फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bashindey ›   Moni Begum- many teenage girls saved from child marriage

सहेली का दर्द देख दर्जनों किशोरियों को बाल विवाह से बचाया

Mon, 12 Mar 2018 05:23 PM IST
मोनी बेगम
मोनी बेगम Updated Mon, 12 Mar 2018 05:23 PM IST
विज्ञापन
Moni Begum- many teenage girls saved from child marriage
Moni Begum

मैं बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले के एक गांव में रहती हूं। मेरा जिला बांग्लादेश के उन इलाकों में शामिल किया जाता है, जहां बाल विवाह एक सामान्य बात है। मेरी उम्र सिर्फ सत्तरह साल है। जब मैं नौ साल की थी, तब मेरी बड़ी बहन की शादी हो गई थी, जो उस वक्त केवल बारह की ही थी। शादी के करीब 15 दिन बाद मेरी बहन अपनी ससुराल से वापस घर लौट आई। पहले से ज्यादा दुबली हो चुकी मेरी बहन को उस वक्त कोई पहचान नहीं पा रहा था।

विज्ञापन


उसके पूरे शरीर पर चोटों के निशान थे। पता चला कि उसका पति शराब पीकर उसे पीटता था। उस घटना ने मुझे पहली बार यह एहसास कराया कि एक छोटी-सी बच्ची की जिंदगी शादी के बाद किस कदर बदल जाती है। और कोई भी इस बात को गंभीरता से नहीं लेता, कम से कम मेरे परिवेश में तो इस पर चिंता जताने वाला कोई नहीं था। मैं तेरह की हुई थी, तो मेरी एक करीबी सहेली की भी शादी हो गई।
विज्ञापन


उसकी मासूमियत देखकर मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके मां-बाप उसे इतनी जल्दी घर से दूर कर देंगे। मैं नहीं चाहती थी कि सुंदर और भोली-सी मेरी प्यारी सहेली का हश्र भी मेरी बड़ी बहन जैसा हो। मैं उसकी शादी रोकना चाहती थी, लेकिन ऐसा कर नहीं सकी। कानूनन अवैध होने के कारण लड़कियों के मां-बाप शादी की पूरी प्रक्रिया गुपचुप तरीके से अंजाम देते हैं, जिसे समाज की मान्यता मिली होती है। कानून बस आंख पर पट्टी बांधे रह जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

मेरी सहेली जब लंबी छुट्टी के बाद स्कूल लौटी, तो आश्चर्यजनक तरीके से उसके व्यवहार में बदलाव आ चुका था। उसका वजन कम हो गया था और उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। बाल विवाह के खतरनाक परिणामों को इतने करीब से महसूस करने के बाद मैंने इस दिशा में कुछ करने का निश्चय किया।

मैं आसपास के शादी समारोहों में जाकर लड़कियों के मां-बाप से बात करने की कोशिश करने लगी। मैं उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणाम बताने के बजाय समझाती कि लड़कियां परिवार पर बोझ नहीं हैं, बस उन्हें मौकों की जरूरत है। कई अभिभावक मुझसे यह सवाल करते कि 'क्या गारंटी है कि लड़कियों को देर तक घर में रखने से उनकी अस्मत बची रहेगी!' मैं उनको जवाब देती कि 'शादी के बाद पति द्वारा की जाने वाली जबर्दस्ती को भी बलात्कार ही माना जाता है।

केवल शादी हो जाने से आपकी बच्ची खुश नहीं रहेगी।' इस काम के साथ मैं तमाम किशोरियों से मिलकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह सिखाती कि वे कैसे बाल विवाह करने से मना कर सकती हैं। यह उनका कानूनी हक है। इस तरह मैंने कई लड़कियों और उनके मां-बाप को अपनी बातों से प्रभावित कर उनकी जिंदगी बेहतर करने में मदद की। कई मर्तबा मैंने अपने काम में पुलिस की भी मदद ली। मैं अनेक एनजीओ के संपर्क में भी आई, जो इस क्षेत्र में काम कर रहे थे।

हालांकि समाज की रूढ़िवादी सोच बदल पाना बेहद मुश्किल था। लेकिन मैंने कोशिश नहीं छोड़ी। लोगों को जब यह एहसास हो गया कि मैं पीछे हटने वाले लोगों में से नहीं हूं, तो उन्होंने मुझे गंभीरता से लेना शुरू किया। लोग मुझसे छिपकर शादी के न्योते बांटते, वे हर प्रयास करते, जिससे मुझे शादी की भनक न लगे। मगर मैं बिन बुलाए मेहमान की तरह, जहां संभव हो, पहुंचती हूं और अपना काम करती हूं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed