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'यौन हिंसा से बचाने के लिए स्पर्श की समझ जरूरी है'

सरोज कुमारी Updated Sun, 09 Sep 2018 11:00 PM IST
Saroj kumari- IPS Officer Idea Is Helping School Kids Fight Sexual Abuse
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मैं आईपीएस अधिकारी हूं और वड़ोदरा, गुजरात में डीसीपी हूं। नौकरी में आने से पहले से ही मैं लड़कियों की सुरक्षा के मामले में संवेदनशील थी। लेकिन नौकरी में आने के बाद यौन हिंसा झेलने वाली लड़कियों की शारीरिक-मानसिक दुर्दशा मैंने बहुत नजदीक से देखी। चूंकि मैं जिस पद पर हूं, वहां से लड़कियों की सुरक्षा के लिए मैं बेहतर कदम उठा सकती हूं, यह सोचकर कुछ साल पहले यौन हिंसा की शिकार लड़कियों का भरोसा लौटाने के लिए मैंने 'समझ स्पर्श की' या एसएसके नाम से एक पहल की।
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इसके तहत मैंने बारह महिलाओं की एक टीम बनाई-ये सभी पुलिसकर्मी हैं। इन्हें यौन हिंसा से पीड़ित लड़कियों के मानसिक उपचार के लिए प्रशिक्षित किया गया है। सुरक्षा सेतु सोसाइटी नाम की संस्था ऐसी लड़कियों की आर्थिक मदद कर रही है, जिससे हमारा काम आसान हो गया है। हमारी टीम स्कूलों को चिट्ठियां लिखकर उनके यहां पहुंचती है। टीम का फोकस मुख्यतः पांच से 15 साल की लड़कियों पर रहता है।

हम तय समय पर स्कूल में पहुंचती हैं, जहां लड़कियों के साथ उनके अभिभावक भी होते हैं, ताकि इस मुद्दे पर खुलकर और स्पष्ट तरीके से बात हो सके। अभिभावकों को बताया जाता है कि अगर उनकी बच्चियां यौन अत्याचार की शिकायत करें, तो उन्हें क्या करना चाहिए। उन्हें यह भी बताया जाता है कि ऐसे मामलों में वे अपनी बच्चियों से किस तरह बात कर सकते हैं। ऐसे ही शिक्षकों को बताया जाता है कि बच्चियों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों का वे गंभीरता से नोटिस लें, क्योंकि यह यौन हिंसा के कारण हो सकता है। उदाहरण के लिए, बहुत हंसने और बात करने वाली लड़की अगर एकाएक खामोश हो जाए, तो यह चिंता की बात है।
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