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Teacher Recruitment Scam: आरक्षित कोटे में फर्जी दस्तावेजों से हासिल की नौकरी, 77 शिक्षकों पर मामला दर्ज

Thu, 22 Jun 2023 04:09 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 22 Jun 2023 04:09 PM IST
सार

मुरैना में फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनाकर शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले में 77 शिक्षकों पर केस दर्ज किया गया है। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है, क्योंकि माना जा रहा है कि शिक्षकों के बाद अब अगली कार्रवाई विभागीय अधिकारियों के खिलाफ होने वाली है।

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Teacher Recruitment Scam: Jobs obtained with fake documents, case registered against 77 teachers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के मुरैना में 77 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की थी। इनका जिला अस्पताल में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने केस दर्ज करवाया है। 
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बता दें कि प्रदेश में व्यापमं घोटाले की आंच अभी ठीक तरह से ठंडी भी नहीं हो पाई है कि अब शिक्षक भर्ती घोटाले ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। इस बड़े घोटाले में चम्बल संभाग पूरे मध्य प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहां पर 450 अभ्यर्थियों ने फर्जी विकलांगता पत्र के सहारे आरक्षित कोटे में नौकरी हासिल की है। जब यह मामला मुरैना जिले कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होंने तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी एके पाठक को जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान प्रारंभ में 5 शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक-एक कर अन्य फाइलें उठाई तो 77 शिक्षकों के विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इनका जिला अस्पताल में कोई रिकॉर्ड तक नहीं मिला है। 
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कोतवाली थाना प्रभारी ने जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर 77 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जिन शिक्षकों पर मामला दर्ज किया गया है। उनमें से प्रमुख रूप से अनिरुद्ध शर्मा निवासी चिंनौनी, अनिल शर्मा निवासी नैनागढ़ रोड, हरिओम धाकड़ निवासी सुजानगढ़ी, पवन त्यागी निवासी जैतपुर, सोनू त्यागी निवासी बघेल, नागेंद्र सिंह निवासी एमएस रोड जौरा, विनोद शर्मा निवासी जौरा, सौरभ भदौरिया निवासी मुरैना तथा सतीश धाकड़ सहित 77 शिक्षकों के नाम हैं। इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है, क्योंकि शिक्षकों के बाद अब अगली कार्रवाई विभागीय अधिकारियों के खिलाफ होने वाली है। यह पूरा फर्जीवाड़ा अधिकारियों की मिलीभगत से होना बताया जा रहा है। यही वजह है कि जॉइनिंग के समय अधिकारियों ने उनके मूल दस्तावेजों का वेरिफिकेशन नहीं करवाया था।
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मामले में उन डॉक्टरों को भी संदेह के घेरे में लाया जा रहा है जिनके फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर हैं या फिर सील लगी हुई है। साथ ही इस मामले में यह भी सवाल उठा रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर ये फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बने कैसे, इसको लेकर भी जांच होना बेहद आवश्यक है।
 
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