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ओंकारेश्वर: दो दिन के बंद के बाद खुला ओंकारेश्वर, एक माह में नए सिरे से होगा सर्वे; आंदोलन फिलहाल स्थगित

Tue, 20 Oct 2026 07:34 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 20 Oct 2026 07:34 PM IST
सार

सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों से जुड़ी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर ओंकारेश्वर में दो दिन से जारी बंद मंगलवार शाम समाप्त हो गया। प्रशासन ने एक माह तक कार्रवाई नहीं करने और प्रभावित क्षेत्रों का नए सिरे से सर्वे कराने का आश्वासन दिया। मांगें पूरी नहीं होने पर स्थानीय लोगों ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी।

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omkareshwar close ends one month survey consensus simhastha 2028
बैठक में लिया गया निर्णय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों से प्रभावित स्थानीय रहवासियों की 19 सूत्रीय मांगों को लेकर दो दिन से बंद तीर्थनगरी ओंकारेश्वर मंगलवार शाम 5 बजे फिर खुल गई। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच हुई चर्चा के बाद फिलहाल एक माह का समय देने पर सहमति बनी है। इस दौरान विकास कार्यों से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने, प्रभावित क्षेत्रों का नए सिरे से सर्वे कराने और स्थानीय लोगों की सहमति से निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

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स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वे सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के साथ प्रभावित परिवारों के हितों, पुनर्वास, मुआवजे और आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि पहले भी प्रशासन की ओर से आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उनका अपेक्षित क्रियान्वयन नहीं हुआ। इसलिए इस बार एक माह के भीतर ठोस कार्रवाई और स्पष्ट निर्णय की मांग की गई है।
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नगर परिषद कार्यालय में हुई मैराथन बैठक
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे ओंकारेश्वर नगर परिषद कार्यालय में स्थानीय प्रतिनिधियों, संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों, समिति सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें स्थानीय लोगों की 19 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में षट्दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी महाराज, मांधाता विधायक नारायण पटेल, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रकाश परिहार, ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी राजा राव पुष्पेंद्र सिंह, भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा, भाजपा नेता दिग्विजय सिंह तोमर और श्याम सिंह मौर्य, कांग्रेस नेता नारायण सिंह तोमर, नगर कांग्रेस अध्यक्ष चंपाबाई, कांग्रेस के पुनासा मंडल अध्यक्ष चंदू माहगल्या सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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प्रशासन की ओर से ओंकारेश्वर की नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर श्रद्धा शुक्ला, पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा, नगर परिषद सीएमओ मोनिका पारधी, नायब तहसीलदार उदय मंडलोई और थाना प्रभारी अनोख सिंधिया सहित संबंधित अधिकारी शामिल हुए। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने आश्वासन दिया कि अगले एक माह तक ओंकारेश्वर में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस अवधि में मांगों और विकास कार्यों से जुड़ी विसंगतियों पर विचार किया जाएगा।

वन भूमि पर प्लॉट देने की मांग पर सहमति नहीं
बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे, रोजगार और निर्माण कार्यों से जुड़ी समस्याएं उठाई गईं। नवीन बस स्टैंड के सामने वन विभाग की भूमि पर प्रभावित परिवारों को प्लॉट देने की मांग भी रखी गई। हालांकि, कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने वन भूमि पर प्लॉट उपलब्ध कराने की मांग को संभव नहीं बताया। अन्य मांगों पर चर्चा के दौरान स्थानीय समिति के सदस्यों ने कहा कि पूर्व में भी कुछ मांगों पर लिखित आश्वासन मिले थे, लेकिन जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों का नए सिरे से सर्वे कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई।

'15 हजार लोगों का भविष्य कुछ लोग तय नहीं कर सकते'
बैठक में षट्दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी महाराज ने कहा कि ओंकारेश्वर के करीब 15 हजार लोगों का भविष्य केवल समिति या नगर परिषद के कुछ लोग तय नहीं कर सकते। विकास कार्यों से जुड़े फैसलों में नगर के लोगों की व्यापक सहमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिक विकास के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि सिंहस्थ-2028 के लिए होने वाले निर्माण कार्यों में प्रभावित परिवारों के हितों का ध्यान रखा जाए। जिन लोगों के घर, रोजगार या आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है, उनके लिए पुनर्वास, मुआवजे और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए।

हनुमान मंदिर में आमसभा के बाद बंद समाप्त करने का फैसला
प्रशासन के साथ बैठक के बाद मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे हनुमान मंदिर में स्थानीय नागरिकों की आमसभा हुई। इसमें प्रशासन के साथ हुई बातचीत और 19 सूत्रीय मांगों पर चर्चा की गई। आमसभा में तय किया गया कि शासन-प्रशासन को एक माह का समय दिया जाएगा। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों के नए सिरे से सर्वे, विकास कार्यों की विसंगतियों को दूर करने और मांगों पर आगे की कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर चर्चा की जाएगी। प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों ने बंद समाप्त करने का निर्णय लिया। मंगलवार शाम 5 बजे बाजार, दुकानें और अन्य गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। हालांकि, आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया है और मांगों का अंतिम समाधान अभी बाकी है।

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दो दिन बंद रहने से श्रद्धालुओं को हुई परेशानी
19 अक्टूबर से जारी बंद के कारण ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बाजार, होटल और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहने से बाहर से आए लोगों को आवश्यक वस्तुएं जुटाने में दिक्कत हुई। कुछ श्रद्धालुओं को पीने के पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी परेशान होना पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने माना कि लगातार दो दिन बंद रहने से नगर की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई और इसका असर श्रद्धालुओं पर पड़ा। इसी को देखते हुए प्रशासन के साथ बातचीत के बाद बंद समाप्त करने का फैसला लिया गया।

एक माह बाद फिर तय होगी आंदोलन की रणनीति
फिलहाल ओंकारेश्वर में बंद समाप्त होने के बाद स्थिति सामान्य हो रही है। अगले एक माह के दौरान प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच मांगों के समाधान, प्रभावित परिवारों के सर्वे और निर्माण कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि एक माह के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन कर सकते हैं। इस तरह दो दिन के बंद के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है, लेकिन 19 सूत्रीय मांगों का समाधान अभी नहीं हुआ है। अब निगाहें अगले एक माह में होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई और स्थानीय लोगों के साथ बनने वाली सहमति पर टिकी हैं।
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