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Sehore News: बादाम का दूध पीकर मैदान में उतरने वाले भैंसा का निधन, 26 साल की उम्र में 16 कुश्ती जीता
Tue, 26 Mar 2024 08:01 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 26 Mar 2024 08:01 PM IST
सार
सीहोर के चैंपियन यानी पाड़ा (भैंसा) की मौत हो गई। भैंसे की मौत से क्षेत्रवासी शोक में हैं। बताया जाता है कि 26 साल की उम्र में पाड़ा ने 16 कुश्ती जीता था।
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पाड़ा भैंसा की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आमतौर पर लोग पाड़ों (भैंसा) को काटने के लिए बाजार में बेच देते हैं। लेकिन शहर में कई पशुपालक ऐसे हैं, जो वंशवृद्धि के साथ कुश्ती के शौक के लिए पाड़ों की परवरिश करते हैं। ऐसे ही शहर के बड़ी ग्वालटोली स्थित किशन पहलवान हैं, जिनका 26 वर्षीय पाड़े का नाम सीहोर में चैंपियन के रूप में पहचाना जाता है, जिसका मंगलवार सुबह निधन हो गया। इससे क्षेत्रवासियों ने उसका पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
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इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, शहर में हुई कुश्तियों में अपनी ताकत का लोहा मनवाने वाला पाड़ा कालू किसी पहचान का मोहताज नहीं था। वह 26 साल की उम्र में करीब 16 कुश्ती में लड़ने वाले विरोधियों को धूल चटा चुका है। पाड़े के मालिक का कहना है कि बादाम का दूध पीकर कुश्ती के मैदान में उतरता था। उन्होंने भैंस के बछड़े यानी की पाड़े को बच्चों की तरह पाल-पोसकर तैयार किया था। जो कि करीब 26 साल का हो चुका था।
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बता दें कि उसकी खुराक का इंतजाम किया जाता था। हर रोज काजू, बादम और घी का सेवन करने वाला पाड़ा क्षेत्रवासियों की आंख का तारा था। मंगलवार को क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से पाड़े का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान यादव समाज की ओर से अनेक समाजजनों के अलावा जिला संस्कार मंच की ओर से मनोज दीक्षित मामा, राजेन्द्र शर्मा बब्बल गुरु, जितेन्द्र तिवारी आदि ने शोक व्यक्त किया। ग्वालटोली में अनेक पशुपालक ऐसे हैं, जो भैंस के बछड़ों को कटने से बचाने के लिए इनकी देखभाल करते हैं और पहलवानों की तरह इनकी परवरिश करते हैं।
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