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दिग्विजय के किले राघौगढ़ का तिलिस्म तोड़ना भाजपा के लिए चुनौती, इस उम्मीदवार पर खेला दांव
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 02 Nov 2018 02:31 PM IST
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दिग्विजय सिंह
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भारतीय जनता पार्टी ने आज मध्यप्रदेश चुनाव के लिए कुल 177 उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया। सीएम शिवराज सिंह बुधनी से चुनाव लड़ेंगे। वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के गढ़ राघौगढ़ से भूपेंद्र रघुवंशी को टिकट दिया गया है।
राघौगढ़ सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है और भाजपा के लिए हमेशा से एक चुनौती रही है। पिछले विधानसभा में भाजपा ने जिस उम्मीदवार पर दांव खेला था उसे 58,204 मतों से करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भाजपा ने भूपेंद्र रघुवंशी पर दांव खेला है।
पहले दिग्विजय सिंह यहां से जीतते रहे और फिर किला समर्थक उम्मीदवार ही जीत का परचम लहराता रहा। तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा इस किले को भेद नहीं पाई।
2003 के चुनाव में भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को इस सीट से टिकट दिया, लेकिन वह भी दिग्विजय सिंह के आगे टिक नहीं सके। 2008 में कांग्रेस ने मूलसिंह दादाभाई को टिकट दिया जिन्होंने भाजपा उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह रघुवंशी को हराया। रघुवंशी को इस बार फिर यहां से टिकट मिला है।
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कांग्रेस की इस सीट पर अब नई युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व है। 2013 चुनाव में कांग्रेस ने दिग्विजय के बेटे जयवर्धन सिंह को उम्मीदवार बनाया था जो मौजूदा विधायक हैं। उन्होंने भाजपा के राधेश्याम धाकड़ को हराया था।
इस बार भाजपा ने भूपेंद्र रघुवंशी पर दांव खेला है जो 2008 में यहां से चुनाव हार चुके हैं। देखना है कि भाजपा का दांव इस बार कितना काम आता है। दिग्विजय सिंह इस बार चुनाव प्रचार से भी दूर हैं और टिकट को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया से टकराव की खबरें भी हैं। ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने की उम्मीद है।
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राघौगढ़ सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है और भाजपा के लिए हमेशा से एक चुनौती रही है। पिछले विधानसभा में भाजपा ने जिस उम्मीदवार पर दांव खेला था उसे 58,204 मतों से करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भाजपा ने भूपेंद्र रघुवंशी पर दांव खेला है।
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पहले दिग्विजय सिंह यहां से जीतते रहे और फिर किला समर्थक उम्मीदवार ही जीत का परचम लहराता रहा। तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा इस किले को भेद नहीं पाई।
2003 के चुनाव में भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को इस सीट से टिकट दिया, लेकिन वह भी दिग्विजय सिंह के आगे टिक नहीं सके। 2008 में कांग्रेस ने मूलसिंह दादाभाई को टिकट दिया जिन्होंने भाजपा उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह रघुवंशी को हराया। रघुवंशी को इस बार फिर यहां से टिकट मिला है।
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कांग्रेस की इस सीट पर अब नई युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व है। 2013 चुनाव में कांग्रेस ने दिग्विजय के बेटे जयवर्धन सिंह को उम्मीदवार बनाया था जो मौजूदा विधायक हैं। उन्होंने भाजपा के राधेश्याम धाकड़ को हराया था।
इस बार भाजपा ने भूपेंद्र रघुवंशी पर दांव खेला है जो 2008 में यहां से चुनाव हार चुके हैं। देखना है कि भाजपा का दांव इस बार कितना काम आता है। दिग्विजय सिंह इस बार चुनाव प्रचार से भी दूर हैं और टिकट को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया से टकराव की खबरें भी हैं। ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने की उम्मीद है।
