विदेश की नौकरी छोड़ देश का पानी बचा रही हूं: पल्लवी बिश्नोई
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जबकि भारत में तो अभी तक सीवेज लाइन तक नहीं बन पाई हैं। गंदा पानी सीधे नदियों या फिर भूजल को प्रदूषित कर रहा है। लोग टैंकर का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। ये सारी बातें यूरोप और अमेरिका में सपने में भी नहीं दिखेंगी। यही प्रमुख वजह रही कि मैं लाखों की नौकरी छोड़ अपने वतन लौट आई और वर्ष 2013 में पर्यावरण के क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू किया। अमेरिका में की गई बचत और परिवार की मदद से कुल पांच लाख रुपये की पूंजी से शुरू हुए मेरे काम का उद्देश्य अपशिष्ट जल प्रबंधन, हरित ऊर्जा जैसे संशोधित विकास व्यवस्था को धार देना था।
मेरी अब तक की यात्रा काफी हद तक चुनौती भरी है। भारत में अमेरिका की तुलना में काम करना ज्यादा मुश्किल है। यहां लोगों में जागरूकता की भारी कमी है। किसी को भी अपने काम के बारे में समझा पाना भी आसान नहीं रहा। साथ ही यहां किसी भी परियोजना को लागू करने की खातिर जरूरी नियम-कानूनों की समझ के लिए मुझे एक कोर्स तक करना पड़ा। सरकारी व्यवस्था भी कुछ ऐसी है कि अगर इसके माध्यम से कोई काम करना है तो, जो जरूरत समाज को आज है, वह लगभग दस साल बाद जमीन पर उतरेगा। जबकि प्राइवेट तरीके से काम करना मेरे लिए आसान रहा।
मैं अपने स्टार्टअप की मदद से उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बीस से ज्यादा परियोजनाओं पर काम कर रही हूं। चूंकि मेरे गृह प्रदेश, उत्तर प्रदेश में पानी की उपलब्धता सुगम है, सो लोगों में भविष्य के खतरे के प्रति लापारवाही साफ देखी जा सकती है। पर राजस्थान, जहां वर्तमान में भी पानी सर्वदुर्लभ है, वहां लोगों में हमारे काम से जागरूकता आई है। हमारा काम पूर्णतया सामुदायिक व्यवस्था के अंतर्गत आता है। हम डीसेंट्रेलाइज्ड वॉटर सिस्टम आधारित प्लांट पर काम करते हैं, जो कि उपयोग किए जा चुके पानी को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाता है। अपनी सभी परियोजनाओं के द्वारा मैं हर दिन करीब तैंतीस लाख लीटर पानी बचा रही हूं, जिसके फलस्वरूप इतना ही पानी विभिन्न स्रोतों में भी बच जाता है।
इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर हम शहर के एक बड़े पार्क के शौचालयों के अपशिष्ट जल को छोटे-छोटे एसटीपी यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये शुद्ध कर रहे हैं। अपने स्टार्टअप के तहत हम कुल आठ लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। मेरे काम को देखते हुए हाल में मुझे विमिन एम्पावरमेंट क्वेस्ट-2017 में देशभर की 10 शीर्ष महिलाओं में चुना गया है। तकनीक की मदद से पर्यावरण को लेकर जागरूकता फैलाने वाली महिलाओं का यह चुनाव केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जीएचसीआई नामक संस्था ने किया है। मेरा मानना है कि हमें अपने देश में एक ऐसी व्यवस्था लागू करनी होगी, जिसके तहत साफ पानी अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंच सके।