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MP Panchayat Chunav: तन्खा का आरोप- OBC आरक्षण मामले में झूठ का षडयंत्र रच रही है भाजपा
Tue, 21 Dec 2021 04:45 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Tue, 21 Dec 2021 04:45 PM IST
सार
जबलपुर में कांग्रेस सांसद विवेक कृष्ण तन्खा ने पत्रकारों से बातचीत में भाजपा नेताओं पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि बदनाम करने वालों को कानूनी प्रकिया के तहत दंड दिलवाया जाएगा।
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मप्र पंचायत चुनाव: कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा पत्रकारों से बातचीत करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्खा ने कहा कि OBC आरक्षण मामले में भाजपा झूठ का षड्यंत्र रच रही है। सर्वोच्च न्यायाय द्वारा पूछे गए प्रश्नों पर सरकार खुद अपना पक्ष ठीक ढंग से नहीं रख पाई। ओबीसी आरक्षण मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मंत्री भूपेंद्र सिंह षड्यंत्र के तहत दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्हें दंडित किया जाना आवश्यक है। कांग्रेस पार्टी ने सदैव ही एसटी/एससी और ओबीसी वर्ग को महत्व दिया है।
तन्खा ने कहा कि भाजपा अवैधानिक तरीके से चुनाव करवाना चाहती थी। हम चाहते थे कि वैधानिक प्रकिया के तहत चुनाव करवाए जाए। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2021 में चुनाव में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं देने के संबंध में आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ भाजपा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील तक दायर नहीं की है। भाजपा के जिम्मेदार नेता व अधिकारी भली-भांति जानते थे कि वह अवैधानिक प्रकिया अपना रहे थे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में OBC के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव कराने पर लगी रोक के लिए भाजपा नेता झूठ का षड्यंत्र रचकर मुझे ट्रोल कर रहे हैं। उन्हें दंडित किया जाना और लोगों के सामने सच्चाई लाना आवश्यक है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा व मंत्री भूपेन्द्र सिंह को मानहानि के लिए दस करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। तीनों व्यक्ति माफी नहीं मांगते है और उनके खिलाफ कोर्ट में मानहानि का परिवाद दायर किया जाए। उन्होंने मेरे तथा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार किया है। इसके अलावा न्यायालय की कार्यवाही को गलत तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत किया। झूठ का षड्यंत्र रचने वाले को दंडित करना तथा लोगों के सामने सच्चाई लाना आवश्यक है।
कांग्रेस ने 1994 में दिया था सबसे पहले आरक्षण
तन्खा ने कहा कि 1994 में कांग्रेस पार्टी ने ही नगर पालिका तथा ग्राम पंचायत को संवैधानिक अधिकार प्रदान किया था। कांग्रेस पार्टी ने एसटी/एससी तथा ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिया था। ओबीसी वर्ग को 25 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई थी। इसके खिलाफ दायर याचिका में उन्होंने महाधिवक्ता के रूप में पक्ष रखा था। न्यायालय ने उक्त आरक्षण व्यवस्था को सही माना था। इसके बाद 2007 में महिला वर्ग के लिए आरक्षण 50% किया गया। कांग्रेस द्वारा लागू प्रक्रिया विगत 28 साल से प्रभावी रही।
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रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया
तन्खा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए कांग्रेस शासन काल के अध्यादेश को रद्द कर दिया। सरकार ने बिना परिसीमन व रोटेशन प्रकिया का पालन करते हुए 2014 के अनुसार पंचायत चुनाव करवाने का निर्णय लिया। यह पूरी तरह अवैधानिक था। यह जानकारी सभी संबंधित व्यक्तियों को थी। चुनाव प्रकिया में वैधानिक प्रकिया का पालन किया जाए, इसके लिए न्यायालय की शरण में गए थे। सर्वोच्च न्यायाय द्वारा पूछे गए प्रश्नों पर सरकार व चुनाव आयोग अपना पक्ष ठीक तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके कारण सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त आदेश जारी किए। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के परिप्रेक्ष्य की सही जानकारी सुप्रीम कोर्ट में सही तरीके से प्रस्तुत की जानी थी।
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तन्खा ने कहा कि भाजपा अवैधानिक तरीके से चुनाव करवाना चाहती थी। हम चाहते थे कि वैधानिक प्रकिया के तहत चुनाव करवाए जाए। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2021 में चुनाव में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं देने के संबंध में आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ भाजपा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील तक दायर नहीं की है। भाजपा के जिम्मेदार नेता व अधिकारी भली-भांति जानते थे कि वह अवैधानिक प्रकिया अपना रहे थे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में OBC के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव कराने पर लगी रोक के लिए भाजपा नेता झूठ का षड्यंत्र रचकर मुझे ट्रोल कर रहे हैं। उन्हें दंडित किया जाना और लोगों के सामने सच्चाई लाना आवश्यक है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा व मंत्री भूपेन्द्र सिंह को मानहानि के लिए दस करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा गया है। तीनों व्यक्ति माफी नहीं मांगते है और उनके खिलाफ कोर्ट में मानहानि का परिवाद दायर किया जाए। उन्होंने मेरे तथा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार किया है। इसके अलावा न्यायालय की कार्यवाही को गलत तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत किया। झूठ का षड्यंत्र रचने वाले को दंडित करना तथा लोगों के सामने सच्चाई लाना आवश्यक है।
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कांग्रेस ने 1994 में दिया था सबसे पहले आरक्षण
तन्खा ने कहा कि 1994 में कांग्रेस पार्टी ने ही नगर पालिका तथा ग्राम पंचायत को संवैधानिक अधिकार प्रदान किया था। कांग्रेस पार्टी ने एसटी/एससी तथा ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिया था। ओबीसी वर्ग को 25 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई थी। इसके खिलाफ दायर याचिका में उन्होंने महाधिवक्ता के रूप में पक्ष रखा था। न्यायालय ने उक्त आरक्षण व्यवस्था को सही माना था। इसके बाद 2007 में महिला वर्ग के लिए आरक्षण 50% किया गया। कांग्रेस द्वारा लागू प्रक्रिया विगत 28 साल से प्रभावी रही।
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रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया
तन्खा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए कांग्रेस शासन काल के अध्यादेश को रद्द कर दिया। सरकार ने बिना परिसीमन व रोटेशन प्रकिया का पालन करते हुए 2014 के अनुसार पंचायत चुनाव करवाने का निर्णय लिया। यह पूरी तरह अवैधानिक था। यह जानकारी सभी संबंधित व्यक्तियों को थी। चुनाव प्रकिया में वैधानिक प्रकिया का पालन किया जाए, इसके लिए न्यायालय की शरण में गए थे। सर्वोच्च न्यायाय द्वारा पूछे गए प्रश्नों पर सरकार व चुनाव आयोग अपना पक्ष ठीक तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाए। इसके कारण सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त आदेश जारी किए। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के परिप्रेक्ष्य की सही जानकारी सुप्रीम कोर्ट में सही तरीके से प्रस्तुत की जानी थी।
