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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP: five girl left school because of toilet

एमपीः स्कूल में शौचालय न होने के चलते छात्राओं ने छोड़ी पढ़ाई

Fri, 01 Jul 2016 05:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Jul 2016 05:44 PM IST
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MP: five girl left school because of toilet

ऐसे में जब केंद्र की मोदी सरकार शौचालयों को लेकर देशभर में बड़ा अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने में लगी है तब मध्यप्रदेश के सतना जिले का एक प्राइमरी स्कूल इस सारी कवायद पर सवाल खड़ा कर रहा है। स्कूल की पांच छात्राओं ने शौचालय न होने के विरोध में स्कूल आना छोड़ दिया है। 

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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार यह साहसिक कदम उठाया है कक्षा आठ की छात्रा सीमा पटेल, वंदन वर्मा, गीतांजलि चतुर्वेदी, शिवा कुमारी और शिवांशी ने। सतना जिले की इन पांच छात्राओं ने भीष्मपुर गांव के गर्वनमेंट हायर सेंकेंडरी स्कूल में आना छोड़ दिया है। 
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भीष्मपुर ग्राम पंचायत के सदस्य वीरेन्द्र कुमार पटेल ने बताया‌ कि इनकी देखादेखी कई अन्य छात्राएं भी टॉयलेट न होने के कारण स्कूल छोड़ने का मन बना रही हैं। उन्होंने बताया कि छात्राएं इस स्कूल की बजाय जिले के अमरपाटन कस्बे के स्कूल में एडमिशन लेना चाहती हैं, जो गांव से बीस किलोमीटर दूर है। 
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वहीं स्कूल छोड़ने वाली एक छात्रा सीमा पटेल ने आरोप लगाया कि स्कूल में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय है, लेकिन अपने निर्माण के बाद से ही उस पर पिछले सालभर से ताला लटका हुआ है। 

सीमा बताती है कि इसके चलते टॉयलेट के लिए हमें स्कूल के बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसकी जानकारी शिक्षकों और अन्य अधिकारियों को भी है लेकिन कोई कुछ भी करने के लिए तैयार नहीं है। मैं अब इस स्कूल में और नहीं पढ़ सकती इसलिए अमरपाटन के स्कूल में एडमिशन लूंगी। 

स्कूल के शौचालय में लटका है ताला

MP: five girl left school because of toilet
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वहीं एक अन्य छात्रा गीताजंलि ने बताया कि हमारे पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है, वहां पढ़ाई के दौरान हमारे पास केवल दो ही विकल्प हैं या तो हम अस्‍थाई शौचालय का प्रयोग करें जिसमें पानी जैसी सुविधा भी नहीं है या फिर खुले में शौच के लिए जाएं।

इन दोनों छात्राओं का साथ देने वाली गढ़ टोला गांव की वंदना वर्मा का कहना है कि शौचालय न होने की वजह से हमें खुले में शौच के ‌लिए जाना पड़ता है जिसकी वजह से हमें और हमारे परिवार की शर्मिदंगी का सामना करना पड़ता है। मैं अब या तो प्राइवेट पढ़ाई करूंगी या किसी और स्कूल में पढ़ने जाऊंगी।

भीष्मपुर ग्राम पंचायत के सदस्य वीरेन्द्र पटेल कहते हैं कि यह स्कूल अकेला सरकारी स्कूल है जिसमें पांच छह गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल में 400 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं जिनमें से 75 फीसदी से ज्यादा छात्राएं हैं। 

वहीं जब इस संबंध में मीडिया ने स्कूल प्रधानाचार्य अमित मिश्रा ने छात्राओं के स्कूल छोड़ने की खबर को गलत बताया। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया स्कूल में फिलहाल स्‍थायी शौचालय नहीं है। मैंने यह स्कूल प्रधानाचार्य के तौर पर सितंबर 2015 में ज्वाइन किया था। मुझसे पहले वाले प्रधानाचार्य ने बताया था कि यह स्कूल के शौचालय के निर्माण का काम अधूरा है अभी उसमें पानी का टैंक नहीं लगा है इसलिए उसमें ताला लगाकर रखा गया है।

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