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Tihar Jail: तिहाड़ में किस तरह पहुंचता है मोबाइल फोन, कैदियों के लिए जैमर भी कैसे हो जाते हैं बेअसर?

Thu, 23 Dec 2021 04:22 PM IST
Amit Mandal जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली। 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली।  Published by: Amit Mandal Updated Thu, 23 Dec 2021 04:22 PM IST
सार

जेल प्रशासन मोबाइल फोन को अंदर आने से रोक सकता है, बशर्ते उसके लिए ठोस इच्छाशक्ति हो। कहने के लिए जेलों में जैमर लगा है, मगर उसकी तकनीक को अपडेट नहीं किया जाता। 

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How mobile phones reach Tihar, how do jammers even become ineffective for prisoners?
mobile in jail - फोटो : Social Media

विस्तार

देश की सबसे सुरक्षित कही जाने वाली 'तिहाड़' जेल में मोबाइल फोन मिलना बहुत सामान्य बात है। केवल यही नहीं, मंडोली और रोहिणी जेल का भी यही हाल है। इन सुरक्षित जेलों में मोबाइल फोन इतनी तेजी से पहुंचता है कि अब कहा जाने लगा है कि क्या 'मोबाइल' फोन में पहिए लगे हैं। कोर्ट और आयोगों को दिखाने के लिए जेलों में जैमर लगाए गए हैं। ये अलग बात है कि जैमर काम तो करता है, मगर वह कैदियों के पास मौजूद फोन को नहीं पकड़ पाता। वजह, मोबाइल नेटवर्क 5 जी में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है तो जैमर का हौसला 'टूजी' नेटवर्क पर ही जवाब दे जाता है। जैमर के साथ कैदी छेड़छाड़ कर देते हैं। जेल के पूर्व अधिकारी बताते हैं, जेलों में ये सब होता है, लेकिन स्टाफ की मिलीभगत के बिना कुछ संभव नहीं है।

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जेल स्टाफ की मिलीभगत के बिना संभव नहीं
जेल में मोबाइल फोन मिलने के अनेक मामले सामने आए हैं। इन मामलों की रिपोर्टिंग उसी वक्त चर्चा में आती है, जब मामला हाई प्रोफाइल हो। जैसे रोहिणी की अदालत में जितेंद्र गोगी की हत्या हो जाना, मंडोली जेल में बंद कुलदीप को फरार कराने की योजना बनाना, सुकेश द्वारा 200 करोड़ रुपये की ठगी और गैंगस्टर नीरज बवानिया का जेलों में बड़ा रैकेट आदि। जेलों में अपराध का पूरा खाका तैयार होता है। उसे कैसे, कौन और कब अंजाम देगा, ये सब भी सलाखों के पीछे ही तय हो जाता है। जेल के पूर्व अधिकारी बताते हैं, ऐसा तो है नहीं कि कैदियों से मिलने के लिए आने वाले परिजन उन्हें मोबाइल फोन दे जाते हैं। जेल स्टाफ की मिलीभगत के बिना ये काम संभव नहीं है। इसी मोबाइल के जरिए जेल में बंद कैदी, बाहर की दुनिया में अपराध करता है। कभी धमकी दी जाती है, रंगदारी मांगी जाती है, गवाहों को चुप कराना है, नशे का कारोबार और करोड़ों की ठगी, जेल से मोबाइल के जरिए ये अपराध हो रहे हैं।
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कैसे पहुंचता है जेल में मोबाइल फोन 
आखिर जेल में मोबाइल फोन कैसे पहुंचता है? इस बारे में तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ अफसर सुनील गुप्ता बताते हैं कि तिहाड़ जेल में बंद कैदी किसी भी तरह के अपराध की प्लानिंग कर सकते हैं। वे एक जेल से दूसरी जेल में बंद अपने साथियों से बात कर लेते हैं। मोबाइल बरामद होने का इक्का दुक्का मामला तो पहले भी सामने आता रहा है, मगर अब तो ऐसा लगता है कि जैसे जेल में मोबाइल फोन का जुगाड़ करना, सबसे आसान काम हो गया है। जेल के एक पूर्व अधीक्षक के अनुसार, कैदी को जेब ढीली करनी आनी चाहिए। वह जो चाहता है, उसे मिल जाता है। आज तो कैदियों की हिम्मत इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि वे जेल का वीडियो बनाकर उसे वायरल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे सभी मामलों में जेल कर्मियों की मिलीभगत होती है। रुपये लेकर कैदियों को मोबाइल और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं। 
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इन तरीकों से पहुंचता है जेल में मोबाइल
अगर ठग सुकेश जैसा कैदी है तो जेल का स्टाफ खुद ही वहां तक मोबाइल पहुंचा देता है। बतौर सुनील गुप्ता, दूसरा तरीका ये भी होता है कि कैदी जब वहां लाया जाता है तो वह अपने कपड़ों में मोबाइल फोन छिपा लेता है। हालांकि ये इतना आसान नहीं है। कैदी को तय वार्ड या सेल तक पहुंचाने से पहले उसकी अच्छी तरह से तलाशी ली जाती है। कुछ शातिर कैदी कई बार जेल स्टाफ को गच्चा देने में कामयाब हो जाते हैं। इसमें भी जेलकर्मियों की जानबूझकर की गई लापरवाही शामिल होती है। एक तरीका ये भी है कि दीवार के बाहर से फोन अंदर फेंक दिया जाए। हालांकि ये तरीका दूसरे राज्यों में ज्यादा चलता है। दिल्ली जैसी हाई सिक्योरिटी वाली जेलों में इसका चलन उतना नहीं है। इसके लिए भी स्टाफ की मिलीभगत होना जरूरी है। कौन सा कैदी कब अपने सेल से बाहर होगा, कहां पर होगा, ये सब जानकारी स्टाफ के जरिए ही बाहर तक पहुंचती है। कुछ ऐसे मामले भी देखे गए हैं कि पेशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों की आंखों में धूल झोंक कर कैदी अपने परिचित से मोबाइल फोन लेने में कामयाब हो जाते हैं। 

जेल प्रशासन मोबाइल फोन को अंदर आने से रोक सकता है, बशर्ते उसके लिए ठोस इच्छाशक्ति हो। कहने के लिए जेलों में जैमर लगा है, मगर उसकी तकनीक को अपडेट नहीं किया जाता। मोबाइल सिस्टम 5जी तकनीक में प्रवेश कर रहा है। जेलों में टूजी के उपकरण लगे हैं। कुछ ऐसे मामले देखने को मिलते हैं कि कैदियों द्वारा जैमर को ही खराब कर दिया जाता है। मंडोली की जेल नंबर 15 में शॉर्ट इंस्टा रील बनाने का मामला सामने आ चुका है। वहां जैमर लगा है, मगर उसका प्रभाव कुछ नहीं था। इसके बाद जब सेल में रेड की जाती है तो कैदियों के पास मोबाइल फोन नहीं मिलता।  


सुनील गुप्ता के अनुसार, इस तरह के मामले रोकने के लिए आधुनिक तकनीक वाला जैमर लगाना चाहिए। जहां पर जैमर के प्वाइंट लगे हों, वहां सीसीटीवी लगाया जाए। जैसे ही उसके साथ छेड़छाड़ हो तो चंद सेकेंड में उसका अलर्ट कंट्रोल रूम को मिल जाए। स्टाफ की अदला बदली में देरी न हो। मौजूदा समय में जिस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, उसके मद्देनजर जेल के स्टाफ पर नजर रखना सबसे जरुरी हो गया है।

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