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इंटरव्यू: एमपी के पूर्व मंत्री जीतू पटवारी का शिवराज पर हमला, कहा- वैचारिक रूप से वृद्ध हो गए हैं मुख्यमंत्री
Wed, 30 Mar 2022 05:34 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 30 Mar 2022 05:34 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है। पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान को वैचारिक रूप से वृद्ध बताया है। साथ ही बीजेपी की नीतियों पर भी सवाल उठाए है।
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पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार चारों ओर से घिर गई है। कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्ती परीक्षा में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। इस पर पटवारी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को वैचारिक रूप से वृद्ध बताया है। साथ ही भाजपा सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं।
कर्मचारी चयन बोर्ड ने सफाई दे दी है। इसके बाद भी आपको प्राथमिक शिक्षा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी क्यों नजर आ रही है?
पटवारीः आरोप क्यों नहीं लगेंगे... एक उम्मीदवार सुबह क्वालिफाई होता है और शाम को डिस्क्वालिफाई हो जाता है। एक उम्मीदवार कहता है कि उससे 5 लाख रुपए मांगे गए। प्रश्नपत्र मोबाइल पर आ जाता है। परीक्षा में 12 लाख लोग आवेदन करते है और सिर्फ 7 लाख लोग परीक्षा में बैठते हैं। इससे साफ है कि यह तैयारी की गई कि किसे पास करना है, किसका चयन करना है। गरीब मां-बाप आशा से बैठे हैं कि उनका बेटा आरक्षक बनेगा। यह व्यापमं-3.0 हुआ है। परीक्षा के नाम पर 100 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए और सत्ता-सुख भोगा जा रहा है। यह शिवराज की नीति बन गई है।
परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप झूठे थे और उस पर एफआईआर भी दर्ज हुई है। क्या आप अब भी उस पर सवाल उठाएंगे?
पटवारीः एफआईआर तो गड़बड़ी की जांच कराने की मांग पर की गई है। कांग्रेसी डरते नहीं है। वे अपना धर्म को निभाते रहेंगे। यह बिल्ली की आंखों से शेरों को डराने वाली बात है। शेर कोई डरता है क्या? इस मामले में मुख्यमंत्री तत्काल परीक्षा परिणाम की जांच के आदेश दें। इसके लिए गैर-व्यापमं के अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों की समिति बनाई जाए और रेलवे की भर्ती परीक्षा की तरह अभ्यर्थी से आपत्ति ली जाए और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
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शिवराज कैबिनेट पचमढ़ी में थी और उसने चुनाव का रोडमैप तैयार किया है। इस पर कांग्रेस की क्या तैयारी है?
पटवारीः शिवराज कहते है कि प्रदेश को समद्ध बनाएंगे। रोजगारोन्मुखी बनाएंगे। माताओं की रक्षा करेंगे। आज ही प्रदेश में गैंगरेप हो गया। मैं कहता हूं कि लोगों को मुर्ख बनाया जा रहा है। जनता के पैसे उड़ाए जा रहे है। शिवराज सिंह चौहान वैचारिक रूप से वृद्ध हो चुके हैं। उनके पास न कोई नया आइडिया है, न कोई नया सॉल्युशन है। न कोई नया सुझाव है, न कोई नया समाधान है। वे सिर्फ पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर पुराने झूठ नए सिरे से दोहरा रहे है। शिवराज सिंह ने 17 साल में प्रदेश को क्या दिया हैय़ एक भी पैरामीटर पर सफल नहीं हुए। प्रदेश कर्ज में डूब गया। रोजगार देने की बजाय लाखों बेरोजगार हो गए।
प्रदेश में निवेश और रोजगार के लिए सरकार नवंबर में प्रदेश में इंवेस्टर्स समिट आयोजित करने जा रही है। क्या यह सफल होगा?
पटवारीः इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने कितनी समिट की है? कितनी सफल हुई है? क्या बच्चों को रोजगार मिल पाया? मध्य प्रदेश के जितने उद्योग आए, उससे ज्यादा घट गए। समिट के नाम पर सिर्फ पैसों और जमीन की लूट हुई है। 20 साल की सरकार को समिट करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। निवेश को सीधे लाना चाहिए। भीड़ करने की क्या आवश्यकता है। ऐसी मेरी सरकार से अपेक्षा है।
प्रदेश की नई शराब नीति एक अप्रैल से लागू हो रही है। आप उसे कैसे देखते हैं?
पटवारीः शिवराज सिंह प्रदेश को रोजगार नहीं दे पाए। समद्ध नहीं कर पाए। नई शराब नीति कहती है कि खूब शराब पियो, परिवहन और भंडारण करके रख लो। नशे में रहो। हम रोजगार नहीं दे सकते। नशा दे सकते हैं।
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कर्मचारी चयन बोर्ड ने सफाई दे दी है। इसके बाद भी आपको प्राथमिक शिक्षा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी क्यों नजर आ रही है?
पटवारीः आरोप क्यों नहीं लगेंगे... एक उम्मीदवार सुबह क्वालिफाई होता है और शाम को डिस्क्वालिफाई हो जाता है। एक उम्मीदवार कहता है कि उससे 5 लाख रुपए मांगे गए। प्रश्नपत्र मोबाइल पर आ जाता है। परीक्षा में 12 लाख लोग आवेदन करते है और सिर्फ 7 लाख लोग परीक्षा में बैठते हैं। इससे साफ है कि यह तैयारी की गई कि किसे पास करना है, किसका चयन करना है। गरीब मां-बाप आशा से बैठे हैं कि उनका बेटा आरक्षक बनेगा। यह व्यापमं-3.0 हुआ है। परीक्षा के नाम पर 100 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए और सत्ता-सुख भोगा जा रहा है। यह शिवराज की नीति बन गई है।
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परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप झूठे थे और उस पर एफआईआर भी दर्ज हुई है। क्या आप अब भी उस पर सवाल उठाएंगे?
पटवारीः एफआईआर तो गड़बड़ी की जांच कराने की मांग पर की गई है। कांग्रेसी डरते नहीं है। वे अपना धर्म को निभाते रहेंगे। यह बिल्ली की आंखों से शेरों को डराने वाली बात है। शेर कोई डरता है क्या? इस मामले में मुख्यमंत्री तत्काल परीक्षा परिणाम की जांच के आदेश दें। इसके लिए गैर-व्यापमं के अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों की समिति बनाई जाए और रेलवे की भर्ती परीक्षा की तरह अभ्यर्थी से आपत्ति ली जाए और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
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शिवराज कैबिनेट पचमढ़ी में थी और उसने चुनाव का रोडमैप तैयार किया है। इस पर कांग्रेस की क्या तैयारी है?
पटवारीः शिवराज कहते है कि प्रदेश को समद्ध बनाएंगे। रोजगारोन्मुखी बनाएंगे। माताओं की रक्षा करेंगे। आज ही प्रदेश में गैंगरेप हो गया। मैं कहता हूं कि लोगों को मुर्ख बनाया जा रहा है। जनता के पैसे उड़ाए जा रहे है। शिवराज सिंह चौहान वैचारिक रूप से वृद्ध हो चुके हैं। उनके पास न कोई नया आइडिया है, न कोई नया सॉल्युशन है। न कोई नया सुझाव है, न कोई नया समाधान है। वे सिर्फ पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर पुराने झूठ नए सिरे से दोहरा रहे है। शिवराज सिंह ने 17 साल में प्रदेश को क्या दिया हैय़ एक भी पैरामीटर पर सफल नहीं हुए। प्रदेश कर्ज में डूब गया। रोजगार देने की बजाय लाखों बेरोजगार हो गए।
प्रदेश में निवेश और रोजगार के लिए सरकार नवंबर में प्रदेश में इंवेस्टर्स समिट आयोजित करने जा रही है। क्या यह सफल होगा?
पटवारीः इससे पहले शिवराज सिंह चौहान ने कितनी समिट की है? कितनी सफल हुई है? क्या बच्चों को रोजगार मिल पाया? मध्य प्रदेश के जितने उद्योग आए, उससे ज्यादा घट गए। समिट के नाम पर सिर्फ पैसों और जमीन की लूट हुई है। 20 साल की सरकार को समिट करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। निवेश को सीधे लाना चाहिए। भीड़ करने की क्या आवश्यकता है। ऐसी मेरी सरकार से अपेक्षा है।
प्रदेश की नई शराब नीति एक अप्रैल से लागू हो रही है। आप उसे कैसे देखते हैं?
पटवारीः शिवराज सिंह प्रदेश को रोजगार नहीं दे पाए। समद्ध नहीं कर पाए। नई शराब नीति कहती है कि खूब शराब पियो, परिवहन और भंडारण करके रख लो। नशे में रहो। हम रोजगार नहीं दे सकते। नशा दे सकते हैं।
