एक महिला जिन्होंने तालीम देकर तोड़ी समाज की बेड़ियां

हाफिजा खान Updated Thu, 15 Mar 2018 03:18 AM IST
Hafiza Khan
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मेरा जन्म जम्मू में हुआ था, लेकिन जब मैं पांच साल की थी, तब से मेरा परिवार कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के एक बाहरी इलाके में रह रहा है। पिता घर छोड़कर कहीं चले गए थे, सो हमारे घर की माली हालत बहुत खराब थी। मां ने दूसरों के घरों में काम करके किसी तरह अपनी चार बेटियों को पाला। इस वजह से बचपन में मुझे ज्यादा पढ़ने का मौका नहीं मिला। मैंने आठवीं तक केवल उर्दू में पढ़ाई की। हालांकि अपने मोहल्ले में यह करने वाली भी मैं पहली लड़की थी।
उसके बाद मैंने पढ़ाई छोड़कर परिवार की मदद के लिए कई तरह के काम करने शुरू किए। मैं अपनी मां के काफी करीब थी, उनसे सब कुछ साझा करती थी। इक्कीस साल की उम्र में उन्होंने खुशी-खुशी मेरी पसंद के लड़के से शादी कर दी। वर्ष 1987 में शादी होने के बाद मुझे ससुराल में एक बड़े परिवार के बीच रहना पड़ा। मेरे अनपढ़ पति पर कई लोगों का पेट भरने की जिम्मेदारी थी।

यह देख मैंने भी काम करने का निश्चय किया। मैंने न सिर्फ खुद सिलाई-कढ़ाई करनी शुरू कर दी, बल्कि परिवार की दूसरी महिलाओं को भी काम सिखाया। इसके अलावा मैंने मोहल्ले के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना भी शुरू किया। दरअसल हमारे मोहल्ले में सिर्फ एक सरकारी स्कूल था, लेकिन वहां भी एक शिक्षक के भरोसे पांच कक्षाएं थीं। ऐसे में उस स्कूल की पढ़ाई का स्तर सहज ही समझा जा सकता है।
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