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'बेटी बचाओ आंदोलन' के बावजूद घट गई बेटियां
भोपाल ब्यूरो।
Updated Wed, 12 Jun 2013 01:45 PM IST
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मध्यप्रदेश में लड़कियों का अनुपात सुधारने में राज्य सरकार की योजनाएं बेअसर साबित हो गई हैं। राज्य सरकार की बेटी बचाओ और लाडली लक्ष्मी योजनाओं सहित कई योजनाओं में भारी भरकम खर्च के बावजूद पिछले दशक में लड़कियों का अनुपात 932 से घटकर 918 पर आ गया है।
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यह 1981 के बाद अब तक का न्यूनतम आंकड़ा है। इन योजनाओं को अपनी उपलब्धि बताकर चुनाव की तैयारी कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए ये आंकड़े शर्मिंदा करने वाले हैं।
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राज्य में कांग्रेस ने इन आंकड़ों को लेकर सरकार पर हल्ला बोलने की तैयारी कर ली है। वह इन योजनाओं का धन भ्रष्टाचार में बह जाने का मुद्दा लेकर निशाना साधेगी।
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सोमवार को जनगणना निदेशालय ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसके मुताबिक 0.6 वर्ष की लड़कियों की संख्या 2001 से 2011 के बीच मध्यप्रदेश में प्रति 1000 पर 918 रह गई है, जो पहले 932 हुआ करती थी।
राज्य सरकार के लिए यह शर्मनाक स्थिति है क्योंकि पिछले नौ दस साल से भारतीय जनता पार्टी की राज्य में सरकार रही है और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेटी बचाओ व लाडली लक्ष्मी और जननी सुरक्षा योजनाओं को अपनी अहम उपलब्धि की तरह पेश करते रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे का कहना है, इन योजनाओं का सच खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस नेता सत्यदेव कटारे का कहना है अनुपात में इतना बड़ा अंतर कभी नहीं आया।
भाजपा प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहते हैं कि यह ऐसी प्रवृत्ति है जिसको लेकर कई राज्य चिंतित हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने तो इसे रोकने के भरपूर प्रयास किए हैं।
