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ओंकारेश्वर: राखड़ से भरे डंपर की टक्कर से युवक की मौत, ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, लगाया चक्काजाम
Thu, 15 Oct 2026 05:59 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 15 Oct 2026 05:59 PM IST
सार
खंडवा जिले के पुनासा-सनावद मार्ग पर राखड़ से भरे डंपर की टक्कर से एक युवक की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित हरवंशपुरा के ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों ने भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर नियंत्रण, नियमित जांच और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
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दुर्घटना। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ओंकारेश्वर से करीब 25 किलोमीटर दूर खंडवा जिले की पुनासा तहसील अंतर्गत पुनासा-सनावद मार्ग पर राखड़ से भरे डंपर की टक्कर से एक युवक की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए। हरवंशपुरा गांव के ग्रामीणों ने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
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ग्रामीणों का आरोप था कि सिंगाजी थर्मल पॉवर से प्रतिदिन बड़ी संख्या में राखड़ से भरे भारी वाहन इस मार्ग से होकर गुजरते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इन वाहनों की रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। उनका कहना था कि पहले भी राखड़ परिवहन करने वाले भारी वाहनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है, इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
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चक्काजाम की सूचना मिलते ही नर्मदा नगर एसडीओपी सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि घटना में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और ग्रामीणों की समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाएगा। अधिकारियों ने यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए चक्काजाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन ग्रामीण तत्काल मानने को तैयार नहीं थे।
ग्रामीणों ने जताई चिंता
ग्रामीणों का कहना था कि यह केवल एक हादसे का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से भारी वाहनों के तेज रफ्तार में आवागमन का परिणाम है। उनका आरोप था कि राखड़ से भरे कैप्सूलनुमा भारी डंपर बड़ी संख्या में इस मार्ग से गुजरते हैं। कई बार इन वाहनों का संतुलन बिगड़ने से दुर्घटनाएं हुई हैं। ग्रामीणों ने ऐसे वाहनों की गति नियंत्रित करने, नियमित जांच करने और दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की। घटना के बाद क्षेत्र के राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। कांग्रेस और भाजपा से जुड़े नेताओं ने भी ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी समस्याएं सुनीं।
रोजाना सैकड़ों वाहनों से राखड़ का परिवहन
सिंगाजी थर्मल पॉवर परियोजना में कोयले से बिजली का उत्पादन किया जाता है। बिजली उत्पादन के बाद निकलने वाली राखड़ का उपयोग सीमेंट फैक्ट्रियों, सड़क निर्माण सहित अन्य कार्यों में किया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहनों के माध्यम से यह राखड़ विभिन्न स्थानों तक पहुंचाई जाती है। वरिष्ठ किसान नारायण सिंह तोमर न कहा इसके पहले भी कई बार बड़ी-बड़ी गंभीर सड़क दुर्घटना हो चुकी है। गति पर कोई लगाम नहीं रहता। खंडवा परिवहन विभाग को अनेक बार लिखा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ परिवहन जरूरी हो सकता है, लेकिन लोगों की सुरक्षा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि भारी वाहनों की गति, ओवरलोडिंग, वाहन की तकनीकी स्थिति और चालक की लापरवाही पर प्रभावी निगरानी नहीं हुई तो भविष्य में भी गंभीर हादसों की आशंका बनी रहेगी।
