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लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों का मामला पहुंचा बॉम्बे हाईकोर्ट, अगली सुनवाई आठ मई को
Tue, 05 May 2020 08:43 PM IST
Harendra Chaudhary
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 05 May 2020 08:43 PM IST
सार
- प्रवासियों का किराया, मेड़िकल जांच आदि के बारे में कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
- राज्य सरकार ने गांव जाने वाले मजदूरों को खाने के पैकेट देने को लेकर भी कुछ नहीं कहा
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Bombay High Court
- फोटो : For Refernce Only
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विस्तार
कोरोना महामारी के कारण जारी लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि प्रवासी मजदूरों के परिवहन व मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए उठाए गए कदमों एंव नीति की जानकारी दे। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 8 मई तक के लिए टाल दी है।
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प्रवासी मजदूरों से संबंधित याचिका मंगलवार को न्यायमूर्ति एस सी गुप्ते की खंडपीठ में सामने आई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रही अधिवक्ता रोनिता ने कहा कि कांग्रेस की ओर से घोषणा की गई है कि पार्टी प्रवासी मजदूरों के किराए का खर्च वहन करेगी।
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जिस राज्य में कांग्रेस की सरकार हैं वहां के मजदूरों के किराए का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा है कि उसकी तरफ से मजदूरों को 85 फीसदी किराये में छूट दी जाएगी। राज्य सरकार को सिर्फ 15 फीसदी किराए का भुगतान करना होगा।
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चूंकि महाराष्ट्र में तीन राजनीतिक दलों की सरकार है इसलिए प्रवासी मजदूरों के किराए को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
याचिकाकर्ता की वकील ने दलील दी कि गांव जाने के इच्छुक मजदूरों की डॉक्टर से स्क्रीनिंग कराने के लिए कहा गया है। वर्तमान में मजदूरों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए उनसे मेडिकल स्क्रीनिंग का शुल्क न लिया जाए।
राज्य सरकार ने गांव जाने वाले मजदूरों को खाने के पैकेट देने को लेकर भी कुछ नहीं कहा है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से अनाज के वितरण अन्य सुविधाओं को लेकर घोषणाएं की जा रही पर इन्हें लागू नहीं किया जा रहा है।
वहीं, सरकारी वकील ने कहा कि उन्हें याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए मुद्दे को लेकर निर्देश लेने के लिए समय दिया जाए। जो मजदूर यहां है उन्हें भोजन दिया जा रहा है। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान प्रवासी मजदूरों के परिवहन व मेडिकल स्क्रीनिंग को लेकर अपनाई गई नीति का खुलासा किया जाए।