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'दो साल से स्कूल में नहीं था गणित का कोई योग्य टीचर, रिटायर होते ही पूरा किया अपना वायदा'

Fri, 25 May 2018 08:00 PM IST
मुकेश सहाय
मुकेश सहाय Updated Fri, 25 May 2018 08:00 PM IST
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Mukesh Sahay- former Assam DGP is now school teacher, He teaches mathematics class XII students
Mukesh Sahay

पिछले साल जब मैं इस स्कूल के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आया था, तब मैं असम राज्य के पुलिस महानिदेशक के पद पर था। जिज्ञासावश मैंने वहां स्कूल के स्टाफ से स्कूल के इतिहास के बारे में पूछा। मुझे पता चला कि इस स्कूल के तीन पूर्व छात्र असम के मुख्यमंत्री पद तक पहुंच चुके हैं। मैं इस बात से बहुत प्रभावित हुआ और स्कूल के बारे में और जानने की इच्छा जाहिर की। मुझे यह जानकर थोड़ा आश्चर्य भी हुआ कि इतने प्रतिष्ठित स्कूल में उस समय गणित पढ़ाने वाला कोई अच्छा अध्यापक नहीं था। यह बात मुझे कई छात्रों ने बताई। मैंने वहां के लोगों से वायदा किया कि इस दिशा में मैं उनकी हर संभव मदद करूंगा।

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मेरा जन्म बिहार के छपरा में हुआ था। लेकिन मैं पला-बढ़ा राजधानी पटना में। गणित और सांख्यिकी से मास्टर्स करने के बाद 1984 में मेरा चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में हो गया। अच्छी-खासी नौकरी मिलने के बावजूद कुछ नया जानने की मेरी इच्छा खत्म नहीं हुई थी और ड्यूटी के दौरान भी मैंने पढ़ाई जारी रखी। 1990 में जब मैं सीबीआई में अपनी सेवाएं दे रहा था, तभी वकालत की पढ़ाई भी पूरी की।
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असम के उस स्कूल के लिए किया गया मेरा वायदा हर वक्त मुझे याद आता। वह भी तब, जब मैं खुद गणित की ठीक-ठाक जानकारी रखता था। लेकिन एक अशांत राज्य के कानून-व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी के चलते मैं चाहकर भी कुछ कर नहीं पाया। इसी साल अप्रैल में रिटायर हो गया। मैंने उसी दिन उस स्कूल के प्रिंसिपल से फोन पर बात की और उनसे पूछा कि उन्हें गणित का कोई योग्य शिक्षक मिला या नहीं? प्रिसिपल ने जवाब दिया-नहीं।

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'फिलहाल मैं छात्रों को कैलकुलस पढ़ाता हूं'

उन्होंने कहा कि बारहवीं तक के बच्चों को जैसे-तैसे गणित पढ़ाया जा रहा है, अच्छे शिक्षक की उनकी तलाश अब भी जारी है। दरअसल प्रिंसिपल खुद कैमिस्ट्री के शिक्षक हैं, लेकिन सांख्यिकी के शिक्षक के साथ मिलकर वे किसी तरह गणित की कक्षाएं ले रहे थे। मैंने तुरंत प्रिसिंपल से कहा कि मैं कल से आपके स्कूल में गणित पढ़ाने आऊंगा। प्रिसिंपल साहब को एक बार तो विश्वास ही नहीं हुआ कि किसी राज्य के डीजीपी का रिटायरमेंट प्लान ऐसा भी हो सकता है!

मैंने अगले दिन से ही अपना नया काम संभाल लिया। मैंने बारहवीं में पढ़ने वाले बच्चों को अपने ही अंदाज में पढ़ाना शुरू किया। बारहवीं में कुल दस छात्र हैं, जिनमें तीन छात्राएं भी हैं। मैं दिन में एक ही कक्षा लेता हूं, जो एक से दो घंटे का होता है। फिलहाल मैं छात्रों को कैलकुलस पढ़ाता हूं। अभी मैं इससे ज्यादा क्लास इसलिए नहीं लेता, क्योंकि लंबे समय से गणित के शिक्षक की अनुपस्थिति ने छात्रों को इस विषय के प्रति थोड़ा नीरस बना दिया है।

मैं चाहता हूं कि पहले बच्चों में गणित के प्रति रुचि पैदा हो। दरअसल अध्यापन मैं इससे पहले भी कर चुका हूं। चूंकि मैं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से था, इसलिए हाई स्कूल के बाद मैंने कुछ समय तक एक स्कूल में गणित के शिक्षक की पार्ट टाइम नौकरी की थी। लेकिन नियमित तौर पर पढ़ाना अलग तरह की जिम्मेदारी है। बहुत लोग मुझसे सवाल करते हैं कि इतनी प्रतिष्ठित नौकरी करने के बाद मुझे स्कूल में पढ़ाने की आखिर क्या सूझी। मैं यह काम अपनी खुशी से कर रहा हूं। इससे मुझे आनंद मिलता है। इसके अलावा यह समाज को मेरी तरफ से एक छोटा-सा योगदान भी है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

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