बचपन से नेत्रहीन थीं, इसलिए शादी न हो पाई, आज इतनी कामयाब, आपको गर्व होगा
ऐसे हालात में मेरा परिवार पर बोझ होना लाजिमी था। पर कहते हैं न कि अगर ऊपर वाला किसी से कुछ छीनता है, तो उसे कुछ अतिरिक्त ताकत भी देता है। मुझे एहसास होता था कि मैं महज स्पर्श से ही किसी भी वस्तु की सटीक पहचान कर सकती हूं। फिर वह कोई सजीव प्राणी हो या निर्जीव सामान। पेड़-पौधों की पत्तियों को छू कर अंदाजा लगा लेती थी कि ये किसकी पत्तियां हैं।
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वैसे भी गांव में रहने वाले को विभिन्न वनस्पतियों से वास्ता पड़ता रहता है। मैं अपने भाई-भतीजों के साथ रहती हूं। घर के लोगों के लिए कुछ योगदान कर सकूं, इसके लिए मैं खेती-बागवानी में हाथ बंटाती रहती थी।
इसके अलावा जिंदगी बसर करने के लिए मुझे सरकार की ओर से तीन सौ रुपये मासिक दिव्यांगता पेंशन मिलती थी। लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि पेंशन पर आश्रित होने के बजाय मैं भी सामान्य लोगों की तरह काम करके जीवन जी सकती हूं। इसके लिए मैंने अपनी उसी स्पर्श वाली खूबी का इस्तेमाल करने की ठानी, जिसके आधार पर मुझे लगता था कि आंखें इतनी भी जरूरी नहीं हैं!
यह संस्था मध्य प्रदेश के दिव्यांगों की बेहतरी के लिए काम करती है। तीन साल पहले संस्था के लोग मेरे पास आए थे। उन्होंने मेरी योग्यता परखने के लिए मुझे कुछ फल छूकर पहचानने को कहा। मैंने सभी चीजों की सही पहचान की।
हालांकि पचपन पार की उम्र में उस वक्त कोई नया काम शुरू करना सामान्य नहीं था। पर मैंने ऐसा किया और संस्था की मदद से हमें जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में खेती का प्रशिक्षण दिया गया। दरअसल हम खेती करना तो जानते थे, पर बिना प्रशिक्षण के कोई भी पौधा कहीं भी रोप देते थे। पर जब हमें सिखाया गया कि पौधों की क्यारियां उत्तर-दक्षिण दिशा में बनानी चाहिए, जिससे पौधों पर सीधी धूप नहीं पड़ती। साथ ही हमें अच्छे बीज और उचित खाद का इस्तेमाल करना भी सिखाया गया। इस तरह से हमें प्रशिक्षण के माध्यम सें बागवानी की वैज्ञानिकता से परिचित कराया गया।
बागवानी का संपूर्ण काम हम दिव्यांगजन ही करते हैं। बस सब्जियों को मंडी तक पहुंचाने में हमारे परिजन मदद करते हैं। हमारी देखा-देखी पास के दूसरे गांव- बुधुआ में भी दिव्यांगों ने इसी प्रकल्प को अपनाया है। बुधुआ की अनामिका तो हमारे काम को थोड़ा और आगे बढ़ाते हुए फूलों की खेती भी करने लगी है। ये काम करने वालों में अधिकतर दिव्यांग महिलाएं हैं, जिनकी जिंदगी अपेक्षाकृत ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है।