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'आंटी की प्रेरणा से बनाया भ्रष्टाचार रोधी मंच'

Tue, 24 Apr 2018 10:25 AM IST
दीपक बिदवई
दीपक बिदवई Updated Tue, 24 Apr 2018 10:25 AM IST
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Deepak Bidwai- speak up against the ubiquitous corruption and injustice in India
Dipak Bidwai

सरला नीलकंठ नाम की एक महिला नासिक में रहती थी। कम उम्र में ही उसकी शादी हमेशा गालियां बकने वाले आदमी से कर दी गई। कुछ ही वक्त बाद उसके पति ने उसे छोड़ दिया। शुक्र है महिलाओं के लिए काम करने वाली वनस्थली संस्था का, जिसकी मदद से सरला ने न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि खुद को विश्वास से भरी एक आजाद औरत बनाया। वह बच्चों को पढ़ाने लगी। सरला पढ़ाने के साथ-साथ स्नातक की पढ़ाई भी कर रही थी।

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एक दिन वह बस से अपने साथ पढ़ने वाली युवतियों के साथ कॉलेज जा रही थी। बस में किसी शख्स ने युवतियों के साथ छेड़खानी की, युवतियों ने विरोध किया, तो उस आदमी ने और ज्यादा अभद्रता की। पीड़िताओं ने पुलिस से मदद मांगी, पर अपराधी का कुछ नहीं बिगड़ा। सरला ने बस से यात्रा ही बंद कर दी। एक दिन वह सड़क पर पैदल ही कहीं जा रही थी कि किसी ने उसे ठोकर मार दी। व्यस्त सड़क पर काफी देर तक उसका खून बहता रहा। किसी ने उसे एक प्राइवेट अस्पताल तक पहुंचाया, लेकिन अस्पताल वालों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। फिर उसे दूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
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सरला मेरी आंटी थी, जिनकी मौत टाली जा सकती थी। लेकिन सरकारी व्यवस्था की उदासीनता के चलते ऐसा नहीं हो सका। मैं उनके जीवन से प्रभावित था। उनकी मौत मुझे देश की व्यवस्था, खास तौर पर पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करने की प्रेरणा दे गई। मैंने अपने जीवन में कई बार पुलिसिया उत्पीड़न को महसूस किया था, लेकिन सरला आंटी की मौत के बाद मैंने यह जानने की कोशिश की कि व्यवस्था में दोष आखिर है कहां? मैं अपने गांव गया, दूसरे शहरों की यात्रा की, अदालतों में घूमा, अस्पतालों में गया, लोगों से मिला। हर जगह लोगों ने मुझे यही बताया कि रिश्वत के बिना कुछ नहीं होता।

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देश की राजनीति और नौकरशाही की इस सच्चाई की गहराई में जाने के लिए मैंने खूब शोध कार्य किया। अखबारों के माध्यम से भी कई मुद्दों को सामने रखा। मैंने एक सर्वे कंपनी शुरू करनी चाही, लेकिन यहां भी कंपनी का पंजीकरण कराने के लिए लंबा इंतजार करने के साथ मुझे घूस देना था। मैं रिश्वत के मकड़जाल में खुद को असहाय पा रहा था। मैंने तभी तय कर लिया कि मैं भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए कुछ न कुछ जरूर करूंगा।

सौभाग्य से मैं इतना सक्षम था कि पढ़ाई के सिलसिले में अमेरिका जा सका, जहां मैंने मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी से सूचना प्रौद्योगिकी विषय में मास्टर डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद मैंने एक भ्रष्टाचार रोधी मंच की कल्पना की। मैंने महाराष्ट्र के पुणे, नासिक, ठाणे और मुंबई में एम्पजेन नाम का वेब पोर्टल लॉन्च किया। आगे चलकर इस पोर्टल की सेवाएं देश के सभी शहरों तह पहुंचाने की मेरी योजना है।

इस पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न सरकारी दफ्तरों की संपूर्ण जानकारी के आधार पर लोगों को अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी। हमारी टीम संबंधित कार्यालय से संपर्क करके तब तक प्रयासरत रहेंगी, जब तक समस्या का समाधान न हो। अभी हमारा काम शुरुआती स्तर पर है, लेकिन मेरी योजना है कि मैं समाज के लिए कुछ करने की इच्छा रखने वालों को अपने साथ लेकर अपने मंच को भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराऊं। यह काम मेरी आंटी सरला और उन तमाम लोगों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने भ्रष्ट व्यवस्था के चलते बहुत कुछ गंवाया है।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।

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