महाराष्ट्रः कोरोना से जूझती मुंबई में न बेड हैं न मेडिकल स्टाफ, सरकारी-प्राइवेट सभी अस्पताल मरीजों से भरे
- फुटपाथ और ब्रिज के नीच पड़े हैं नॉन कोविड के मरीज
- अन्य बीमारियों का इलाज करने के लिए आईसीयू, बेड और डॉक्टर कम पड़े
- अस्पतालों में 100 से ज्यादा मेडिकल स्टॉफ कोरोना से संक्रमित
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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी शहर की अपेक्षा उत्तम दर्जे की मानी जाती हैं। लेकिन कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या से मुंबई अप्रत्याशित तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संकट के कगार पर पहुंच गई है।
चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, सभी अस्पताल संक्रमित मरीजों से भरे पड़े हैं। नए मरीजों को भर्ती करने के लिए जहां बेड की तंगी है वहीं, मेडिकल स्टॉफ भी कम पड़ने लगा है।
मुंबई कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित है। वहीं, नॉन कोविड के मरीजों की भी बड़ी संख्या है। कोविड-19 के साथ अन्य बीमारियों का इलाज करने के लिए आईसीयू, बेड और डॉक्टर कम पड़ गए हैं।
हालात यह है कि सांसद, विधायक भी किसी कोरोना पॉजिटिव को अस्पताल में भर्ती नहीं करा पा रहे हैं। गरीबों का इलाज तो दूर जो पैसा खर्च करने की स्थिति में हैं उनको भी अस्पताल में जगह नहीं मिल रही है।
घाटकोपर के एक 65 वर्षीय मरीज को कई दिन परेशान होने के बाद एक केंद्रीय मंत्री की सहायता से लीलावती अस्पताल में भर्ती किया जा सका। वहीं, जिन मरीजों को कोरोना नहीं है वे फुटपाथ और पुल के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं।
दरअसल, अस्पतालों में 100 से ज्यादा मेडिकल स्टॉफ कोरोना से संक्रमित हो गए हैं, जिससे अस्पतालों में ओपीडी सुविधा बंद है। लिहाजा, मरीजों को बीच सड़क पर या फिर पुल के नीचे रहना पड़ रहा है।
इनमें अधिकतर मरीज उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के हैं। परेल के हिंदमाता ब्रिज के नीचे ऐसे ही नॉन कोविड के 50 से ज्यादा मरीजों को शिफ्ट किया गया है। कोरोना महामारी में उपेक्षित इन मरीजों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी जुझ रहे लोग हैं।
कोरोना संक्रमण के उच्च दौर से गुजर रही है मुंबई
कोरोना टास्कफोर्स के सदस्य डॉ. शशांक जोशी का कहना हैं कि महानगर में कोरोना संक्रमण का यह उच्च दौर है। आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयानक हो सकती है। फिलहाल, मृत्युदर 3.33 फीसदी है।
सुकून की बात यह है कि केंद्र ने जो आंकड़े बताए थे उससे संख्या अभी कम है। लेकिन मुंबई में हर दिन न्यूयार्क से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं। मौत का आंकड़ा बेशक उतना नहीं है। लेकिन कुल मिलाकर तस्बीर काफी खराब है।
धारावी में खतरनाक स्तर पर कोरोना
एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी में अप्रैल के पहले सप्ताह में एक सफाईकर्मी कोरोना संक्रमित पाया गया था। उसके बाद से इस साढ़े सात लाख की आबादी कोरोना की चपेट में है।
बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि धारावी में ठीक होने की दर 39 फीसदी है जबकि मृत्युदर 4 फीसदी है जो शहर और राज्य की तुलना में अधिक है।
मुंबई के संक्रमितों से बेहाल हैं पांच महानगरपालिका
मुंबई में कोरोना संक्रमण के चलते आसपास की 5 महानगरपालिका क्षेत्र का भी बुरा हाल है। इनमें ठाणे, मीरा-भाइंदर, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर महानगरपालिका शामिल है। मुंबई के अस्पतालों और पुलिस थाने में कार्यरत ज्यादातर लोग इन्ही महानगरपालिका क्षेत्र में रहते हैं। उनसे लोग संक्रमित हो रहे हैं।
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका आयुक्त चंद्रकांत डांगे कहते हैं कि अब तक जितने संक्रमित मिले हैं उनका कहीं न कहीं मुंबई कनेक्शन सामने आया है। यदि मुंबई कनेक्शन खत्म हो जाए तो एक हफ्ते में कोरोना पर नियंत्रण पा सकते हैं।
संक्रमण के साथ ही ठीक भी हो रहे हैं मरीज- डॉ. ओक
कोरोना टॉस्कफोर्स के अध्यक्ष डॉ. संजय ओक का कहना है कि मुंबई में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी है लेकिन उतनी ही तेजी के साथ मरीज स्वस्थ्य भी हो रहे हैं। मुंबई में मरीजों की संख्या को देखते हुए बीएमसी और सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने के साथ ही फील्ड अस्पताल भी बनाया जा रहा है।
मुर्दाघर में जगह नहीं, अब शुरू होगा मोबाइल मुर्दाघर
मुर्दाघर में भी जगह नहीं बची। दाह संस्कार के लिए श्माशान भूमि में 8 घंटे बाद नंबर आ रहे हैं। केईएम, सायन के बाद घाटकोपर स्थित राजावाड़ी अस्पताल में कोरोना मरीजों के बीच शव पड़े रहने का वीडियो वायरल हुआ है।
मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर कहती है कि कोरोना संक्रमण से मौतों का आंकड़ा दिन ब दिन बढ़ रहा है। इसलिए मुंबई में 15 मुर्दाघर जल्द ही शुरू किए जाएंगे।