर रही हूं।

success story of twenty-seven year old British football player Tanvi Hans, who born in delhi

मैं दिल्ली के अपने पुराने ठिकाने वसंत कुंज स्थित एक मैदान में सप्ताह के दो दिन नियमित रूप से युवाओं को प्रशिक्षण देती हूं। इसके अलावा मुझे जहां कहीं भी मौका मिलता है, युवाओं की फुटबॉल प्रतिभा निखारने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती। अब तक मैंने कई दर्जन युवाओं को प्रशिक्षण दिया है। इसके अलावा मैं एक स्पोर्ट्स कंपनी के विज्ञापन से भी जुड़ी हूं, जो महिला सशक्तिकरण से संबंधित अभियान का हिस्सा है। मैं मानती हूं कि जब आप किशोरावस्था में होते हैं, तब आप एक बड़ा सपना देखते हैं।

लेकिन जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं, आप अधिक यथार्थवादी बनने की कोशिश करते हैं और यहीं से आपकी क्षमता पर प्रतिबंध लगना शुरू हो जाता है! इसलिए अवसरों की तलाश करने के लिए किशोरावस्था सही उम्र होती है। क्योंकि सही वक्त पर सफर की शुरुआत ही हमें उचित वक्त पर बाधाओं से पार दिला सकती है।

-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

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