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कोरेगांव हिंसा पर अठावले ने बढ़ाई भाजपा की परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Jan 2018 04:31 AM IST
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ramdas athawale
- फोटो : pti
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भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में किसी तरह विवाद की आग को बुझाने की कोशिश में जुटी भाजपा को उसकी सहयोगी आरपीआई ने करारा सियासी झटका दिया है। आरपीआई के मुखिया और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को क्लीन चिट दे दी है। जबकि महाराष्ट्र सरकार हिंसा के लिए जिग्नेश के भड़काऊ भाषण को न केवल जिम्मेदार ठहरा रही है, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज किया है।
दरअसल इस जातीय संघर्ष में बुरी तरह उलझी भाजपा को अठावले से बेहद उम्मीद थी। पार्टी ने अठावले के माध्यम से ही राज्य में दलित संगठनों की ओर से हो रहे आंदोलन की आग को बुझाने की रणनीति बनाई थी। बताते हैं कि अठावले शुरू में इस मोर्चे पर भाजपा को मदद करने के इच्छुक थे, मगर हिंसा के विरोध मे दलित संगठनों द्वारा कई दशक बाद बुलाए गए महाराष्ट्र बंद को मिली जबर्दस्त कामयाबी के बाद अठावले ने तत्काल मेवाणी को क्लीन चिट दे दी।
पढ़ें- CPM पर गरजे अमित शाह, बोले- हिंसा से नहीं डरते, त्रिपुरा में भी खिलेगा कमल
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फिर इस हिंसा के बाद महाराष्ट्र के सैकड़ों दलित संगठन एकजुट हैं। राज्य में प्रकाश अंबेडकर और अठावले दलित राजनीति का चेहरा हैं। ऐसे में अठावले एकजुट दलित संगठनों के बीच खुद को अलग-थलग नहीं करना चाहते थे। यही कारण है कि अठावले ने न सिर्फ मेवाणी को क्लीन चिट दी, बल्कि यह भी कहा कि वहां मेवाणी के भाषण से पहले भी तनाव की स्थिति थी। कई गांवों के लोगों ने वहां पहले ही रैलियां निकाली थी। ऐसे में मेवाणी को हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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दरअसल इस जातीय संघर्ष में बुरी तरह उलझी भाजपा को अठावले से बेहद उम्मीद थी। पार्टी ने अठावले के माध्यम से ही राज्य में दलित संगठनों की ओर से हो रहे आंदोलन की आग को बुझाने की रणनीति बनाई थी। बताते हैं कि अठावले शुरू में इस मोर्चे पर भाजपा को मदद करने के इच्छुक थे, मगर हिंसा के विरोध मे दलित संगठनों द्वारा कई दशक बाद बुलाए गए महाराष्ट्र बंद को मिली जबर्दस्त कामयाबी के बाद अठावले ने तत्काल मेवाणी को क्लीन चिट दे दी।
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फिर इस हिंसा के बाद महाराष्ट्र के सैकड़ों दलित संगठन एकजुट हैं। राज्य में प्रकाश अंबेडकर और अठावले दलित राजनीति का चेहरा हैं। ऐसे में अठावले एकजुट दलित संगठनों के बीच खुद को अलग-थलग नहीं करना चाहते थे। यही कारण है कि अठावले ने न सिर्फ मेवाणी को क्लीन चिट दी, बल्कि यह भी कहा कि वहां मेवाणी के भाषण से पहले भी तनाव की स्थिति थी। कई गांवों के लोगों ने वहां पहले ही रैलियां निकाली थी। ऐसे में मेवाणी को हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।