अमर उजाला डॉट कॉम से खास बातचीत में बोले दिग्विजय, आखिरी दम तक कांग्रेस में रहूंगा
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कांग्रेस में नेताओं के बीच मनमुटाव और झगड़े की अफवाह फैलाकर चुनाव जीतने का सपना देख रही भारतीय जनता पार्टी को इस बार निराशा हाथ लगेगी, क्योंकि कांग्रेस के भीतर कोई झगड़ा या खींचतान नहीं है। बल्कि खींचतान इस पर है कि किसी नेता के प्रभाव क्षेत्र से ज्यादा से ज्यादा कांग्रेस विधायक जीतकर आएंगे, चाहे उन्हें किसी की भी सिफारिश पर टिकट मिला हो।
लेकिन अब हमारे सारे उम्मीदवार कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और उन्हें जिताना हम सबकी जिम्मेदारी है। बल्कि इस बार झगड़ा भाजपा में है और सत्ता के आखिरी दिनों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बिल्कुल अकेले पड़े गए हैं।
चाहे पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती हों, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर हों या भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय हों, सब शिवराज के खिलाफ हैं। यहां तक कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी नाराज हैं। उनके बेटे को टिकट नहीं मिला और कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बेटे को दिकट दिलवा दिया।
यह दावा है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दस साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह का। सिंह ने यह साफ किया कि वह खुद मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल नहीं हैं। सिंह को यह आशंका भी है कि हार से बचने के लिए भाजपा कांटे की टक्कर वाली सीटों पर ईवीएम में टेंपरिंग भी करा सकती है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि 2003 में राज्य में कांग्रेस चुनाव हार गई थी।
2008 और 2013 के चुनावों में वह राज्य में उतना नहीं घूमे थे, जितना इस बार चुनाव से पहले और अब घूम चुके हैं। सिंह के मुताबिक करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर की नर्मदा यात्रा के दौरान उन्होंने राज्य के 104 विधानसभा क्षेत्रों में पदयात्रा की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में 11 दिन पैदल चला।
इसके बाद विधानसभा चुनावों के लिए बनी कांग्रेस समन्वय समिति का प्रभारी बनन के बाद राज्य के 52 जिलों में से 43 जिलों में हमारी समिति गई। करीब 200 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा मैने किया। इस दौरान मैने अनेक लोगों से बात की। जिनमें आम लोग, कांग्रेस कार्यकर्ता, भाजपा कार्यकर्ता और भाजपा के असंतुष्ट स्थानीय नेताओं से भी बातचीत हुई।
साधू संत और आरएसएस के प्रचारकों तक से बात हुई।पंचायत से लेकर संसद तक के निर्वाचित प्रतिनिधियों से बात हुई। फिर हर विधानसभा क्षेत्र में दो हजार से लेकर 12 हजार तक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद समिति ने किया। उनसे अलग अलग कान में भी बात की।करीब दो लाख लोगों से बातचीत हुई।इस पूरी कवायद में जो जमीनी हकीकत पता चली वह है कि इस बार शिवराज सरकार और भाजपा के खिलाफ जबर्दस्त लहर है।
टिकट बंटवारे में नेताओं के बीच खींचतान और झगड़े की खबरों पर दिग्विजय सिंह का कहना है कि थोड़ी बहुत कमी बेशी तो हो जाती है, लेकिन इस बार अधिसंख्य टिकट सही बंटे हैं और सभी नेताओं में सहमति है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सूची भी देखी है और वहां असंतोष कांग्रेस से ज्यादा है। अपने करीबी पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू के भाजपा में जाने पर सिंह ने सफाई दी कि गुड्डू ने पिछले चुनाव में टिकट बंटवारे में जिसको टिकट मिला था, उसका नाम काटकर अपना नाम लिख दिया था।
इससे पार्टी नाराज थी औ इस बार उन्हें टिकट नहीं मिलना था। इसलिए वह भाजपा में चले गए। मैं गुड्डू को युवक कांग्रेस के जमाने से जानता था। जब भाजपा में जाने के बाद उसने मुझे फोन किया तौ मैने उनसे साफ कह दिया है कि ये तुमने बहुत गलत किया है और अब मेरे दरवाजे गुड्डू लिए हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।
यह पूछने पर कि लोगों का आरोप है कि गुड्डू आपकी शह पर भाजपा में गए हैं, दिग्विजय ने कहा कि एसा कहने वाले दिग्विजय सिंह को नहीं जानते हैं।मैं कांग्रेस में था, हूं और रहूंगा। इसी पार्टी में मेरा राजनीतिक जन्म हुआ और इसी में मैं आखिरी सांस लूंगा। मैने जिंदगी में कभी एसा काम नहीं किया जिससे पार्टी का नुकसान हो। मैं पार्टी के खिलाफ सोच भी नहीं सकता।
टिकट बंटवारे को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अपने कथित झगडे के बारे में पूछने पर दिग्विजय ने कहा कि यह बिल्कुल सरासर गलत खबर थी। सिंधिया जी भी इसे स्पष्ट कर चुके हैं। फिर सिंधिया जी मेरे बेटे के समान हैं और वह मुझे पूरा सम्मान देते हैं। मेरा उनका कोई झगड़ा नहीं है।
21 हजार घोषणाएं वह कर चुके हैं और अमल एक पर भी नहीं हुआ। लोगों को रेवड़ी बांट दी, पर किसी को मिला कुछ नहीं। भ्रष्टाचार संस्थागत हो गया है। बिना लिए दिए कोई काम ही नहीं होता। पूरी तरह वसूली होती है और इसकी खुली छूट है। शिवराज सिंह के सबसे बड़े दुश्मन उनके इर्दगिर्द रहने वाले लोग हैं, चाहे परिवार के लोग हों या नौकरशाह हों। उन सबने उसका शोषण किया है।
सोशल मीडिया में वायरल हुए नाराजगी भरे अपने एक बयान पर दिग्विजय ने सफाई दी कि उसे संदर्भ से काट कर दिखाया गया। दरअसल मैने कहा था कि आरएसएस और भाजपा के लोग यह प्रचार करते हैं कि मैं उनका सबसे बडा दोस्त हूं। क्योंकि जो मैं बोलता हूं उसका फायदा भाजपा को मिलता है और जहां मैं जाता हं वहां कांग्रेस के वोट कम हो जाते हैं और भाजपा के बढ़ जाते हैं। कुछ कांग्रेस के लोग भी इसी धारणा वाले हैं।
लेकिन हकीकत यह है कि जहां भी मैं चुनाव प्रचार के लिए गया वहां के मतदान के नतीजे देख लीजिए कांग्रेस के वोट बढ़े हैं। हालाकि मेरी लाइन यही है कि जिसे भी कांग्रेस का टिकट मिला है, चाहे वह विरोधी ही क्यों न हो उसे हम जिताएंगे।
मोदी जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी भाषण कला और ईवीएम मशीन है। दिग्विजय सिंह को शक है कि अपनी हार से बचने के लिए भाजपा ईवीएम में टेंपरिंग कर सकती है। उनका कहना है कि दुनिया में कोई भी मशीन एसी नहीं है जिसमें टेंपरिंग न हो सकती हो।भाजपा बड़ी चालाकी से चुनी हुई सीटों पर यह काम करती है। उप चुनावों में ईवीएम में टेंपरिंग नहीं हुई।
पंजाब में भाजपा का कोई दांव नहीं था, इसलिए वहां भी नहीं हुई। राजस्थान में हवा कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा है, इसलिए वहां नहीं करेंगे। लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ सीटों पर जहां कांटे का मुकाबला होगा, वहां ईवीएम में गड़बड़ी कराई जाएगी।
कांग्रेस की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री कौन होगा,इस सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में मुख्यमंत्री की घोषणा चुनाव से पहले करने के वह खिलाफ हैं। यह अधिकार निर्वाचित विधायकों का है।साथ ही उन्होंने साफ किया वह किसी भी तरह से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं।
