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Ujjain: रंगपंचमी पर शहर में निकलेंगे मन्नतों के ध्वज, महाकाल के दरबार में होगा पुरानी परंपराओं का निर्वहन
Fri, 10 Mar 2023 03:08 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 10 Mar 2023 03:08 PM IST
सार
रंगपंचमी के अवसर पर उज्जैन शहर में मन्नतों के ध्वज निकाले जाएंगे। इस दौरान बाबा महाकाल के दरबार में बरसों पुरानी परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।
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उज्जैन शहर में निकलेंगे मन्नतों के ध्वज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उज्जैन में बाबा महाकाल की नगरी निराली है। ऐसा माना जाता है कि यहां कण-कण में भगवान शंकर का वास है और मोक्षदायिनी मां शिप्रा में स्नान करने से श्रद्धालु सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इस नगरी में वैसे तो हर त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं, लेकिन यह नगरी उत्सव मनाने के साथ ही परंपराओं का निर्वहन करने में भी पीछे नहीं है। आगामी चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी 12 मार्च रविवार को बाबा महाकाल के दरबार से ऐसे ही मन्नतों के ध्वज निकालने की परंपरा का निर्वहन होने वाला है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होकर इस परंपरा का निर्वहन करेंगे।
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महाकालेश्वर मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में रंगपंचमी के अवसर पर मन्नतों के ध्वज निकालने की परंपरा अति प्राचीन है। यह ध्वज पूरे शहर में भव्य चल समारोह के रूप में निकाले जाते हैं, जिसका पूजन जिला प्रशासन और सरकार की ओर से किया जाता है। पंडित आशीष पुजारी ने बताया कि राजाधिराज भगवान महाकाल के दरबार में श्रद्धालु से लेकर सरकार तक झोली फैलाए आते हैं। जब भी कोई मन्नत मांगी जाती है तो अनेक श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर रंगपंचमी पर ध्वज फहराने की मनोकामना भी मांगते हैं। इसी के चलते रंगपंचमी के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर से मन्नतों के ध्वज निकलते हैं और भगवान के प्रति कृतज्ञता अर्पित करते हैं। इस प्रकार मन्नत पूरी होने के बाद विजय पताका के रूप में ध्वज निकाले जाते हैं। इस ध्वज की विधि पूजा भगवान महाकाल के सेनापति वीरभद्र के सामने होती है।
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शास्त्र के साथ शस्त्र का भी होता है प्रदर्शन...
महाकालेश्वर मंदिर के ध्वज चल समारोह में पंडे पुजारियों द्वारा धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। इस मौके पर निकलने वाले चल समारोह में शस्त्र का भी प्रदर्शन होता है। लाठी, तलवार आदि शस्त्र की कलाओं का ढोल धमाकों के बीच प्रदर्शन किया जाता है।
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राजभवन भोपाल से आया ध्वज...
श्री महाकालेश्वर मंदिर के महेश पुजारी ने बताया कि इस बार रंगपंचमी पर श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह के लिए तैयारी प्रारंभ हो गई है। राजभवन भोपाल राज्यपाल द्वारा दिए जाने वाला ध्वज इस बार पहले ही महाकाल मंदिर पहुंच गया है। 12 मार्च रविवार को रंगपंचमी की संध्या भगवान महाकाल के आंगन से चल समारोह प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न मार्गो से होकर वापस मंदिर पहुंचेगा। चल समारोह में पांच झांकियां धार्मिक और राष्ट्रीय भावना पर केंद्रीत रहेंगी। इसके अलावा नासिक के प्रसिद्ध ढोल और उज्जैन के बेंड रहेंगे।
चल समारोह के लिए मंदिर के पुजारी और पुरोहितों द्वारा तैयारी की जा रही है। चल समारोह के लिए और भी आर्कषण बढ़ सकते हैं। श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह महाकाल मंदिर से निकलकर तोपतखाना, दौलतगंज चौराहा, फव्वाराचौक, नई सड़क, कंठाल चौराहा, सतीगेट, सराफा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होकर वापस महाकाल मंदिर पहुंचकर समाप्त होगा। साल में एक बार निकलने वाले चल समारोह का स्वागत विभिन्न समाजिक संस्थाओं द्वारा विभिन्न स्थानों पर मंच बनाकर किया जाएगा।
यहां भी निकलेगी गैर...
सिंहपुरी- रंगपंचमी पर सिंहपुरी से निकली गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज की गेर में शौर्य व शक्ति के दर्शन होंगे। श्री महाकालेश्वर भर्तृहरि विक्रम ध्वज चल समारोह समिति के तत्वावधान में गेर निकाली जाएगी। शाम सात बजे आताल पाताल भैरव की महाआरती के बाद गेर की शुरूआत होगी। कारवां में तीन बैंड, 21 ध्वज, 21 ढोल, अखाड़े आदि शामिल रहेंगे। सिंहपुरी से शुरू होकर गेर प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट पहुंचेगी, यहां ध्वज पूजन किया जाएगा। इसके बाद चल समारोह नगर भ्रमण के लिए रवाना होगा।
कार्तिक चौक- कार्तिक चौक से रंगपंचमी पर गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज की गेर निकलेगी। शाम सात बजे तोपतोड़ भैरव मंदिर में ध्वज निशान का पूजन किया जाएगा। इसके बाद ढोल ढमाकों के साथ समाजजन ध्वजों को लेकर निकलेंगे तथा समाज जन के घरों पर प्रदर्शन के लिए स्थापित किया जाएगा। भागसीपुरा- भागसीपुरा से औदिच्य ब्राह्मण समाज की गेर रंगपंचमी पर निकाली जाएगी। समाजजन श्री आनंद भैरव मंदिर में ध्वज निशान का पूजन करेंगे। इसके बाद बैंड बाजों के साथ ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा।
