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नवाब मलिक को नोटिस: वानखेड़े की अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Tue, 08 Feb 2022 11:38 PM IST
रोमा रागिनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: रोमा रागिनी
Updated Tue, 08 Feb 2022 11:38 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने ये नोटिस मुंबई एनसीबी के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े की अवमानना याचिका पर दिया है।
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नवाब मलिक को कारण बताओ नोटिस
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने ये नोटिस मुंबई एनसीबी के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े की अवमानना याचिका पर दिया है।
ज्ञानदेव वानखेड़े ने याचिका में बताया कि मलिक ने दिसंबर में उनके परिवार के खिलाफ सार्वजनिक और सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने से परहेज करने का कोर्ट को वचन दिया था। इसके बावजूद NCP नेता उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक बयानबाजी करते रहे।
पिछले साल अक्टूबर में समीर वानखेड़े ने एक क्रूज पर रेड किया था। जिसमें दावा किया गया कि वहां से ड्रग्स बरामद किया गया। ड्रग क्रूज केस में बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का नाम भी सामने आया था। उसके बाद से ही नवाब मलिक ने वानखेड़े के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने उनपर कई गंभीर आरोप लगाए। दिसंबर 2021 में मलिक ने कोर्ट से कहा था कि उनके द्वारा दिया गया वचन उन्हें केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक बयान देने से नहीं रोकेगा, जिन्होंने अधिकारिक कर्तव्यों का उल्लंघन किया है।
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मंगलवार को ज्ञानदेव वानखेड़े के वकील बिरेंद्र सराफ ने कोर्ट में मलिक की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों की कॉपी जमा की। सराफ ने न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति नितिन जाधव की पीठ को बताया कि मलिक के बयान में एनसीबी अधिकारियों द्वारा कुछ फर्जी मामलों, धोखाधड़ी, फिल्म अभिनेताओं से जबरन वसूली और (समीर) वानखेड़े के कथित अवैध जाति प्रमाण पत्र के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि मलिक ने इन प्रेस कांफ्रेंसों में ज्ञानदेव की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे पर भी बात की। जो की रियायत के दायरे में नहीं है। कोर्ट में दायर उनका (मलिक का) जवाब केवल इतना कहता है कि उनके बयान रियायत के दायरे में आते हैं। उन्हें समझाना चाहिए था कैसे। उनके बयान हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन करते हैं। उनपर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा-क्यों मलिक ने जाति प्रमापत्र को बताया अवैध
दूसरी ओर मलिक के वकील कार्ल टैम्बोली ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में समीर वानखेड़े का नाम नहीं लिया था। मलिक के वकील ने कहा कि मलिक ने पूर्व एनसीबी अधिकारी के जाति प्रमाण पत्र के अवैध होने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने ये बात वानखेड़े के खिलाफ राज्य जाति जांच समिति के समक्ष दायर शिकायत के आधार पर कही। जिसपर हाईकोर्ट ने कहा कि क्यों NCP लीडर ने सार्वजिक रुप से वानखेड़े के जाति प्रमाणपत्र को अवैध बताया, जबकि मामले में जांच समिति ने फैसला नहीं सुनाया है।
अगली सुनवाई तक जवाब देने का निर्देश
मलिक के वकील ने बचाव करते कहा कि उन्होंने वानखेड़े का नाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं लिया है। वानखेड़े के वकील ने गलत ट्रांसक्रिप्ट दी है। इसपर कोर्ट ने कहा कि फिर मलिक को उनकी बयानों की कॉपी सौंपनी चाहिए थी। कोर्ट ने मलिक को ज्ञानदेव वानखेड़े की अवमानना याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 21 फरवरी तक कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया।
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ज्ञानदेव वानखेड़े ने याचिका में बताया कि मलिक ने दिसंबर में उनके परिवार के खिलाफ सार्वजनिक और सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने से परहेज करने का कोर्ट को वचन दिया था। इसके बावजूद NCP नेता उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक बयानबाजी करते रहे।
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पिछले साल अक्टूबर में समीर वानखेड़े ने एक क्रूज पर रेड किया था। जिसमें दावा किया गया कि वहां से ड्रग्स बरामद किया गया। ड्रग क्रूज केस में बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का नाम भी सामने आया था। उसके बाद से ही नवाब मलिक ने वानखेड़े के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने उनपर कई गंभीर आरोप लगाए। दिसंबर 2021 में मलिक ने कोर्ट से कहा था कि उनके द्वारा दिया गया वचन उन्हें केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक बयान देने से नहीं रोकेगा, जिन्होंने अधिकारिक कर्तव्यों का उल्लंघन किया है।
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मंगलवार को ज्ञानदेव वानखेड़े के वकील बिरेंद्र सराफ ने कोर्ट में मलिक की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों की कॉपी जमा की। सराफ ने न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति नितिन जाधव की पीठ को बताया कि मलिक के बयान में एनसीबी अधिकारियों द्वारा कुछ फर्जी मामलों, धोखाधड़ी, फिल्म अभिनेताओं से जबरन वसूली और (समीर) वानखेड़े के कथित अवैध जाति प्रमाण पत्र के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि मलिक ने इन प्रेस कांफ्रेंसों में ज्ञानदेव की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे पर भी बात की। जो की रियायत के दायरे में नहीं है। कोर्ट में दायर उनका (मलिक का) जवाब केवल इतना कहता है कि उनके बयान रियायत के दायरे में आते हैं। उन्हें समझाना चाहिए था कैसे। उनके बयान हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन करते हैं। उनपर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा-क्यों मलिक ने जाति प्रमापत्र को बताया अवैध
दूसरी ओर मलिक के वकील कार्ल टैम्बोली ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में समीर वानखेड़े का नाम नहीं लिया था। मलिक के वकील ने कहा कि मलिक ने पूर्व एनसीबी अधिकारी के जाति प्रमाण पत्र के अवैध होने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने ये बात वानखेड़े के खिलाफ राज्य जाति जांच समिति के समक्ष दायर शिकायत के आधार पर कही। जिसपर हाईकोर्ट ने कहा कि क्यों NCP लीडर ने सार्वजिक रुप से वानखेड़े के जाति प्रमाणपत्र को अवैध बताया, जबकि मामले में जांच समिति ने फैसला नहीं सुनाया है।
अगली सुनवाई तक जवाब देने का निर्देश
मलिक के वकील ने बचाव करते कहा कि उन्होंने वानखेड़े का नाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं लिया है। वानखेड़े के वकील ने गलत ट्रांसक्रिप्ट दी है। इसपर कोर्ट ने कहा कि फिर मलिक को उनकी बयानों की कॉपी सौंपनी चाहिए थी। कोर्ट ने मलिक को ज्ञानदेव वानखेड़े की अवमानना याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 21 फरवरी तक कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया।