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बहन की मौत ने डॉक्टर बनने के लिए किया प्रेरित, तकनीक सस्ती करके दी हजारों को दृष्टि

Fri, 06 Apr 2018 04:05 AM IST
संदुक रुइत
संदुक रुइत Updated Fri, 06 Apr 2018 04:05 AM IST
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Sanduk Ruit- renowned doctor from Nepal helped over 1 lakh people see again
DR. SANDUK RUIT

पूर्वी नेपाल के ताप्लेजुंग जिले में पहाड़ों के बीच ओलांगचुंग गोला नाम का मेरा गांव है। जब मैं स्कूल जाने के काबिल हुआ था, तब मेरे गांव से सबसे नजदीकी स्कूल तक पैदल पहुंचने में एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लगता था। स्कूल ही नहीं, आसपास स्वास्थ्य केंद्र नाम की भी कोई सुविधा नहीं थी। मेरे मां-बाप अनपढ़ थे, लेकिन उन्होंने पढ़ाई के प्रति मेरी इच्छा का सम्मान किया और मुझे दार्जिलिंग पढ़ने भेज दिया, क्योंकि दार्जिलिंग ही हमारे गांव से सबसे नजदीकी शिक्षा केंद्र था।

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मैं सत्तरह साल का था, जब क्षय रोग की वजह से मेरी बहन की मौत हो गई थी। बहन से मेरा विशेष लगाव था। उसकी मौत ने मुझे डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया। उसके बाद मैं डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ता गया। दार्जिलिंग में स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरा चयन लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में हो गया। डॉक्टरी में स्नातक पूरा करने के बाद मेरे रास्ते खुल चुके थे। मैं दिल्ली आ गया और फिर यहां स्थित एम्स से नेत्र रोग विज्ञान में तीन वर्षीय कोर्स करके विशेषज्ञता हासिल की।
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मैं 1980 में पच्चीस वर्ष की आयु में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बन चुका था। नेपाल वापस आने के अगले ही साल मुझे नेपाल दृष्टिबाधित सर्वेक्षण में काम करने का मौका मिला, जहां मेरी मुलाकात ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टर फ्रेड हालोस से हुई। फ्रेड ने मुझे एक गुरु की तरह करियर से जुड़ी सलाह दी। मैं उनसे प्रभावित हुआ और उनके साथ ऑस्ट्रेलिया गया, जहां सिडनी के प्रिंस ऑफ वेल्स अस्पताल में चौदह महीनों तक अध्ययन किया।

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Sanduk Ruit- renowned doctor from Nepal helped over 1 lakh people see again

मैं अध्ययन करते वक्त इसी विषय पर केंद्रित रहा कि हिमालयी क्षेत्र में अंधत्व निवारण कैसे हो। मुझे वहां मोतियाबिंद ऑपरेशन की सबसे उन्नत तकनीक के बारे में जानकारी हुई। वह तकनीक प्रत्यारोपित अंतःक्रियात्मक लेंस पर आधारित थी। लेकिन उस तकनीक की सबसे बड़ी दिक्कत थी कि वह बहुत महंगी थी। मैं वर्षों तक इसी जुगत में लगा रहा कि कैसे इसे सर्व सुलभ बनाया जाए, ताकि नेपाल और भारत के गरीब लोग इससे लाभान्वित हों।

वर्षों की मेहनत के बाद आखिरकार मुझे सफलता मिली और मैंने उस तकनीक को नब्बे फीसदी तक सस्ता करने में सफलता प्राप्त कर ली, जिसे आगे चलकर तीस से ज्यादा देशों में स्वीकार किया गया। हजारों रुपयों का खर्च चंद सौ रुपयों तक सिमट गया। गरीबों की सेवा के लिए मैंने काठमांडू में विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त तिलगंगा आंख अस्पताल की स्थापना की है। साथ ही मैं अपनी टीम के साथ मिलकर नेपाल के सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों की आंखों का उपचार करता रहता हूं।

हम सभी एक उद्देश्य के साथ धरती पर आए हैं और यह बहुत खास बात है कि मुझे एहसास हो गया है कि मेरा उद्देश्य क्या है। मैं दुनिया भर में कई अन्य केंद्र स्थापित करने की कोशिश कर रहा हूं। मुझे उन अलग-अलग रोगियों से ताकत मिलती है, जो देखने में सक्षम नहीं होते और इलाज के महज 12 घंटे बाद जब उनकी आंखों की पट्टी खुलती है, तो दुनिया की खूबसूरती निहार रहे होते हैं। उनके चेहरे पर उस वक्त की मुस्कराहट वास्तव में मेरे लिए एक शक्तिशाली क्षण होता है, बहुत ही शक्तिशाली क्षण! कई लोग ताउम्र इसके लिए तरसते हैं, यह ताकत किस्मत वालों को नसीब होती है। मैं कितना खुशनसीब हूं कि मेरे पास इसकी बहुतायत है।
-पद्मश्री से सम्मानित नेपाली डॉक्टर के साक्षात्कारों पर आधारित।

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