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Shivpuri: अच्छी बारिश के बाद पवा स्थित जलप्रपात शुरू, 100 फीट ऊंचाई से गिर रहा पानी
Sun, 24 Jul 2022 04:49 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 24 Jul 2022 04:49 PM IST
सार
ल पर जलप्रपात शुरू हो गया है। बीते कुछ दिनों से हो रही अच्छी बारिश के बाद पवा जलप्रपात पर 100 फीट ऊंचाई से पानी गिर रहा है। रविवार को जलप्रपात पर पानी आने के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखने के लिए पहुंचे।
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शिवपुरी से लगभग 40 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध पवा धार्मिक स्थल पर जलप्रपात शुरू हो गया है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिवपुरी से लगभग 40 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध पवा धार्मिक स्थल पर जलप्रपात शुरू हो गया है। बीते कुछ दिनों से हो रही अच्छी बारिश के बाद पवा जलप्रपात पर 100 फीट ऊंचाई से पानी गिर रहा है। रविवार को जलप्रपात पर पानी आने के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखने के लिए पहुंचे।
गौरतलब है कि पवा जलप्रपात जंगल के बीच स्थित है और यह धार्मिक स्थल प्रसिद्ध है। इस जलप्रपात पर जंगली क्षेत्र से पानी आकर ऊंचाई से गिरता है और ऊंचाई से पानी गिरने पर यहां प्रकृति का अनोखा नजारा देखने को मिलता है। पवाधाम धार्मिक आस्था का केंद्र भी है यहां पर मुनिश्री संत रामदास महाराज का आश्रम है। इसके अलावा यहां एक गौशाला भी है जो जनभागीदारी आधार पर चलाई जाती है। गौशाला का संचालन करने वाले समाजसेवी वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्तमान में यहां 185 गोधन है इनकी सेवा की जा रही है।
पवा स्थित जलप्रपात के नीचे कई प्राकृतिक गुफाएं भी हैं। यहां पर प्राचीन काल में कई साधु संतों ने साधना ने की है। इसके अलावा ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने भी यहां पर अपना अज्ञातवास काटा है।
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गौरतलब है कि पवा जलप्रपात जंगल के बीच स्थित है और यह धार्मिक स्थल प्रसिद्ध है। इस जलप्रपात पर जंगली क्षेत्र से पानी आकर ऊंचाई से गिरता है और ऊंचाई से पानी गिरने पर यहां प्रकृति का अनोखा नजारा देखने को मिलता है। पवाधाम धार्मिक आस्था का केंद्र भी है यहां पर मुनिश्री संत रामदास महाराज का आश्रम है। इसके अलावा यहां एक गौशाला भी है जो जनभागीदारी आधार पर चलाई जाती है। गौशाला का संचालन करने वाले समाजसेवी वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्तमान में यहां 185 गोधन है इनकी सेवा की जा रही है।
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पवा स्थित जलप्रपात के नीचे कई प्राकृतिक गुफाएं भी हैं। यहां पर प्राचीन काल में कई साधु संतों ने साधना ने की है। इसके अलावा ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने भी यहां पर अपना अज्ञातवास काटा है।
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