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MP Election: भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सिंगरौली में हवा बनी हुई है जहरीली, इंदौर में भी प्रदूषण ने बढ़ाई मुसीबत

Wed, 22 Nov 2023 09:20 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 22 Nov 2023 09:20 PM IST
सार

राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सिंगरौली में हवा की गुणवत्ता लगातार दमघोंटू होती जा रही है। इंदौर की हवा भी खराब श्रेणी में बनी हुई है। 

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MP Election: Air remains poisonous in Bhopal, Jabalpur, Gwalior, Singrauli, pollution increases problems in In
मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और सिंगरौली की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। यहां एक्यूआई 300 के पार पहुंच गया। वहीं, इंदौर में खराब श्रेणी में बना हुआ है। बुधवार को भोपाल में कलेक्टर ऑफिस के पास एक्यूआई 309, ग्वालियर में 322, जबलपुर में 318, सिंगरौली में  317 दर्ज किया गया। इंदौर में 276 दर्ज किया गया। भोपाल में एक्यूआई बढ़ने का कारण विकास कार्यों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तरफ से जारी निर्देशों का पालन नहीं होना बढ़ा कारण है। भोपाल के कोलान में 6 लेन निर्माण में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा मेट्रो प्रोजेक्ट, खस्ताहाल सड़कें, वाहनों का प्रदूषण और खेतों में पराली जलाना बढ़ा कारण है। भोपाल में कई जगह कचरे में खुले में आग लगाई जा रही है। दूसरी तरफ कार्रवाई के नाम तंदूर पर खाने बनाने पर कार्रवाई की जा रही है। जबकि कचरे में आग लगाने के मामले में मॉनीटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। यह भी प्रदूषण का एक बढ़ा कारण है। 
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भोपाल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ब्रजेश मिश्रा ने कहा कि भोपाल में प्रदूषण रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों में ग्रीन नेट नहीं लगाने पर पेनाल्टी, कचरा जलाने पर स्पॉट फाइन किया जा रहा है। वहीं, प्रदूषण रोकने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मशीनों से पानी का छिड़काव, सड़क की मैकेनिकल मशीन से सफाई की जा रही है। मिश्रा ने कहा कि ठंड के मौसम में नमी के कारण बारीक कण नीचे रहते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। 
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वहीं, पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडे का कहा है कि भोपाल में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण कंस्ट्रक्शन वर्क बड़ा कारण है। कोलार 6 लेन में केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। गाइडलाइन के अनुसा धूल के कण को उड़ने से रोकने के लिए स्प्रिंकलर का छिड़काव करने के लिए 200 मीटर पर मशीन लगाना है। इसके अलावा निर्माण कार्य पर धूल के कण को रोकने के लिए ग्रीन नेट से निर्माणाधीन बिल्डिंग को ढंक कर रखना है, लेकिन इसका कहीं कोई पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि भोपाल में 30 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों के कारण भी है।
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