MP News: कागजों में करीब 50 लोग मृत घोषित, जिंदा साबित करने के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे, हैरान कर देगा मामला
मध्यप्रदेश में विदिशा जिले की एक पंचायत में 40 से अधिक जिंदा लोगों को कागजों में मरा घोषित कर दिया गया। एसपीआर पोर्टल सवालों के घेरे में है और जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।
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हाल ही में शिवपुरी जिले में 26 जिंदा लोगों को मृत बताकर उनके कफन-दफन की अनुग्रह राशि हड़पे जाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि विदिशा जिले की कुरवाई क्षेत्र की ग्राम पंचायत खजुरिया जागीर में भी जिंदा इंसानों को मरा घोषित कर देने का एक बड़ा मामला सामने आया है। विदिशा की ग्राम पंचायत खजुरिया जागीर में पंचायत के 40 से अधिक लोग, जो अभी भी जीवित और स्वस्थ हैं, उन्हें एसपीआर पोर्टल से मृत घोषित कर दिया गया है। हालांकि, ऐसा करके वहां शासन को किसी प्रकार का चूना तो नहीं लगाया गया है, इसकी तस्दीक की जा रही है।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब पांच लोगों ने इस बाबत शिकायत की कि उन्हें मृत बता दिया गया है। पोर्टल का रिकॉर्ड खंगाला गया तो ऐसे 40 से अधिक लोगों के नाम सामने आए हैं, जो जीवित हैं और पोर्टल में मार दिए गए हैं। इधर, ग्राम पंचायत की सरपंच वर्षा राजपूत ने इस पूरे कांड को उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास करार दिया है। उन्होंने जनपद सीईओ और थाना प्रभारी को दी गई शिकायत में कहा है कि ग्राम पंचायत के एसपीआर पोर्टल पर पिछले कुछ दिनों से किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत प्रवेश किया गया है। साथ ही पंचायत के डेटा से छेड़छाड़ की गई और कुछ जिंदा लोगों को मरा बताया गया है।
पंचायत सचिव की होती है बड़ी जिम्मेदारी, फिर चूक कैसे?
मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण आईडी पासवर्ड सहित एसपीआर पोर्टल की समस्त जानकारी पंचायत सचिव तथा जहां पंचायत सचिव नहीं होते वहां रोजगार सहायकों के पास यह आईडी पासवर्ड होते हैं। उसी महत्वपूर्ण आईडी पासवर्ड से इस तरह का फेर बदल किया जा सकता है। दरअसल, खजुरिया जागीर की वर्षा राजपूत सरपंच होने के साथ-साथ बीजेपी महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनैतिक द्वेष के चलते यह विरोधियों द्वारा की गई कारस्तानी है, जिसमें सरपंच का कोई रोल नहीं होता।
जिंदा साबित करने में होती है बहुत परेशानी, दर-दर भटकते हैं जिंदा लोग...
विगत दिनों पहले विदिशा जिले की जनपद पंचायत लटेरी के ग्राम पंचायत उनारसीकला निवासी 27 साल की गर्भवती महिला शुशीला बाई को मृत घोषित कर दिया गया था। उसके कारण वह मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से वंचित रह गई, जो आज भी अपने जिंदा होने की आशा में दर-दर भटक रही है। सरकारी कार्यप्रणाली ऐसी ही है कि यदि कोई व्यक्ति कागजों में मृत घोषित हो जाए, तो फिर उसे खुद के जिंदा होने की बात साबित करने के लिए ऐड़ी से चोटी का जोर लगाना पड़ता है। कई बार तो इस काम में एक अरसा भी बीत जाता है, लेकिन कागजों में मरा व्यक्ति जिंदा नहीं हो पाता।
विदिशा सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का गृह जिला माना जाता है। हालात यह हैं कि विधानसभा चुनाव सिर पर है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था की बात की जाए तो सरकारी सिस्टम में बैठे लोग मानो शिवराज सरकार की छबि को धूमिल करने पर उतारू हैं। लिहाजा जिले के कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने इस मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
