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रतनगढ़ हादसा: मातम के बीच जिंदगी का जश्न

Thu, 17 Oct 2013 12:12 PM IST
जुबैर अहमद
जुबैर अहमद Updated Thu, 17 Oct 2013 12:12 PM IST
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मैं जब दिल्ली से मध्य प्रदेश के दतिया के रतनगढ मंदिर के लिए चला तो मुझे यकीन था कि नवरात्रि के बावजूद वहां सन्नाटा छाया होगा। मंदिरों में भीड़ नहीं होगी और तीर्थयात्री बड़े हादसे के बाद वहां नहीं जाएंगे।

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दतिया में रविवार को हुई भगदड़ में 115 लोगों की मौत हो गई थी।

लेकिन मेरे विचारों के विपरीत वहां मातम का नहीं, जश्न का माहौल था और महिला और पुरुष, लड़के और लड़कियां रंगीन पोशाकों में आकर उत्सव का आनंद ले रहे थे।

एक जगह मैंने देखा कि आधे दर्जन के करीब महिलाएं ढोलक की ताल पर नाच रही हैं। उनके इर्द गिर्द बैठे उनके उत्साहित साथी उन्हें नाचता देख रहे हैं।

और ये जश्न ठीक उसी पुल के पास मनाया जा रहा था जहां एक दिन पहले एक भगदड़ में 115 लोगों की मृत्यु हो गई थी।

एक तीर्थयात्री से मैंने पूछा, "आपको पता है कल के हादसे के बारे में?" तो उनका कहना था, "मालूम है।"

मैंने पूछा, "आप उसके बावजूद आज आए हैं यहां पर?", तो उन्होंने कहा, "सोमवार को दशहरा का आखिरी दिन है और हम हर हाल में उत्सव में शामिल होना चाहते थे।"

रुकती नहीं जिंदगी

एक दुकानदार ने कहा कि उन्होंने भगदड़ अपनी आंखों से देखी लेकिन वो अपनी दुकान से हिले नहीं।

भीड़ में एक गांव से आए कुछ लोगों से मैंने पूछा, "आपको कल के हादसे पर अफ़सोस है?" उनका कहना था, "दुख ज़रूर है लेकिन ज़िंदगी कभी रुकती नहीं है।"

यहां आए तीर्थयात्री और उनकी प्रतिक्रियाओं के विपरीत दिल्ली के अख़बारों में काफी नाराज़गी जताई गई।

मीडिया में भगदड़ के लिए कमोबेश प्रशासन को ज़िम्मेदार माना गया और कहा गया कि प्रशासन की तरफ से तैयारी की कमी रही। पुलिस की भी आलोचना हुई।

शायद ये सच भी हो लेकिन हमें वहां पता चला कि कुछ लोगों ने पुल के ऊपर लगी लंबी कतारें तोड़ी जिसके कारण वहां खलबली मच गई और ये अफवाह फैल गई कि पुल टूटने वाला है। इसके बाद भगदड़ मच गई।
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इसी जश्न के माहौल में मुझे इंदिरा नाम की एक महिला मिली जो काफी दुखी नज़र आ रही थी। उन्होंने मुझे बताया कि उनके 'पति कल से लापता है'।

इंदिरा के पति ने पुल के नज़दीक दुकान लगाई थी और भगदड़ के बाद से उनका कोई पता नहीं चल रहा है

बिलखते हुए इंदिरा ने कहा, "मैंने उन्हें कई बार फोन किया लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा है।"

नज़दीक ही एक अन्य दंपति परेशान नज़र आ रहे थे। उनके एक बेटे और बेटी का पता नहीं चल रहा था।

उन्होंने बताया, "मेरा एक बेटा और एक बेटी भगदड़ के बाद से लापता हैं। वो कल इसी जगह आए थे।"

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