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मध्यप्रदेश में बारिश ने मचाई भारी तबाही, अबतक 10 हजार करोड़ की संपत्ति का नुकसान

Tue, 17 Sep 2019 09:22 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Trainee Trainee Updated Tue, 17 Sep 2019 09:22 AM IST
सार

  • बारिश के बाद दुकानें खुली, दुकान में अनाज पूरी तरह बर्बाद हो चुका है
  • बाढ़ के चलते राहत शिविरों में 20 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं
  • बाढ़ के कारण 10 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है

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Madhya Pradesh flood loss of property worth 10 thousand crores in the state so far
मध्यप्रदेश में बाढ़ - फोटो : PTI

विस्तार

मध्यप्रदेश के मंदसौर में सोमवार को बारिश थम गई और साथ ही पानी भी कम होने लगा, लेकिन बीते तीन दिन में हुई भारी बारिश से बांध को कितना नुकसान हुआ है, यह जांचने के लिए मंगलवार को केंद्र से एक विशेषज्ञ दल मध्यप्रदेश आएगा। 

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दरअसल, सोमवार को पूरे दिन बांध में दरार पड़ने की खबरें आती रहीं। जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. गोपाल रेड्डी ने कहा कि बांध पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि पहली बार डैम में 2006 के बाद इतना पानी आया है, इसलिए हमने बांध की जांच के लिए केंद्र से विशेषज्ञ दल भेजने का आग्रह किया था।
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दूसरी तरफ, मंदसौर में दो दिन जलमग्न रहे बाजारों से पानी उतरना शुरू हो गया है। व्यापारियों ने जब अपनी-अपनी दुकानें खोलीं तो उसमें रखा सारा सामान बर्बाद मिला। 

पानी की वजह से मंडी में 50 किलो के शक्कर के कट्टे 20 किलो के ही रह गए, वहीं चाय की पत्ती ने अपना रंग ही छोड़ दिया। बाढ़ की वजह से 20 हजार लोग अब भी राहत शिविरों में है। कई गांवों में अब भी पानी भरा हुआ है। 

वहीं मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले में चंबल किनारे के करीब सौ गांवों में बाढ़ से हालात बेकाबू हो गए। मुरैना में चंबल राजघाट स्थित पुराने पुल से पानी 5 फीट ऊपर यानी 143.90 मीटर पर बह रहा था।

बारिश से 10 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है

इस बार मध्यप्रदेश में औसत से 33% अधिक बारिश हुई है। बारिश से अभी तक आठ हजार करोड़ की फसल और 1800 से दो हजार करोड़ रु. की सड़क, मकान आदि का नुकसान हुआ है। 

अगर कुल मिलाकर देखें तो 10 हजार करोड़ की नुकसान सामने आया है। इस आंकड़े में बढ़ोतरी भी हो सकती है। मंगलवार तक इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी, ताकि केंद्र की तरफ से राहत राशि मिल सके। मुख्य सचिव सीएस मोहंती ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी।

पशुपतिनाथ मंदिर में तीन दिन से पट बंद, बाबा को न भोग लगा, न आरती हुई

बाढ़ के चलते मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शनिवार को मंदिर में प्रतिमा जलमग्न होने के बाद से यहां सफाई का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में तीन दिनों से न भोग लगाया गया है, न किसी समय की आरती की गई। पट तीन दिनों से बंद हैं।

वहीं, सोमवार को भी गांधी सागर बांध के सभी 19 गेट खुले रहे। लेकिन धीरे-धीरे बांध का जलस्तर कम होता जा रहा है। शाम तक यह 1318 से घटकर 1314 फीट रह गया। 

शनिवार शाम तक बांध का वाटर लेवल 1318 दर्ज किया गया था। इसके बाद बांध में पानी की आवक करीब सवा लाख क्यूसेक ही हो रही है। बांध से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, मंगलवार को बांध के गेट बंद किए जा सकते हैं।

सितंबर के अंत से सारी सड़के सुधारी जाएंगी

मुख्य सचिव मोहंती ने कहा है कि सभी सड़कों के सुधार का काम सितंबर के अंत तक शुरू हो जाएगा जिसे नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। सरकार की फसल बीमा के लिए इस बार 31 लाख से ज्यादा किसानों ने पंजीकरण कराया है। सरकार प्रीमियम का 509 करोड़ जमा कर रही है। अभी तक 57 हजार किसानों का क्लेम आ चुका है। 

शिवराज बोले- केंद्र ने 1 हजार करोड़ दिए, बाद में बयान से मुकरे

बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के मामले में सियासत गर्म हो गई है। सोमवार को पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर में कहा कि केंद्र ने बाढ़ राहत कोष में 1000 करोड़ रु. दिए हैं। दोपहर में ही वे इस बात से मुकर गए। उनसे जब केंद्र सरकार द्वारा राहत राशि दिए जाने पर सवाल किया तो उन्होंने कुछ भी जवाब नहीं दिया। 

वहीं, कलेक्टर मनोज पुष्प ने इस तरह की किसी राशि की घोषणा होने या फिर राहत कोष में आने जैसी जानकारी होने से इनकार कर दिया। इधर, जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र से शिवराज के इशारे पर राज्य आपदा कोष में 310 करोड़ रुपए नहीं दिए हैं।

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