दादा की मौत के बाद छोड़ी IT की नौकरी, 27 साल की उम्र में बन गई ‘इंडियन सुपरहीरोज’
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जो लोग पर्यावरण हित की बात सोचते हैं, उसके लिए कुछ अलग करने की हिम्मत भी दिखाते हैं। कुछ अलग करते हैं और लोग उनके मुरीद हो जाते हैं। कोयम्बटूर के आईटी प्रोफेशनल दिव्या शेट्टी भी उन्हीं में एक हैं। रिसाइकल्ड पेपर, इडिबल फूड कलर, फ्रूट फ्लेवर से तैयार बायोडिग्रेबल पेंसिल को ईजाद करने के पीछे का उद्देश्य यही था कि पेड़ बचे रहें। जंगल रहेंगे, तभी पर्यावरण की सुरक्षा हो सकेगी।
दो वर्ष पूर्व बंगलुरू की एक आईटी कंपनी में कार्य करने वाली 27 वर्षीय दिव्या शेट्टी बताती हैं, ‘जब मैं आठ साल की थी, तब मेरे दादाजी ने फसल में नुकसान होने के कारण आत्महत्या कर ली थी। इस घटना का मेरे मन पर बहुत गहरा असर पड़ा और तभी मैंने किसान समुदाय के लोगों औैर पर्यावरण के लिए कुछ करने की ठानी।
मैंने 2015 में आईटी की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और अपने दोस्त विष्णुवर्धन के साथ मिलकर ‘इंडियन सुपरहीरोज’ के नाम से एक सोशल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य लोगों को ऑर्गेनिक चीजों, बिना नुकसान की खेती और किराए पर खेती करने आदि के बारे में बताना था।
इन पेंसिल्स को बिना पेड़ों को काटे बनाते हैं और केवल पुराने न्यूजप्रिंट्स का ही इस्तेमाल करते हैं। स्क्रैप डीलर्स (पुराने सामान को बेचने वाले) की बजाय हमने शहर के स्कूलों से पुराने अखबारों को लेना शुरू किया। इसके बदले में हम स्कूलों को पेंसिल्स मुहैया कराते थे।
सबसे खास बात यह थी कि हमने इसकी शुरुआत के केवल तीन महीनों में 28 पेड़ों को कटने से बचाया था। बच्चों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग डिजाइंस की पेंसिल्स हमने बनाई हैं, जैसे रेनबो (इंद्रधनुष के आकार की), वेलवेट(मुलायम) कार्टून, सीड्स और अलग-अलग के फलों के आकार की।
इसके लिए हम किसानों से मिर्च, पालक, बीन्स, टमाटर, बैंगन आदि के बीजों को खरीदते हैं और इनका उपयोग पेंसिल्स में करते हैं। इस प्रकार छात्र इन पेंसिल्स को इस्तेमाल करने के बाद बगीचों या खेतों में भी लगा सकते हैं। कुछ दिनों बाद इनमें से नए पौधे बनने लगते हैं।
बच्चों को रंगों और खुशबुओं की जानकारी देने के लिए फ्रूट पेंसिल्स भी हैं, जिसे बच्चे पसंद करते हैं। फिलहाल ये पेंसिल्स कोयम्बटूर के आसपास के इलाके में ही उपलब्ध हैं, मगर आप इसे plantcil.com से ऑनलाइन भी मंगवा सकती हैं।
इसके अलावा दिव्या किसानों को ऑर्गेनिक खेती करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ऑर्गेनिक उत्पादों को कैसे सीधे बाजार में बेचा जाए, इस बारे में भी उन्हें शिक्षित कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने ‘indianorganic.store’ के नाम से एक ऑनलाइन वेबपोर्टल की शुरुआत की है। इस पोर्टल से लगभ्ाग 800 किसान जुड़े हुए हैं, जो सीधे अपने उत्पादों को उपभोक्ताओं को बेच सकते हैं।
अब हम सीड पेन पर काम कर रहे हैं, जिसकी बहुत जल्दी ही शुरुआत की जाएगी। अभी पेन मुख्य रूप से प्लास्टिक का होता है, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि पेन को रिसाइकल्ड पेपर की मदद से कैसे 100 प्रतिशत इको-फ्रेंडली बनाया जा सकता है! इसके अलावा ‘Farm Zeal’ नामक एक एेप की शुरुआत करने की योजना है, जो लोगों को ऑर्गेनिक खेती करने के बारे में शिक्षित करेगा।’
खास बात
एक पेड़ से लगभग 2,500 पेंसिल बनाई जाती हैं। आंकड़ों की मानें, तो प्रत्येक वर्ष 15 से 20 अरब पेंसिल्स का उत्पादन होता है। मतलब इसके लिए हमें चार लाख पेड़ों को काटने की जरूरत पड़ती है। यह आंकड़ा हमारे पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता।
इस तरह हम प्रत्येक वर्ष अपने पर्यावरण को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। पर्यावरण के इसी खतरे को देखते हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर दिव्या शेट्टी ने अपने दोस्त विष्णुवर्धन के साथ मिलकर अक्टूबर 2017 में ‘प्लांटसिल’ नामक अपना नया उद्यम शुरू किया है, जो बायोडिग्रेबल तरीके से पेंसिल बनाने का काम करता है।