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रंग लाया सागर के छात्र का संघर्ष: एक नंबर बढ़वाने के लिए हाईकोर्ट गया था, अब बोर्ड ने गलती मानी और बढ़े 28 नंबर

Wed, 23 Feb 2022 03:11 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 23 Feb 2022 03:11 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले शांतनु शुक्ला ने मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के रिजल्ट में गड़बड़ी के खिलाफ तीन साल तक संघर्ष किया। शांतनु ने एक नंबर बढ़ाने के लिए बोर्ड को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कॉपियां दोबारा जांचने पर उन्हें 28 नंबर बढ़कर मिले हैं।
 

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Sagar's student struggle: Went to High Court to increase one number, now the board accepted the mistake and increased 28 numbers
शांतनु शुक्ला ने मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के रिजल्ट में गड़बड़ी के खिलाफ तीन साल लंबी लड़ाई लड़ी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जानकारी के अनुसार सागर जिले के कबीर मंदिर के पास परकोटा के रहने वाले शांतनु हेमंत शुक्ला ने 2018 में एक्सीलेंस स्कूल से 12वीं की है। उन्हें 74.8 प्रतिशत अंक मिले थे, लेकिन शांतनु को भरोसा ज्यादा नंबर का था। 75 प्रतिशत अंक में 1 नंबर कम था, जो उन्हें अखर रहा था। क्योंकि 75 प्रतिशत अंक नहीं हो पाने से वे मेधावी योजना का लाभ नहीं ले पाए। इसके बाद शांतनु ने रीटोटलिंग का फॉर्म भर दिया। पर रिजल्ट में कोई बदलाव नहीं हुआ।
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शांतनु असंतुष्ट थे, उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। 2018 में जबलपुर हाईकोर्ट के वकील रामेश्वर सिंह के जरिए याचिका दायर की गई, लेकिन कोविड-19 काल के चलते दो सालों तक मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई। हाई कोर्ट ने एमपी बोर्ड को 6 नोटिस जारी किए, लेकिन वहां से पक्ष रखने के लिए कोई भी नहीं पहुंचा। हाईकोर्ट में 44 पेशियां हुईं। शांतनु के करीब 15 हजार रुपये खर्च हुए। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद की कॉपियों के रीचेक के ऑर्डर दिए। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने शांतनु की कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन कराया। मूल्यांकन के बाद 21 फरवरी को शांतनु को नई मार्कशीट मिली, जिसमें उसके 80.4 फीसदी नंबर हैं। शांतनु की पहली अंकसूची में 374 प्राप्तांक थे, अब जो नई मार्कशीट आई है, उसमें 402 टोटल नंबर हो गए हैं।
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Sagar's student struggle: Went to High Court to increase one number, now the board accepted the mistake and increased 28 numbers
शांतनु की पुरानी अंकसूची और नई अंकसूची - फोटो : सोशल मीडिया

शांतनु का कहना है कि उन्हें भरोसा था कि उनका रिजल्ट 75% से ऊपर ही आएगा। बोर्ड में अप्लाई कर बुक कीपिंग और अकाउंटिंग सब्जेक्ट की कॉपी निकलवाई। प्रश्न के उत्तर पर सही टिक लगे थे, लेकिन इसके नंबर नहीं दिए गए थे। शांतनु ने बताया कि विभाग की गलती से वह मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना से वंचित हुए थे। अब वह मेधावी छात्र योजना के लिए भी आवेदन करेंगे। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी और माध्यमिक शिक्षा मंडल में आवेदन किया जाएगा।
 
मेधावी छात्र योजना को जानिए
मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना के अंतर्गत शासकीय मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ, निजी क्षेत्र के चिन्हित सभी मेडिकल इंजीनियरिंग कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
 
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