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MP News: 65 साल की फखरूनिशा की आयुष्मान आईडी नहीं खुलने से एक महीने से अटकी है कीमोथेरेपी
Sat, 12 Nov 2022 08:56 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 12 Nov 2022 08:56 PM IST
सार
भोपाल गैस राहत विभाग के जिम्मेदारों की मनमानी के कारण कैंसर पीड़ित मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। किसी की कीमो नहीं हो पा रही है तो किसी को जरूरी दवा और इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे। इसके चलते मरीज परेशान हो रहे है।
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गैस पीड़ितों को समय पर इलाज में आ रही दिक्कत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गैस राहत विभाग गैस पीड़ितों के इलाज में आयुष्मान कार्ड को अनिवार्य कर रहा है। इसके चलते एक कैंसर पीड़ित मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आयुष्मान कार्ड बनाने के बावजूद कम्प्यूटर पर आईडी नहीं खुलने से अस्पताल इलाज से मना कर रहे हैं तो किसी का महंगी दवा और इंजेक्शन नहीं मिल रहे। जबकि गैस पीड़ितों के बीच में काम करने वाले संगठनों का कहना है कि गैस पीड़ितों के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड की जरूरत ही नहीं है। वहीं, जिम्मेदार इलाज नहीं मिलने के आरोपों को नकार रहे हैं। ऐसे ही कुछ लोगों से अमर उजाला ने बात की, तो आधिकारिक दावों की हकीकत सामने नजर आई।
एक महीने से अटकी है कीमो
65 साल की फखरूनिशा को ब्रेस्ट कैंसर है। इब्राहिम पुरा में अकेली रहती हैं। पति की एक साल पहले मौत हो गई है। बेटी की शादी हो गई है। उम्र ज्यादा होने और बीमारी के कारण बात करने में दिक्कत भी होती है। बेटी के नहीं होने पर उनकी पड़ोसी अन्नू अस्पताल लेकर जाती है। अन्नू ने बताया कि उनका पहले से गैस राहत विभाग से इलाज हो रहा था। अब उन्होंने आयुष्मान योजना से इलाज कराने का कह दिया। इसके लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाया गया, लेकिन एक महीने से उनकी आयुष्मान आईडी नहीं खुल रही है। अस्पताल में बताया गया कि उनके फिंगर प्रिंट मशीन नहीं ले रही। उनकी कीमोथेरेपी होना थी, लेकिन अस्पताल ने आईडी नहीं खुलने के कारण इलाज करने से मना कर दिया है। इसके चलते हम लोग परेशान हो रहे हैं।
एक साल में चार बार इलाज अटका
50 वर्षीय अरविंद चतुर्वेदी को ब्लड का कैंसर है। वे गोविंदपुरा में रहते हैं। गैस राहत विभाग से कैंसर का इलाज चल रहा है। उनको माइलो फाब्रोसिस बीमारी में हर 15 दिन में दो यूनिट ब्लड चढ़ता है और दवा और इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। अरविंद ने बताया कि गैस राहत विभाग में हर बार उनसे नया डॉक्यूमेंट मांगा जा रहा है। अब उनसे एपीएल कार्ड बना कर मांगा जा रहा है। पिछले एक साल में उनका चार बार इलाज रुक गया है।
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जानकारी नहीं देने से पांच दिन बाद हुई कीमो
40 वर्षीय ज्योति के दो बच्चे हैं। पति की पांच साल पहले अटैक से मौत हो चुकी। उनको फोर्थ स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है। ज्योति ने बताया कि उनका 13 साल का बेटा ही उनके लिए भाग दौड़ करता है। आयुष्मान कार्ड नहीं होने से गैस राहत विभाग ने उनके कीमो का एस्टेमेट में आपत्ति लगा दी, जिसकी जानकारी भी नहीं दी। इस वजह से 5 नवंबर को होने वाली कीमो 10 नवंबर को हुई। आयुष्मान कार्ड बनाने वालों का कहना है कि राशन कार्ड के तीन माह के उपयोग के बाद ही आयुष्मान पोर्टल पर आईडी जनरेट हो पाएगी।
आयुष्मान में बैग कवर नहीं होता
44 वर्षीय को नाहिदा जिंसी में परिवार के साथ रहती है। उनके पति ताहीर ऑटो चलाते हैं। नाहिदा को रेक्टल कैंसर है। जिसका जनवरी 2022 में ऑपरेशन हुआ। जिसके बाद मल त्याग के लिए उनके पेट पर बैग लगाया है। ताहीर ने बताया कि बैग को चार दिन में बदलना पड़ता है। गैस राहत विभाग से इलाज के समय बैग अस्पताल से चार से पांच मिल जाते थे। आयुष्मान कार्ड में इलाज के दौरान बैग देने से मना कर दिया। फिर दोबारा गैस राहत के अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद उन्होंने भोपाल मेमोरियल अस्पताल भेजा । वहां स्टमक बैग बदलवाने के लिए 8 से 10 दिन में बुलाते हैं। बाजार में 1 हजार रुपये में बैग आता है। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बाजार से खरीद पाऊं।
इलाज की यह अवस्था होती
गैस राहत विभाग की तरफ से गैस पीड़ितों के इलाज का एस्टीमेट तैयार कराया जाता है, जिसके लिए आवेदन लिया जाता था इसे फिर विभाग स्वीकृत कर अस्पताल को भेज देता है। अस्पताल स्वीकृत बजट के अनुसार इलाज, जांच और दवा मरीजों को उपलब्ध कराते हैं।
गैस पीड़ितों का आयुष्मान कार्ड से कोई लेना-देना नहीं
गैस पीड़ितों के लिए काम मरने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा का कहना है कि गैस पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बहुत साफ है। गैस पीड़ितो के जीने के अधिकार से उनके इलाज का अधिकार को जोड़ा गया है। जिसमें गैस राहत विभाग की जिम्मेदारी है कि वह गैस पीड़ितो को सही और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करे। उन्हें सिर्फ गैस पीड़ित होने के प्रमाण से मतलब होना चाहिए। गैस पीड़ितों के इलाज के लिए ये बीपीएल कार्ड, एपीएल कार्ड, आयुष्मान कार्ड से कोई लेना देना नहीं है। यह तो सिर्फ गैस राहत विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। इस अव्यवहारिक आयुष्मान नीति की वजह से गैस पीड़ितों को इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, सर्जरी और कीमो रोकी जा रही है और कई तो मरने की कगार पर है।
जिम्मेदार बोले- हम किसी का इलाज नहीं रोकते
भोपाल गैस राहत के सीएमओ एसके राजूपत का कहना है कि आवेदन के अनुसार दस्तावेजों की जांच की जाती है। दस्तावेज नहीं होने पर मंगाए जाते हैं। किसी का इलाज नहीं रोका जाता। इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
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एक महीने से अटकी है कीमो
65 साल की फखरूनिशा को ब्रेस्ट कैंसर है। इब्राहिम पुरा में अकेली रहती हैं। पति की एक साल पहले मौत हो गई है। बेटी की शादी हो गई है। उम्र ज्यादा होने और बीमारी के कारण बात करने में दिक्कत भी होती है। बेटी के नहीं होने पर उनकी पड़ोसी अन्नू अस्पताल लेकर जाती है। अन्नू ने बताया कि उनका पहले से गैस राहत विभाग से इलाज हो रहा था। अब उन्होंने आयुष्मान योजना से इलाज कराने का कह दिया। इसके लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाया गया, लेकिन एक महीने से उनकी आयुष्मान आईडी नहीं खुल रही है। अस्पताल में बताया गया कि उनके फिंगर प्रिंट मशीन नहीं ले रही। उनकी कीमोथेरेपी होना थी, लेकिन अस्पताल ने आईडी नहीं खुलने के कारण इलाज करने से मना कर दिया है। इसके चलते हम लोग परेशान हो रहे हैं।
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एक साल में चार बार इलाज अटका
50 वर्षीय अरविंद चतुर्वेदी को ब्लड का कैंसर है। वे गोविंदपुरा में रहते हैं। गैस राहत विभाग से कैंसर का इलाज चल रहा है। उनको माइलो फाब्रोसिस बीमारी में हर 15 दिन में दो यूनिट ब्लड चढ़ता है और दवा और इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। अरविंद ने बताया कि गैस राहत विभाग में हर बार उनसे नया डॉक्यूमेंट मांगा जा रहा है। अब उनसे एपीएल कार्ड बना कर मांगा जा रहा है। पिछले एक साल में उनका चार बार इलाज रुक गया है।
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जानकारी नहीं देने से पांच दिन बाद हुई कीमो
40 वर्षीय ज्योति के दो बच्चे हैं। पति की पांच साल पहले अटैक से मौत हो चुकी। उनको फोर्थ स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है। ज्योति ने बताया कि उनका 13 साल का बेटा ही उनके लिए भाग दौड़ करता है। आयुष्मान कार्ड नहीं होने से गैस राहत विभाग ने उनके कीमो का एस्टेमेट में आपत्ति लगा दी, जिसकी जानकारी भी नहीं दी। इस वजह से 5 नवंबर को होने वाली कीमो 10 नवंबर को हुई। आयुष्मान कार्ड बनाने वालों का कहना है कि राशन कार्ड के तीन माह के उपयोग के बाद ही आयुष्मान पोर्टल पर आईडी जनरेट हो पाएगी।
आयुष्मान में बैग कवर नहीं होता
44 वर्षीय को नाहिदा जिंसी में परिवार के साथ रहती है। उनके पति ताहीर ऑटो चलाते हैं। नाहिदा को रेक्टल कैंसर है। जिसका जनवरी 2022 में ऑपरेशन हुआ। जिसके बाद मल त्याग के लिए उनके पेट पर बैग लगाया है। ताहीर ने बताया कि बैग को चार दिन में बदलना पड़ता है। गैस राहत विभाग से इलाज के समय बैग अस्पताल से चार से पांच मिल जाते थे। आयुष्मान कार्ड में इलाज के दौरान बैग देने से मना कर दिया। फिर दोबारा गैस राहत के अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद उन्होंने भोपाल मेमोरियल अस्पताल भेजा । वहां स्टमक बैग बदलवाने के लिए 8 से 10 दिन में बुलाते हैं। बाजार में 1 हजार रुपये में बैग आता है। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बाजार से खरीद पाऊं।
इलाज की यह अवस्था होती
गैस राहत विभाग की तरफ से गैस पीड़ितों के इलाज का एस्टीमेट तैयार कराया जाता है, जिसके लिए आवेदन लिया जाता था इसे फिर विभाग स्वीकृत कर अस्पताल को भेज देता है। अस्पताल स्वीकृत बजट के अनुसार इलाज, जांच और दवा मरीजों को उपलब्ध कराते हैं।
गैस पीड़ितों का आयुष्मान कार्ड से कोई लेना-देना नहीं
गैस पीड़ितों के लिए काम मरने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा का कहना है कि गैस पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बहुत साफ है। गैस पीड़ितो के जीने के अधिकार से उनके इलाज का अधिकार को जोड़ा गया है। जिसमें गैस राहत विभाग की जिम्मेदारी है कि वह गैस पीड़ितो को सही और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करे। उन्हें सिर्फ गैस पीड़ित होने के प्रमाण से मतलब होना चाहिए। गैस पीड़ितों के इलाज के लिए ये बीपीएल कार्ड, एपीएल कार्ड, आयुष्मान कार्ड से कोई लेना देना नहीं है। यह तो सिर्फ गैस राहत विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। इस अव्यवहारिक आयुष्मान नीति की वजह से गैस पीड़ितों को इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, सर्जरी और कीमो रोकी जा रही है और कई तो मरने की कगार पर है।
जिम्मेदार बोले- हम किसी का इलाज नहीं रोकते
भोपाल गैस राहत के सीएमओ एसके राजूपत का कहना है कि आवेदन के अनुसार दस्तावेजों की जांच की जाती है। दस्तावेज नहीं होने पर मंगाए जाते हैं। किसी का इलाज नहीं रोका जाता। इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
