फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bashindey ›   Success story of Arundhati Mhatre- who leave software engineer job and close to nature

अरुंधती म्हात्रे: कंप्यूटर की दुनिया छोड़ कुदरत के करीब आ गई

Fri, 19 Jan 2018 05:42 PM IST
अरुंधती म्हात्रे
अरुंधती म्हात्रे Updated Fri, 19 Jan 2018 05:42 PM IST
विज्ञापन
Success story of Arundhati Mhatre- who leave software engineer job and close to nature
Arundhati Mhatre

गर्मी का मौसम था। आंगन में तुलसी का पौधा लगा था। एक तोता उड़कर आया और तुलसी के पौधे पर बैठ गया। मैं एकटक उस तोते को देख रही थी, जिसकी वजह थी उस तोते की हरकत। तोता बड़ी सफाई से तुलसी के बीज खाए जा रहा था। मुझे पता था कि तुलसी के बीज गर्मी के मौसम में राहत देते हैं। लेकिन यह बात तोते को किसने बताई, मेरा आश्चर्य इसी बात को लेकर था। मनुष्य पर प्रकृति की श्रेष्ठता साबित करने वाले ऐसे ढेरों उदाहरण मैंने अनुभव किए हैं।

विज्ञापन


शुरुआत तब हुई थी, जब दस साल पहले मेरे एक दोस्त ने मुझे एक बर्ड शेल्टर बॉक्स (एक तरह का कृत्रिम घोंसला) उपहार स्वरूप दिया था। मैंने उसे अपने घर की दीवार पर लगाया। कुछ क्षण ही बीते थे कि उसमें एक चिड़िया रहने आ गई। उसका व्यवहार इस तरह दिख रहा था कि वह जैसे हमारे शेल्टर बॉक्स का इंतजार ही कर रही थी। पूरे परिवार के साथ मेरी दिलचस्पी उस चिड़िया में बढ़ती जा रही थी। उसकी हर हरकत हमें आकर्षित कर रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे प्रकृति ने उस चिड़िया के मार्फत मेरे लिए कोई संदेशा भेजा है।
विज्ञापन


मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं। उस वक्त मैं एक अच्छी-खासी कॉरपोरेट नौकरी कर रही थी। लेकिन जैसा अमूमन हर नौकरी करने वाले शख्स के साथ होता है, हर दिन एक जैसे काम से मैं ऊबने लगी थी। संतुष्टि और मेरे बीच की खाई हर दिन बढ़ती जा रही थी। उस चिड़िया ने मुझे खुश होने का एक मौका दिया था। और इसी का नतीजा था कि मैं नियमित अंतराल पर अपने पति के साथ मुंबई के आसपास के हरित क्षेत्रों में घूमने जाने लगी। पक्षियों, तितलियों तथा प्रकृति के प्रति मेरा प्रेम हर दिन प्रगाढ़ होता जा रहा था। मैंने कैमरे तथा अपने अवलोकन के माध्यम से पक्षियों और तितलियों के तमाम विशेष व्यवहारों को समझना शुरू कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

Success story of Arundhati Mhatre- who leave software engineer job and close to nature
Arundhati Mhatre

यों समझिए कि कंप्यूटर की दुनिया में रहने वाला शख्स कुदरती दुनिया के करीब आ रहा था। मैं चिड़ियों के प्रेम में ऐसे पड़ी कि भौतिक दुनिया मुझे छोटी लगने लगी। यह मेरे प्रेम का विस्तार ही था कि मैंने अपने घर में सौ से ज्यादा बर्ड शेल्टर बॉक्स लगा डाले।

पक्षियों के लिए काम करने वाले विभिन्न एनजीओ के लिए स्वयंसेवक के तौर पर काम करना शुरू किया। मगर उन एनजीओ के लिए काम करते हुए मैंने देखा कि वे संगठन किस तरह पर्यावरण प्रेमियों की भावनाओं को अपने व्यापार में बदल देते हैं। मसलन, यदि किसी को बर्ड शेल्टर बॉक्स चाहिए, तो उन्हें वे काफी महंगे दामों में उपलब्ध कराते हैं।

मुझे यह देखकर खराब लगा। इसके बाद मैंने कई किताबें पढ़ी, पर्यावरणविदों से मिली और जाना कि कितने कम पैसे में बर्ड शेल्टर बॉक्स बनाए जा सकते हैं। तीन साल पहले मैंने अपनी संस्था अरेण्या की स्थापना की, जिसके मदद से बिना मुनाफा लिए लोगों तक सस्ते शेल्टर बॉक्स पहुंचाने लगी। इस काम से लोगों में जागरूकता आने लगी।

मेरे काम की चर्चा हुई, तो मुझे तमाम स्कूलों में पारिस्थितिकी विषय पर बोलने के लिए बुलाया जाने लगा। एक वक्त ऐसा आया कि मैं हफ्ते के अलग-अलग दिनों में विभिन्न स्कूलों में नियमित रूप से जाने लगी। तीन महीने पहले घर के ऋण की किस्तों की जिम्मेदारी से निवृत्त होने के बाद मैंने इंजीनियरिंग की नौकरी भी छोड़ दी। क्योंकि अब मुझे ज्यादा पैसों की नहीं, बल्कि पक्षियों की चिंता अधिक है और इसी काम में मुझे संतुष्टि मिलती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed