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39 दिन जेल में रहे राघवजी अब 38 साल के शिक्षक के लिए अड़े
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 29 Aug 2013 05:04 PM IST
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अपने घर में काम करने वाले एक युवक के अप्राकृतिक यौन शोषण के आरोप में कुर्सी गंवा चुके मध्यप्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री राघवजी सरकारी स्कूल के एक शिक्षक को अपना पीए बनाना चाहते हैं।
पूर्व मंत्री ने इसके लिए पहले तो विदिशा कलेक्टर से कहा, फिर बात नहीं बनी तो सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों से भी मिले। लेकिन विभाग ने शिक्षक को पीए बनाने से इनकार कर दिया।
जानकारी के मुताबिक राघवजी विदिशा में पदस्थ 38 साल के शिक्षक नरेश रघुवंशी को पीए बनवाना चाहते हैं। 39 दिन तक जेल में रहने के बाद जब वे जमानत पर छूटे तो हाल ही में रघुवंशी को लेकर जिला कलेक्टर से मिले थे।
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इसके बाद वे मंगलवार को रघुवंशी को साथ लेकर जीएडी के प्रमुख सचिव के सुरेश से मिलने पहुंचे थे। वे करीब आधा घंटे तक प्रमुख सचिव से रघुवंशी का आदेश जारी करने का आग्रह करते रहे, लेकिन प्रमुख सचिव ने इनकार कर दिया।
राघवजी ने पार्टी संगठन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि उन्हें भाजपा से निष्कासित करने में पार्टी के संविधान का ध्यान नहीं रखा गया।
क्यों नहीं मिल पा रहा है मनपसंद कर्मचारी
दरअसल, राघवजी मंत्री पद गंवाने के बाद से सिर्फ विधायक हैं। नियमों के तहत तृतीय वर्ग (लिपिक) कर्मचारी को विधायक अपना निजी सचिव बना सकते हैं। राघवजी जिसे अपना निजी सचिव रखना चाहते हैं, वह शिक्षक है और शिक्षण कार्य उनकी प्रार्थमिकता है। इसलिए उनकी मांग को पहले विदिशा कलेक्टर ने और बाद में सामान्य प्रशासन के अधिकारियों ने पूरा करने में इनकार कर दिया।
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पूर्व मंत्री ने इसके लिए पहले तो विदिशा कलेक्टर से कहा, फिर बात नहीं बनी तो सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों से भी मिले। लेकिन विभाग ने शिक्षक को पीए बनाने से इनकार कर दिया।
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जानकारी के मुताबिक राघवजी विदिशा में पदस्थ 38 साल के शिक्षक नरेश रघुवंशी को पीए बनवाना चाहते हैं। 39 दिन तक जेल में रहने के बाद जब वे जमानत पर छूटे तो हाल ही में रघुवंशी को लेकर जिला कलेक्टर से मिले थे।
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इसके बाद वे मंगलवार को रघुवंशी को साथ लेकर जीएडी के प्रमुख सचिव के सुरेश से मिलने पहुंचे थे। वे करीब आधा घंटे तक प्रमुख सचिव से रघुवंशी का आदेश जारी करने का आग्रह करते रहे, लेकिन प्रमुख सचिव ने इनकार कर दिया।
राघवजी ने पार्टी संगठन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि उन्हें भाजपा से निष्कासित करने में पार्टी के संविधान का ध्यान नहीं रखा गया।
क्यों नहीं मिल पा रहा है मनपसंद कर्मचारी
दरअसल, राघवजी मंत्री पद गंवाने के बाद से सिर्फ विधायक हैं। नियमों के तहत तृतीय वर्ग (लिपिक) कर्मचारी को विधायक अपना निजी सचिव बना सकते हैं। राघवजी जिसे अपना निजी सचिव रखना चाहते हैं, वह शिक्षक है और शिक्षण कार्य उनकी प्रार्थमिकता है। इसलिए उनकी मांग को पहले विदिशा कलेक्टर ने और बाद में सामान्य प्रशासन के अधिकारियों ने पूरा करने में इनकार कर दिया।
