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MP Election 2023: महेश्वर पहुंचा अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम', लोगों ने खोली विकास कार्यों की पोल
Thu, 09 Nov 2023 09:59 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 09 Nov 2023 09:59 AM IST
सार
MP Election 2023: मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से शुरू हुआ 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' आज (9 नवंबर) खरगोन के महेश्वर पहुंचा है। सुबह-सुबह आम मतदाताओं ने अपने मुद्दों पर खुलकर बातचीत की।
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महेश्वर में अमर उजाला का चुनावी रथ सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही 230 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। आगामी 17 नवबंर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव से पहले अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' प्रदेशभर के मतदाताओं का मन टटोलने निकला है। आज हमारा कारवां खरगोन जिले के महेश्वर पहुंचा है, मतदाताओं से अमर उजाला ने चर्चा की और उनके मुद्दों को जानने की कोशिश की। अमर उजाला के मंच पर लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी।
अमर उजाला से चर्चा में रज्जू सेठ कहते हैं कि हमारे यहां इंजीनियरिंग कॉलेज की मंजूरी मिली थी, लेकिन सांसद लेकर चले गए। यहां कारखाने आये थे, लेकिन कारखाने आते हैं और चले जाते हैं। नेता यहां आते हैं और वोट लेने के बाद चले जाते हैं। यहां मजदूरी बहुत कम है। किसानों को सिर्फ आठ घंटे बिजली मिलती है। स्थिति बहुत खराब है।
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राजेंद्र यादव कहते हैं कि यहां काम नहीं हो पाते हैं। विजय लक्ष्मी यहां की विधायक हैं यहां कोई बड़ा काम नहीं हुआ। यहां कॉलेज नहीं है। बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ता है।
घनश्याम सोलंकी कहते हैं कि यहां कि सड़कें बहुत संकरी हैं। नर्मदा मार्ग में बार-बार ट्रैफिक जाम हो जाता है। उसे चौड़ा नहीं किया जा रहा है। वहां आम जनता को समस्या होती है। लोगों को काम नहीं मिल रहे हैं।
फिरोज इकबाल कहते हैं कि महेश्वर में अस्पताल की परेशानी है। इलाज के लिए धामनोद जाना पड़ता है। गरीबों को बहुत परेशानी होती है। सोनोग्राफी, ऑपरेशन की सुविधा होनी चाहिए। महिला चिकित्सक की कमी है।
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अमर उजाला से चर्चा में रज्जू सेठ कहते हैं कि हमारे यहां इंजीनियरिंग कॉलेज की मंजूरी मिली थी, लेकिन सांसद लेकर चले गए। यहां कारखाने आये थे, लेकिन कारखाने आते हैं और चले जाते हैं। नेता यहां आते हैं और वोट लेने के बाद चले जाते हैं। यहां मजदूरी बहुत कम है। किसानों को सिर्फ आठ घंटे बिजली मिलती है। स्थिति बहुत खराब है।
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राजेंद्र यादव कहते हैं कि यहां काम नहीं हो पाते हैं। विजय लक्ष्मी यहां की विधायक हैं यहां कोई बड़ा काम नहीं हुआ। यहां कॉलेज नहीं है। बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ता है।
घनश्याम सोलंकी कहते हैं कि यहां कि सड़कें बहुत संकरी हैं। नर्मदा मार्ग में बार-बार ट्रैफिक जाम हो जाता है। उसे चौड़ा नहीं किया जा रहा है। वहां आम जनता को समस्या होती है। लोगों को काम नहीं मिल रहे हैं।
फिरोज इकबाल कहते हैं कि महेश्वर में अस्पताल की परेशानी है। इलाज के लिए धामनोद जाना पड़ता है। गरीबों को बहुत परेशानी होती है। सोनोग्राफी, ऑपरेशन की सुविधा होनी चाहिए। महिला चिकित्सक की कमी है।
