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MP News: चीतों पर कांग्रेस पार्टी कंफ्यूज, कभी ले रहे क्रेडिट तो कभी बता रहे इंवेट
Sat, 17 Sep 2022 03:08 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 17 Sep 2022 03:08 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिवस पर नामीबिया से लाए चीतों को बाड़े में छोड़ दिया। भारत में 70 साल पहले चीतें विलुप्त हो गए थे। वहीं, चीता पुनर्स्थापन योजना को लेकर कांग्रेस कंफ्यूज दिख रही है। कांग्रेस नेता एक तरफ तो इसे इवेंट बता रही है। दूसरी तरफ चीता पुनर्स्थापन योजना का क्रेडिट भी ले रही है।
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चीता पुनर्स्थापन योजना को लेकर कांग्रेस कंफ्यूज
- फोटो : iStock
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विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस चीतों की पुनर्स्थापन योजना पर कंफ्यूज दिख रही है। एक तरफ कांग्रेस के नेता चीतों को लाने को इंवेट बता रहे है तो दूसरी तरफ इसका क्रेडिट भी ले रहे है। प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर चीतों के भारत में पुनर्स्थापन करने के कार्यक्रम पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि सरकार चीता इंवेट करा रही है। जबकि श्योपुर की सबसे बड़ी समस्या कुपोषण है। सरकार को चीता इवेंट करने की जगह कुपोषण को दूर करने के लिए कुछ करना चाहिए।
वहीं, दूसरी तरफ से कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हेंडल से ट्वीट किया कि प्रोजेक्ट चीता को मनमोहन सरकार में स्वीकृति मिली थी। इसके लिए 2008-09 में प्रस्ताव बना था। जिसके बाद तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश अफ्रीका के चीता आउट रीज सेंटर गए। लेकिन इस प्रोजेक्ट पर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इसके बाद 2020 में कोर्ट से रोक हट गई।
बता दें भारत में 1952 में चीतें विलुप्त हो गए थे। भारत में आखिरी बार चीता 1948 में देखा गया था। इसी वर्ष कोरिया राजा रामनुज सिंहदेव ने तीन चीतों का शिकार किया था। इसके बाद भारत में चीतों को नहीं देखा गया।
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वहीं, दूसरी तरफ से कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हेंडल से ट्वीट किया कि प्रोजेक्ट चीता को मनमोहन सरकार में स्वीकृति मिली थी। इसके लिए 2008-09 में प्रस्ताव बना था। जिसके बाद तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश अफ्रीका के चीता आउट रीज सेंटर गए। लेकिन इस प्रोजेक्ट पर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इसके बाद 2020 में कोर्ट से रोक हट गई।
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बता दें भारत में 1952 में चीतें विलुप्त हो गए थे। भारत में आखिरी बार चीता 1948 में देखा गया था। इसी वर्ष कोरिया राजा रामनुज सिंहदेव ने तीन चीतों का शिकार किया था। इसके बाद भारत में चीतों को नहीं देखा गया।
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