{"_id":"6264c8d658794820a023f552","slug":"sehore-life-imprisonment-to-maternal-uncle-who-misbehaved-with-minor-niece","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीहोर: नाबालिग भांजी के साथ दुराचार करने वाले मामा को आजीवन कारावास, कोर्ट ने 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीहोर: नाबालिग भांजी के साथ दुराचार करने वाले मामा को आजीवन कारावास, कोर्ट ने 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
Sun, 24 Apr 2022 09:30 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 24 Apr 2022 09:30 AM IST
सार
सीहोर जिला एवं सत्र न्यायालय ने नाबालिग भांजी के साथ दुराचार करने वाले मामा को आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी ने 2 साल पहले अपनी भांजी को अकेले पाकर उसके साथ गलत काम किया था।
विज्ञापन
नाबालिग भांजी से रेप करने वाले मामा को आजीवन कारावास।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीहोर जिला न्यायालय ने नाबालिग भांजी के साथ दुराचार करने वाले मामा को आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अशोक भारद्वाज ने आरोपी पप्पू मीणा (पिता कमल सिंह उम्र 35 वर्ष निवासी मोती मंदिर के पास थाना कोतवाली, जिला-सीहोर) को आजीवन कारावास और 5000 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
मीडिया सेल प्रभारी केदार कौरव ने बताया की पीड़ित पक्ष ने शिकायत दर्ज की थी कि 03 जनवरी 2020 को पीड़िता के माता-पिता किसी काम के चलते घर से बाहर गए थे। इस दौरान वे कक्षा 5वीं में पढ़ने वाली अपनी बच्ची को बच्ची के सगे मामा के घर छोड़कर गए थे। बच्ची दिनभर अपने मामा के घर में ही थी, लेकिन रात को करीब 9:00 बजे बच्ची के मामा ने उसे उसके घर भेज दिया। इस दौरान बच्ची रात के वक्त अकेले घर में सो रही थी। रात के करीब 12:00 बजे बच्ची का मामा उसके घर पहुंचा और उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। बच्ची के शोर को सुनकर पड़ोस के लोग वहां पहुंचे, जिन्होंने फोन कर मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी मामा को गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376(एबी), 506 भादवि, धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट में पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया था।
बच्ची के माता पिता ने घटना का समर्थन किया था। मामले में विशेष लोक अभियोजक ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रकरण में महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव अर्थात डी.एन.ए. रिपोर्ट नेगेटिव होने बावजूद भी पीड़िता के साक्ष्य पर आरोपी को दोषसिद्ध किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मीडिया सेल प्रभारी केदार कौरव ने बताया की पीड़ित पक्ष ने शिकायत दर्ज की थी कि 03 जनवरी 2020 को पीड़िता के माता-पिता किसी काम के चलते घर से बाहर गए थे। इस दौरान वे कक्षा 5वीं में पढ़ने वाली अपनी बच्ची को बच्ची के सगे मामा के घर छोड़कर गए थे। बच्ची दिनभर अपने मामा के घर में ही थी, लेकिन रात को करीब 9:00 बजे बच्ची के मामा ने उसे उसके घर भेज दिया। इस दौरान बच्ची रात के वक्त अकेले घर में सो रही थी। रात के करीब 12:00 बजे बच्ची का मामा उसके घर पहुंचा और उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। बच्ची के शोर को सुनकर पड़ोस के लोग वहां पहुंचे, जिन्होंने फोन कर मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी मामा को गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376(एबी), 506 भादवि, धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट में पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया था।
विज्ञापन
बच्ची के माता पिता ने घटना का समर्थन किया था। मामले में विशेष लोक अभियोजक ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रकरण में महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव अर्थात डी.एन.ए. रिपोर्ट नेगेटिव होने बावजूद भी पीड़िता के साक्ष्य पर आरोपी को दोषसिद्ध किया गया।
विज्ञापन
