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'जब लोग मेरी सहायता से उत्साहित होकर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, तब मुझे परम संतुष्टि मिलती है'

Wed, 20 Jun 2018 03:55 PM IST
मुन्नेसा मनागुली
मुन्नेसा मनागुली Updated Wed, 20 Jun 2018 03:55 PM IST
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Karnataka auto driver Munnesa Managuli gives free rides to pregnant women and old persons
Munnesa Managuli

वह रो रही थी, चिल्ला रही थी। लेकिन यह उसकी बदकिस्मती थी कि एंबुलेंस या किसी भी प्रकार के वाहन के अभाव में वह अस्पताल नहीं पहुंच पाई। नतीजतन मेरी आंखों के सामने दर्द से हारकर उसने दम तोड़ दिया। कर्नाटक के बसवनबागेवाड़ी तालुका में नारायणपुरा गांव की यह घटना करीब छब्बीस साल पुरानी है, लेकिन बेमौत मरती उस गर्भवती महिला का कराहता चेहरा मुझे आज भी याद है। यही वजह है कि जिस दिन मैं ऑटो ड्राइवर बना, उसी दिन मैंने फैसला किया कि मैं इस तरह की किसी भी जरूरतमंद सवारी से पैसे नहीं लूंगा। स्नातक होने के बावजूद मुझे बेरोजगारी का सामना करना पड़ा।

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कई वर्षों तक कोई हल न निकलता देख मैंने ग्यारह साल पहले अपने गुजर-बसर के लिए शहर में ऑटोरिक्शा चलाना शुरू किया था। ऑटो चलाते हुए मैंने यह कभी नहीं सोचा कि कोई जरूरतमंद मिलेगा, तो ही मैं उसकी मदद करूंगा। बल्कि मैंने ऐसे लोगों की मदद करने को अपना दैनिक लक्ष्य बनाया, जिनके पास आपातकाल के दौरान यात्रा का उचित साधन नहीं है। मैं ढूंढ-ढूंढकर ऐसे लोगों तक पहुंचता हूं।
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मैं किसी पुरस्कार या प्रशंसा के लिए यह सेवाकार्य नहीं करता हूं, बल्कि इस काम से मेरी आत्मसंतुष्टि और सामाजिक जिम्मेदारी, दोनों जुड़ी हैं। ऐसा भी नहीं है कि मैं आर्थिक तौर पर संपन्न हो गया हूं। आज तक मेरे पास खुद का ऑटोरिक्शा नहीं है।

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मैं जो ऑटो चलाता हूं, वह किराये का होता है। अक्सर ऐसा होता है कि दिन में सेवाकार्य के चलते दिहाड़ी तो दूर, उल्टे ऑटोरिक्शा का किराया जेब से भरना पड़ता है। लेकिन इस बात का मुझे कभी मलाल नहीं होता, क्योंकि मुझे पता है कि लोगों की मदद करके मैं जो हासिल करता हूं, उसका कोई मोल नहीं होता। यात्रियों की सहूलियत के लिए, मैंने अपने ऑटो पर अपने संपर्क विवरण वाले पोस्टर चिपका रखे हैं, जिससे लोग मुझे किसी भी आपातकाल में संपर्क कर सकें। 

जाहिर है कि मैं अपने अन्य सामान्य सवारियों से मीटर के हिसाब से ही किराया लेता हूं, और अपने नियमित यात्रियों के लिए पूरे दिन की सेवाएं भी देता हूं। किसी भी वक्त मुझे किसी जरूरतमंद का फोन आ जाए, तो मैं अपनी पैसों वाली सवारियों को भी दरकिनार कर उन तक तत्काल पहुंच जाता हूं। मैं जिन लोगों की मदद करता हूं, भविष्य में भी उनका कुशल क्षेम जानने के लिए उनकी पूरी जानकारी एक डायरी में नोट करता हूं।

डायरी में विवरण के हिसाब से मैंने अब तक दो हजार से भी ज्यादा लोगों की मदद की है।कुछ वर्ष पहले किसी कारणवश मेरे बड़े भाई गुजर गए थे। इस वजह से मेरी भाभी और उनकी चार बेटियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी मुझ पर आन पड़ी। मैं बयालीस साल का हो गया हूं, लेकिन मैंने शादी नहीं की है, क्योंकि मुझे लगता है कि इससे मेरी वर्तमान जिम्मेदारियां प्रभावित होंगी। मैं चाहता हूं कि मेरे भाई के परिवार को कभी कोई परेशानी न हो। जब लोग मेरी सहायता के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उत्साहित महसूस करते हैं, तब मुझे इस सेवा से परम संतुष्टि मिलती है, जो मेरी सभी परेशानियां को एक झटके में भुला देने का साहस देती है। मेरा सपना है कि एक दिन मेरे पास मेरा खुद का ऑटोरिक्शा हो, जिससे मेरा सेवाकार्य और आसान हो सके।

-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

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