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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sehore News ›   There is also a Jallianwala Bagh in Sehore, 356 revolutionaries were gunned down on January 14

MP News: सीहोर में भी है एक जलियांवाला बाग, 14 जनवरी को 356 क्रांतिकारियों को भून दिया था गोलियों से

Fri, 13 Jan 2023 07:37 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 13 Jan 2023 07:37 PM IST
सार

सीहोर में 14 जनवरी 1858 को 356 क्रांतिकारियों को जेल से निकालकर सीवन नदी किनारे सैकड़ाखेड़ी चांदमारी मैदान में लाया गया। इन सभी क्रांतिकारियों को एक साथ गोलियों से भून दिया गया था। ये घटनाक्रम जलियांवाला बाग जैसा माना जाता है। 

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There is also a Jallianwala Bagh in Sehore, 356 revolutionaries were gunned down on January 14
सीहोर में 1958 के क्रांतिकारियों को पुष्पांजलि देने लोग पहुचते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में भी जलियांवाला बाग जैसा रोंगटे खड़े कर देने वाला घटनाक्रम हुआ था। जनरल ह्यूरोज के आदेश पर 14 जनवरी 1858 को सभी 356 क्रांतिकारियों को जेल से निकालकर सीवन नदी किनारे सैकड़ाखेड़ी चांदमारी मैदान में लाया गया। इन सभी क्रांतिकारियों को एक साथ गोलियों से भून दिया गया था। मकर संक्रांति के अवसर पर लोग सैकड़ाखेड़ी मार्ग पर स्थित शहीदों के समाधि स्थल पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
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बता दें कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 1857 की क्रांति को भारतीय इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में देखा जाता है। पूरे देश के साथ ही मध्य भारत में भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह पनपा था। इसे दबाने के लिए अनेक क्रांतिकारियों को गोली से भून दिया गया था। अंग्रेजी शासन के खिलाफ मध्य भारत में चल रहे विद्रोह में सीहोर की बर्बरतापूर्ण घटना को जलियांवालाबाग हत्याकांड की तरह माना जाता है। 
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क्या है यहां की कहानी
जानकार बताते हैं कि 10 मई 1857 को मेरठ की क्रांति से पहले ही सीहोर में क्रांति की ज्वाला सुलग गई थी। मेवाड़, उत्तर भारत से होती हुई क्रांतिकारी टुकड़ियां 13 जून 1857 को सीहोर और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच गई थीं। एक अगस्त 1857 को छावनी के सैनिकों को नए कारतूस दिए गए। इन कारतूसों में सूअर और गाय की चर्बी लगी हुई थी। बात सामने आने पर सैनिकों में आक्रोश और बढ़ गया। सीहोर छावनी के सैनिकों ने सीहोर कॉन्टिनेंट पर लगा अंग्रेजों का झंडा उतारकर जला दिया और महावीर कोठ और वलीशाह के संयुक्त नेतृत्व में स्वतंत्र सिपाही बहादुर सरकार का ऐलान किया। जनरल ह्यूरोज को जब सीहोर की क्रांतिकारी गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसे बलपूर्वक कुचलने के आदेश दिए।
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सीहोर में जनरल ह्यूरोज के आदेश पर 14 जनवरी 1858 को सभी 356 क्रांतिकारियों को जेल से निकालकर सीवन नदी किनारे सैकड़ाखेड़ी चांदमारी मैदान में लाया गया। इन सभी क्रांतिकारियों को एक साथ गोलियों से भून दिया गया था। जनरल ह्यूरोज इन क्रांतिकारियों के शव पेड़ों पर लटकाने के आदेश दिए और शवों को पेड़ों पर लटकाकर छोड़ दिया गया था। दो दिन बाद आसपास के ग्रामवासियों ने इन क्रांतिकारियों के शवों को पेड़ से उतारकर इसी मैदान में दफनाया था। मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को बड़ी संख्या में नागरिक सैकड़ाखेड़ी मार्ग पर स्थित शहीदों के समाधि स्थल पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
 
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