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बलात्कारियों के लिए काल बना मध्यप्रदेश का कानून, हैवानियत पर सजा-ए-मौत को लेकर विशेष प्रयत्न

Wed, 22 Aug 2018 05:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Wed, 22 Aug 2018 05:15 PM IST
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Prosecutors will get points on death penalty in rape case Judgment in Madhya Pradesh

नाबालिग बच्चियों के साथ रेप के मामले में मध्यप्रदेश के आंकड़ें कुछ भी कहते हों लेकिन सरकार इन आंकड़ों को कम करने के लिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना चाहती है। इसके लिए वह हर पैंतरा अपना रही है।  नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ते रेप के मामलों को रोकने और राज्य की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए  एमपी सरकार ने नई शुरुआत की है। इसके अंतर्गत नन्ही बच्चियों से अगर बलात्कार होता है और जो अभियोजन पक्ष आरोपी को मौत की सजा दिलाने में सफल होता है सरकार उसे सम्मानित करेगी। यही नहीं अगर अभियोजन पक्ष बलात्कारी को आजीवन कारावास की सजा या अधिकतम सजा दिलाता है तब भी सरकार अभियोजन पक्ष को सम्मानित करने की योजना बना रही है। 

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वैसे तो नाबालिग बच्चियों से रेप के आरोपी को मौत की सजा देने का प्रदेश को विशेषाधिकार प्राप्त है और इसके लिए अभियोजन पक्ष भी जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश का रेप के लिए बनाया गया कानून बलात्कारियों के लिए काल बनने लगा है। और इसकी वजह है शिवराज सरकार से मिलने वाले प्वाइंट्स। बता दें कि नाबालिग बच्चियों से रेप के आरोपी को मौत की सजा दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष को 1000 प्वाइंट्स, आजीवन कारावास के लिए 500 प्वाइंट्स और ज्यादा से ज्यादा सजा दिलाने के लिए 100-200 प्वाइंट दिए जाएंगे।
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मध्यप्रदेश सरकार की इस नई पहल से छोटी उम्र की बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म पर आरोपी को जितनी ज्यादा सजा मिलेगी अभियोजन पक्ष को उतने ही प्वाइंट्स मिलेंगे। जिसका फायदा उन्हें वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में मिलेगा। इसी से आगे चलकर वकीलों का भविष्य भी तय होगा।
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आंकड़ों पर गौर करें तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 में देशभर में रेप के कुल 38,947 मामले दर्ज हुए। इनमें से 4,882 मामले सिर्फ मध्यप्रदेश के थे। राज्य में नाबालिग बच्चियों से रेप के कुल 2,479 केस दर्ज हुए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (2,310 केस) और उत्तर प्रदेश (2,115) का नंबर है।

याद दिला दें कि पिछले 8 महीनों में मध्य प्रदेश की अलग-अलग अदालतें बच्चियों से रेप के मामले में 13 दोषियों को मौत की सजा सुना चुकी हैं। कुछ मामलों में तो रेप के बाद बच्ची की हत्या तक कर दी गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी तक सजा-ए-मौत के एक केस को ही अपनी मंजूरी दी है। इसी को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार ने नई पहल की है, ताकि इन मामलों में पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

Prosecutors will get points on death penalty in rape case Judgment in Madhya Pradesh

इसी तरह के फास्ट ट्रायल्स में मंदसौर का केस भी शामिल है। जहां एक विशेष अदालत ने 26 जून को आठ वर्षीय स्कूली छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार करने के मामले में दो युवकों को फांसी की सजा सुनाई। विशेष न्यायालय की न्यायाधीश निशा गुप्ता ने इस मामले में इरफान (20) और आसिफ (24) को दोषी करार दिया। 

सामूहिक बलात्कार के बाद कक्षा तीन की इस छात्रा को जान से मारने की नीयत से उस पर चाकू से हमला भी किया गया था। वह 27 जून की सुबह शहर के बस स्टैंड के पास झाड़ियों में लहूलुहान हालत में मिली थी। इस मामले में पुलिस ने इरफान और आसिफ को गिरफ्तार किया था। 

ठाकुर ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने दोनों आरोपियों पर भादंवि की धारा 376-डी (सामूहिक बलात्कार), 376 (2एन), 366 (अपहरण), 363 (अपहरण के दण्ड) एवं पॉक्सो एक्ट से संबधित धाराओं के तहत 10 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल किया था।

घटना के मात्र 15वें दिन दाखिल किए गए इस आरोप पत्र में 350 से अधिक पेज एवं प्रमाण के लिए करीब 100 दस्तावेज थे। इसमें डॉक्टरों सहित 92 गवाहों के बयान भी दर्ज थे।  इस अमानवीय घटना के बाद मंदसौर सहित पूरे मध्यप्रदेश में आरोपियों को तुरंत फांसी देने की मांग करते हुए लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे।

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इसी तरह दुष्कर्म के एक मामले में न्याय प्रक्रिया मात्र 6 घंटे में पूरी हो गई। चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में किशोर न्याय बोर्ड उज्जैन ने चालान पेश होने के मात्र 6 घंटे में ही फैसला सुना दिया। सोमवार को न्याय बोर्ड ने 14 साल के किशोर को उसकी इस हरकत के लिए 2 साल सिवनी के बाल संप्रेक्षण गृह भेजने का आदेश दे दिया। बता दें कि पुलिस के मुताबिक दुष्कर्म के मामले में इतनी जल्दी फैसला आने का यह देश में पहला मामला है। घटना 6 दिन पहले की बताई जा रही है।

 किशोर ने इस घटना को अपने ही घर में अंजाम दिया था, उसने बच्ची को किसी बहाने से अपने घर बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वो भागकर राजस्थान के चौमहला में अपने रिश्तेदार के यहां चला गया था। अगले दिन पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर उसे पकड़ लिया। 

एसपी सचिन अतुलकर ने बताया कि 24 घंटे में ही डीएनए रिपोर्ट मिल गई, जिसमें बच्ची से दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद सोमवार सुबह 11 बजे मालनवासा स्थित किशोर न्याय बोर्ड में चालान प्रस्तुत किया। जज तृप्ति पांडे ने तत्काल सुनवाई शुरू कर दी। गवाहों, अन्य सबूतों, मेडिकल और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने किशोर को दोषी पाया।

उधर, भागनढ़ थाना क्षेत्र के देवल गांव में 15 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म कर जिंदा जलाकर मारने के मामले में बीना के अपर जिला सत्र न्यायाधीश आलोक मिश्रा ने 22 साल के रब्बू उर्फ सर्वेश सेन को फांसी की सजा सुनाई है। जिले में इस तरह के मामलों में एक्ट संशोधन के बाद यह पांचवां फैसला है। कोर्ट ने इस मामले में घटना के 8 माह बाद फैसला दिया।

देवल गांव में 7 दिसंबर 2017 की रात करीब 8:30 बजे रब्बू ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के बाद केरोसिन डालकर उसे जिंदा जला दिया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में एक अन्य नाबालिग आरोपी का केस किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।

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