फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain News ›   Ujjain News: Water from 11 rivers provide relief to Baba Mahakal from heat, pots placed in womb

Ujjain: भीषण गर्मी में बाबा महाकाल को राहत पहुंचाएगा 11 नदियों का जल, 24 से गर्भगृह में होंगे यह खास इंतजाम

Sat, 20 Apr 2024 03:17 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उदित दीक्षित Updated Sat, 20 Apr 2024 03:17 PM IST
सार

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित अभिषेक शर्मा ने बताया कि 24 अप्रैल को ठंडे पानी की गलंतिका शिवलिंग के ऊपर बांधेंगे। इसमें से शिवलिंग पर लगातार जल आता रहेगा, जिससे भगवान शिव गर्मी में शीतलता का अनुभव करेंगे।

विज्ञापन
Ujjain News: Water from 11 rivers provide relief to Baba Mahakal from heat, pots placed in womb
गर्भगृह में लगाई जाएंगी 11 मटकियां। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आए दिन कोई न कोई बदलाव होता ही रहता है। फिर चाहे यह बदलाव दर्शन व्यवस्था को लेकर हो या फिर पूजन से संबंधित। लेकिन, 24 अप्रैल से महाकाल मंदिर में एक ऐसा बदलाव किया जाने वाला है जिससे बाबा महाकाल को वैशाख और ज्येष्ठ महीने में होने वाली गर्मी से बचाया जा सकेगा। इस बदलाव की तैयारियां मंदिर में शुरू की जा चुकी हैं और अब सिर्फ गर्भगृह में 11 मटकियों लगाए जाने का इंतजार है।  

विज्ञापन


श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित अभिषेक शर्मा (बाला गुरु) ने बताया कि वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 24 अप्रैल बुधवार से मंदिर के पंडित और पुजारी मिलकर ठंडे पानी की गलंतिका शिवलिंग के ऊपर बांधेंगे। इसमें से लगातार शिवलिंग पर जल आता रहेगा, जिससे भगवान शिव शीतलता का अनुभव करेंगे। 2 महीने तक भगवान को इसी जतन से तपती गर्मी से बचाया जा सकेगा। पंडित बाला गुरु ने बताया कि भगवान महाकालेश्वर को वैशाख और ज्येष्ठ महीने की तपती गर्मी से बचाने के लिए पुजारी-पुरोहित हर साल शिवलिंग के ऊपर 11 मटकी बांधते हैं। इन मटकियों से सुबह भस्मआरती से लेकर संध्या पूजन से पहले तक भगवान महाकाल पर ठंडे जल की धारा प्रवाहित की जाती है।
विज्ञापन




11 नदियों के प्रतीक स्वरूप में होती है यह मटकियां
पंडित महेश गुरु ने बताया कि वैशाख कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा पर मंदिर के गर्भग्रह में यह मटकिया लगाई जाती हैं। 11 मटकियों में अलग-अलग नदियों का जल जैसे कि गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, नर्मदा, शिप्रा अन्य नदियों का जल लाया जाता है और फिर इन मटकियों के ऊपर इन नदियों के नामों को भी लिखा जाता है। इन मटकियों को गलंतिका कहा जाता है जिससे भगवान के शीश पर सतत शीतल जलधारा प्रवाहित की जाटी है। ज्योतिर्लिंग की परंपरा अनुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक दो माह प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक गलंतिका बांधी जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed