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इस एक फॉर्मूले के बूते हर जंग जीत लेते हैं माइकल जॉर्डन
टीम डिजिटल / अमर उजाला
Updated Thu, 30 Nov 2017 07:04 PM IST
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मेरा रवैया कुछ ऐसा रहा है कि अगर आप मेरी किसी कमजोरी को लेकर मुझे घेरने की कोशिश करेंगे, तो मैं उसी कमजोरी को अपनी ताकत में बदल दूंगा। जानते हो यह कथन किसका है? बास्केटबॉल के सुपर स्टार माने जाने वाले माइकल जॉर्डन का। माइकल का जन्म 17 फरवरी, 1963 को ब्रुकलिन (अमेरिका) में हुआ था।
उनके पिता का नाम जेम्स और मां का नाम डेलोरिस है। जेम्स उपकरण पर्यवेक्षक (इक्विपमेंट सुपरवाइजर) थे और डेलोरिस बैंक में साहूकार थीं। जब माइकल छोटे थे, तभी उनका परिवार ब्रुकलिन से वेलिंगटन आ गया। उनके माता-पिता बहुत ही मेहनती थे। घर को हमेशा अनुशासन में चलाते थे। उन्होंने माइकल को भी हमेशा कड़ी मेहतन करने की शिक्षा दी।
पिता ने माइकल को हमेशा बताया कि जीवन में अनुशासन होना बहुत जरूरी है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए माइकल हमेशा प्रयत्न करते थे। स्कूल में वे हमेशा बास्केटबॉल खेला करते थे। उनके अच्छे खेल की वजह से उन्हें बहुत से विश्वविद्यालयों से स्कॉलरशिप का ऑफर भी आया। मेहनत और सतत प्रयासों से वे दुनिया के मशहूर बास्केटबॉल खिलाड़ी हुए।
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उनके पिता का नाम जेम्स और मां का नाम डेलोरिस है। जेम्स उपकरण पर्यवेक्षक (इक्विपमेंट सुपरवाइजर) थे और डेलोरिस बैंक में साहूकार थीं। जब माइकल छोटे थे, तभी उनका परिवार ब्रुकलिन से वेलिंगटन आ गया। उनके माता-पिता बहुत ही मेहनती थे। घर को हमेशा अनुशासन में चलाते थे। उन्होंने माइकल को भी हमेशा कड़ी मेहतन करने की शिक्षा दी।
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पिता ने माइकल को हमेशा बताया कि जीवन में अनुशासन होना बहुत जरूरी है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए माइकल हमेशा प्रयत्न करते थे। स्कूल में वे हमेशा बास्केटबॉल खेला करते थे। उनके अच्छे खेल की वजह से उन्हें बहुत से विश्वविद्यालयों से स्कॉलरशिप का ऑफर भी आया। मेहनत और सतत प्रयासों से वे दुनिया के मशहूर बास्केटबॉल खिलाड़ी हुए।
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बचपन की एक बात है-
बचपन की एक बात है- उनके पिता ने उन्हें अपने पास बुलाकर कहा, 'बेटा, मैं तुम्हें एक कपड़ा दे रहा हूं। तुम इसे एक डॉलर में बेचकर मुझे दिखाओ। माइकल पिता की बात सुनकर इस सोच में पड़ गए कि इस फालतू कपड़े को एक डॉलर में कैसे बेचूं? अब बेचना तो था ही। सबसे पहले माइकल ने उस कपड़े को धोया। घर पर प्रेस नहीं था, तो कपड़े के ऊपर कुछ वजनदार चीजें रख दीं।
इससे वह कपड़ा सीधा हो गया। फिर वह बाजार गए। कपड़े को बेचकर अपने पिता के पास पहुंचे। यह देखकर उनके पिता बहुत खुश हुए। एक दिन फिर माइकल को उनके पिता ने एक कपड़ा दिया और कहा कि इसे 10 डॉलर में बेचकर दिखाओ। इस बार भी उन्होंने अपने पिता से कोई सवाल नहीं किया। कपड़ा लिया।
उसे धोया और एक दोस्त से मिकी माउस का स्टिकर लेकर लगा दिया। बाजार में गए और उसे 10 डॉलर में बेच दिया। कई बार माइकल ने यह काम किया। एक दिन उनके पिता ने पूछा कि इतने दिनों से तुमने क्या सीखा? माइकल ने कहा, 'पिताजी जहां इच्छा होती है, वहां जीत जरूर हासिल होती है। इन्हीं शब्दों से माइकल बास्केटबॉल खेल में सबसे बड़ा नाम बने
इससे वह कपड़ा सीधा हो गया। फिर वह बाजार गए। कपड़े को बेचकर अपने पिता के पास पहुंचे। यह देखकर उनके पिता बहुत खुश हुए। एक दिन फिर माइकल को उनके पिता ने एक कपड़ा दिया और कहा कि इसे 10 डॉलर में बेचकर दिखाओ। इस बार भी उन्होंने अपने पिता से कोई सवाल नहीं किया। कपड़ा लिया।
उसे धोया और एक दोस्त से मिकी माउस का स्टिकर लेकर लगा दिया। बाजार में गए और उसे 10 डॉलर में बेच दिया। कई बार माइकल ने यह काम किया। एक दिन उनके पिता ने पूछा कि इतने दिनों से तुमने क्या सीखा? माइकल ने कहा, 'पिताजी जहां इच्छा होती है, वहां जीत जरूर हासिल होती है। इन्हीं शब्दों से माइकल बास्केटबॉल खेल में सबसे बड़ा नाम बने