अच्छी सेहत से ही होगा खुशहाल देश का निर्माण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चेन्नई के उत्तरी इलाके में पड़ता है कोडुंगैयूर। मैं इसी इलाके के एक हाई स्कूल में सातवीं और नौवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाता हूं। पिछले कई वर्षों से मैं छात्रों में एक खास बदलाव देख रहा था। जो बच्चे सुबह बिना नाश्ता किए ही स्कूल आ जाते हैं, उन्हें सनस्ट्रोक और कई अन्य बीमारियां हो जाती हैं। बीमार बच्चे न तो स्कूल के लिए ठीक हैं और न ही समाज की शोभा बढ़ाते हैं।
मैंने कई मर्तबा इन बच्चों को नाश्ता करके स्कूल आने की सलाह दी, लेकिन कई वजहों से स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। दरअसल ये बच्चे बहुत गरीब परिवार से आते हैं और इनके घरवाले इन्हें रोज अच्छा नाश्ता करा पाने में असर्मथ होते हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे वैसे भी घोषित रूप से गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। मैं हमेशा यही सोचता रहता था कि मेरे स्कूल के बच्चे हर सुबह हंसते-खिलखिलाते हुए स्कूल आएं, पर खाली पेट लिए उनका उदास चेहरा मुझे सालता रहता था। आखिरकार मैंने तय किया कि मैं खुद ही अपने खर्चे पर इन बच्चों को रोज नाश्ता कराऊंगा।
भले ही मैं सिर्फ दो कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाता हूं, लेकिन नाश्ता कराने के लिए मैंने पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक के बच्चों की सूची में से उन बच्चों को चिह्नित किया, जो बिना नाश्ता किए स्कूल आते हैं। यह पता लगाने में थोड़ा वक्त लगा, लेकिन आखिरकार कुछ दिनों में ऐसे बच्चों की सूची तैयार हो गई।
मैं चाहता था कि हमारे स्कूल में कोई भी बच्चा खाली पेट पढ़ाई न करे
इस तरह से करीब सवा सौ बच्चों की सूची तैयार हो गई, जिन्हें मुझे हर रोज अच्छा नाश्ता कराना था। यह संख्या बड़ी थी, और मैं यह नहीं चाहता था कि नाश्ते की वजह से उनकी कक्षाएं किसी तरह प्रभावित हों। मैंने एक समय-सारिणी बनाई, जिसमें सुबह साढ़े सात से आठ बजे तक दसवीं के बच्चों को और सवा आठ से पौने नौ बजे तक दूसरे बच्चों को नाश्ता कराया जाए।
मुझे खुशी है कि मैं अपनी बचत की रकम उन बच्चों पर खर्च कर रहा हूं, जो अच्छे स्वास्थ्य के साथ आगे चलकर देश को सूद समेत वापस करेंगे। कुछ साल पहले इस स्कूल में मात्र 370 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। मुझे नहीं पता कि नाश्ता इसकी वजह है कि नहीं, लेकिन आज यहां बच्चों की संख्या 980 तक पहुंच गई है। छात्रों के अनुपात में शिक्षक भी बढ़े हैं और उनकी संख्या 11 से 35 हो गई है।
मेरी इस पहल का स्कूल के प्राध्यापक ने भी समर्थन किया है और वे इसी तरह का एक दूसरा प्रयोग भी शुरू करने वाले हैं। दसवीं के जो बच्चे पढ़ने में कमजोर हैं और परीक्षाओं में उनके अच्छे अंक नहीं आते हैं, वे उनके लिए अगले महीने से निःशुल्क ट्यूशन की व्यवस्था करने वाले हैं। इन सारी कवायदों से हमारे स्कूल में छात्रों की तादाद बढ़ने का क्रम जारी है। स्कूल प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए विभिन्न प्रकार की सुविधाओं में इजाफा कर रहा है। हाल ही में यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हमारा स्कूल अपने इलाके का पहला सरकारी स्कूल है, जहां अध्यापक और छात्र, दोनों के लिए बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था की गई है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।