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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Shardiya Navratri Sagar Abar Mata Temple is Siddha Shakti Peeth of Bundelkhand Alha Udal had worshipped here

Shardiya Navratri Sagar: बुंदेलखंड का सिद्ध शक्ति पीठ है अबार माता मंदिर, यहां आल्हा उदल ने की थी आराधना

Tue, 08 Oct 2024 09:24 PM IST
सागर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Tue, 08 Oct 2024 09:24 PM IST
सार

आदिशक्ति जगत जननी जगदंबा के इक्यावन शक्ति पीठ माने जाते हैं, जो भारत वर्ष सहित नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश में स्थित हैं। लेकिन इनके अलावा देश के कोने-कोने में माता के अनेकानेक चमत्कारिक सिद्ध मठ मंदिर हैं। ऐसे ही एक चमत्कारिक प्राचीन स्थल के बारे में हम आपको बता रहे हैं और इस स्थान का नाम है अबार माता मंदिर।
 

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Shardiya Navratri Sagar Abar Mata Temple is Siddha Shakti Peeth of Bundelkhand Alha Udal had worshipped here
अबार माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुंदेलखंड का प्रसिद्ध क्षेत्र है अबार माता का दरबार, बुंदेलखंड का अबार माता तीर्थ क्षेत्र ऐसा क्षेत्र है, जहां हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। बुंदेलखंड के डकैतों के अलावा आल्हा उदल जैसे वीरों की मनोकामना अबार माता ने पूरी की है।

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बुंदेलखंड और वीरों की सदी यानी 12वीं सदी में पृथ्वीराज चौहान को चौंकाने वाले आल्हा उदल की कहानी इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी हुई है। यहां चैत्र नवरात्र में माता की कृपा पाने लोगों का तांता लगता है। बुंदेलखंड के चंदेल शासक परमदिदेव (परमाल) के शासन काल में यह अंचल चंदेल शासन का अंग था। किवदंती है कि वीर आल्हा उदल ने इस मंदिर को बनवाया था।
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बताया जाता है कि 11वीं सदी के उत्तरार्ध में करीब साढ़े 800 साल पहले वे महोबा से माधोगढ़ जा रहे थे। पहुंचने में देर यानी बुंदेली भाषा में अबेर हो जाने पर उन्होंने यहीं बियाबान जंगल में ही अपना डेरा डाल दिया। रात में जब उन्होंने अपनी आराध्य देवी का आह्वान किया तो मां ने उन्हें दर्शन देकर इसी स्थान पर मंदिर बनवाने की प्रेरणा दी। माता की प्रेरणा से उन्होंने यहां चट्टान पर मां की मढ़िया बनवाकर प्रतिमा स्थापित कराई। तभी से यहां मां को अबार माता के नाम जाना जाने लगा।
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चट्टान के पास गर्भगृह में विराजी अबार माता जगत जननी जगदंबा का ही रूप है। बाद में जब यहां गांव बसा तो लोगों ने चट्टान के पास मंदिर बनवाकर उसमें सिद्ध प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा करा दी। किवदंती है कि इस मंदिर में मौजूद एक विशालकाय चट्टान है, जिसका जुड़ाव भगवान शिव से माना जाता है। ऐसी धारणा है यह चट्टान हर महाशिवरात्रि को एक तिल के बराबर विस्तार पाती है, जो वर्तमान में करीब 70 फीट की हो चुकी है। इससे लोगों की आस्था जुड़ी है।

डकैतों की शरण स्थली रहा है यह क्षेत्र
अबार माता को डकैतों की माता का मंदिर भी कहा जाता है। बुंदेलखंड के दस्यु युग में दुर्दांत और खूंखार डाकू इसी मंदिर में माता के दरबार में हाजिरी लगाते थे। इनमें पूजा बब्बा, मूरत सिंह, देवी सिंह जैसे डकैतों से लेकर ग्वालियर-झांसी के डकैत भी यहां आते थे और माता की आराधना कर मनौती का घंटा चढ़ाते थे। तीन जिलों की सीमाओं से लगा घने जंगली पहाड़ों में बसा यह मंदिर उनके लिए वाकई एक सुरक्षित स्थान था। एक जिले में डकैती डालकर दूसरे प्रदेश या अन्य जिले में चले जाना यहां से आसान था, क्योंकि उत्तर प्रदेश की सीमा भी यहां से लगी हुई है। वहीं, चट्टान से बने इस मंदिर की संरचना भी बहुत रोचक और अनोखी है। यहां कोई छिपा हो तो उसे ढूंढ़ना मुश्किल होगा।

छोटा-सा पत्थर अपने आप बढ़ते-बढ़ते बनी 70 फीट की चट्टान
पत्थरों और बड़ी-बड़ी भीमकाय चट्टानों से बने इस मंदिर की गहराइयों में कई रहस्य छिपे हैं। ये चट्टानें बड़ी-बड़ी मशीनों से भी हिलाई नहीं जा सकती। यहां एक पिलरनुमा चट्टान ऐसी है, जो अपने आप बढ़ती जा रही है। कुछ साल पहले इस चट्टान की चोटी पर माता की छोटी-सी मढ़िया बनाकर मूर्ति स्थापित की गई, जिसके बाद इसका बढ़ना रुक गया। अपितु यह बढ़ते-बढ़ते यह 70 फीट की हो गई है।

नवरात्रि में हर दिन आते हैं 50 हजार से एक लाख लोग
अबार माता मंदिर में आम दिनों में रोजाना दो हजार लोग माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर पहुंचने वालो में छतरपुर जिले के अलावा टीकमगढ़, सागर और दमोह के श्रद्धालु भी आते हैं। छतरपुर जिला मुख्यालय से 105 और बड़ामलहरा विकास खंड मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर रामटौरिया के पास अबार माता का मंदिर स्थिति है, जहां जाने के लिए बस,टैक्सी सुविधा उपलब्ध है।

पंचमी व अष्टमी को होता है विशेष शृंगार
नवरात्रि में अबार माता का हर दिन शृंगार होता है। पंचमी और अष्टमी को विशेष शृंगार किया जाता है। वहीं, वैसाख माह की नवरात्रि में दस दिन तक विशेष मेला लगता है। हालांकि, शारदीय नवरात्रि पर भी मेले जैसा माहौल रहता है, लेकिन वैसाख माह का मेला प्रसिद्ध है।


सागर से कैसे पहुंचे अबार माता धाम तक
छतरपुर जिले के बड़ामलहरा अनुभाग से महज 40 किमी दूरी पर स्थित अबार माता मेला में बहुत भीड़ देखने को मिलती है। धाम तक पहुंचने के लिए सागर छतरपुर रोड से शाहगढ़ विकासखंड के रामटोरिया गांव मे बस एवं निजी वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं।

अबार माता मंदिर

अबार माता मंदिर

अबार माता मंदिर

अबार माता मंदिर

अबार माता मंदिर

अबार माता मंदिर

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