एमपी: नर्मदा में अचानक बढ़ा पानी, रेलवे पुल के पिलरों के पास फंसे चार युवक; गोताखोरों ने ऐसे बचाई जान
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बड़वाह स्थित नावघाटखेड़ी नर्मदा घाट पर अंतिम संस्कार में शामिल होने इंदौर से आए चार युवक नदी में स्नान करते समय अचानक बढ़े जलस्तर के कारण नवनिर्मित रेलवे पुल के पिलरों के पास फंस गए। सूचना मिलते ही गोताखोर बाबूलाल मंगले के नेतृत्व में जितेश केवट, अनिल मंगले, सुरेश केवट और गोवर्धन प्रसाद ने ट्यूब, रस्सी और नाव की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया।
विस्तार
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बड़वाह स्थित नावघाटखेड़ी नर्मदा घाट पर रविवार को बड़ा हादसा टल गया। अंतिम संस्कार में शामिल होने इंदौर से आए चार युवक नर्मदा नदी में स्नान करने के दौरान अचानक बढ़े जलस्तर के कारण नवनिर्मित रेलवे पुल के पिलरों के पास फंस गए। देखते ही देखते उनके आसपास पानी बढ़ने लगा और मुख्य घाट तक लौटने का रास्ता मुश्किल हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घाट पर मौजूद गोताखोरों ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया। ट्यूब, रस्सी और नाव की मदद से करीब एक घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद चारों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। समय रहते गोताखोरों की सक्रियता से संभावित बड़ा हादसा टल गया।
अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे युवक
जानकारी के अनुसार, इंदौर निवासी सचिन सहित चार युवक बड़वाह के नावघाटखेड़ी स्थित नर्मदा नदी के उत्तर तट पर बने मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे। अंतिम संस्कार के बाद सभी युवक नर्मदा नदी में स्नान करने चले गए। उस समय नदी का जलस्तर कम दिखाई दे रहा था। इसी दौरान वे नवनिर्मित रेलवे पुल के पिलरों के पास तक पहुंच गए। बताया गया कि कुछ देर बाद नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। पानी लगातार बढ़ने से युवकों को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, लेकिन तब तक उनके लिए वापस मुख्य घाट तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। चारों युवक नदी के बीच फंस गए और बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे।
सूचना मिलते ही रेस्क्यू के लिए पहुंचे गोताखोर
चार युवकों के नदी में फंसे होने की जानकारी मिलते ही नावघाटखेड़ी नर्मदा घाट पर मौजूद गोताखोर सक्रिय हो गए। गोताखोर बाबूलाल मंगले के नेतृत्व में जितेश केवट, अनिल मंगले, सुरेश केवट और गोवर्धन प्रसाद बचाव के लिए मौके पर पहुंचे। नदी में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच युवकों तक पहुंचना आसान नहीं था। इसके बावजूद गोताखोरों ने समय गंवाए बिना रेस्क्यू अभियान शुरू किया। उन्होंने ट्यूब और रस्सी की मदद से युवकों तक पहुंच बनाई। पहले उन्हें सुरक्षित तरीके से संभाला गया और फिर नाव की सहायता से एक-एक कर मुख्य घाट की ओर लाया गया। करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद चारों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। गोताखोरों की तत्परता और साहस के चलते चारों की जान बच गई। घटना के बाद युवकों ने राहत की सांस ली।
थोड़ी देर होती तो हो सकता था बड़ा हादसा
घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए बचाव अभियान में थोड़ी भी देरी युवकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। नर्मदा नदी का पानी लगातार बढ़ रहा था और चारों युवक निर्माणाधीन रेलवे पुल के पिलरों के पास फंसे हुए थे। ऐसे स्थान पर तेज बहाव के बीच संतुलन बिगड़ने या पानी में बह जाने का खतरा बना हुआ था। समय रहते गोताखोरों के मौके पर पहुंचने और तत्काल बचाव अभियान शुरू करने से बड़ा हादसा टल गया। नावघाटखेड़ी में हुई इस घटना ने एक बार फिर नदी में स्नान के दौरान सतर्कता बरतने की जरूरत को उजागर किया है।
ओंकारेश्वर बांध से बिजली उत्पादन के कारण बदल सकता है जलस्तर
नर्मदा नदी में जलस्तर के अचानक बढ़ने के पीछे ओंकारेश्वर बांध से होने वाले बिजली उत्पादन की प्रक्रिया भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। बिजली उत्पादन के दौरान मांग और जरूरत के अनुसार टरबाइनों की संख्या घटाई या बढ़ाई जाती है। इससे नदी में पानी के प्रवाह में बदलाव हो सकता है और नीचे की ओर स्थित घाटों पर जलस्तर प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से नर्मदा नदी के किनारे स्थित घाटों पर श्रद्धालुओं और अन्य लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर भी लोगों को आगाह किया जाता रहा है कि नदी का जलस्तर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। पानी कम दिखाई देने के बावजूद नदी के बीच या पुल के पिलरों के आसपास जाना जोखिम भरा हो सकता है।
कम पानी देखकर न करें लापरवाही
नर्मदा नदी में स्नान करने वाले लोगों से अपील की जाती है कि वे निर्धारित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें। नदी के बीच, गहरे पानी, तेज बहाव वाले क्षेत्रों और पुल के पिलरों के आसपास जाने से बचना चाहिए। खासकर जब बांध से पानी के प्रवाह में बदलाव होने की संभावना हो, तब अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। नदी का जलस्तर कुछ ही मिनटों में बदल सकता है। जो जगह कुछ समय पहले सुरक्षित दिखाई देती है, वही अचानक खतरनाक बन सकती है। नावघाटखेड़ी की घटना भी इसी खतरे की गंभीर याद दिलाती है।
गोताखोरों की सतर्कता से बची चार जिंदगियां
इस घटना में सबसे अहम भूमिका स्थानीय गोताखोरों की रही। युवकों के फंसने की सूचना मिलते ही बाबूलाल मंगले, जितेश केवट, अनिल मंगले, सुरेश केवट और गोवर्धन प्रसाद ने जोखिम उठाकर बचाव अभियान शुरू किया और चारों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। नर्मदा घाटों पर मौजूद स्थानीय गोताखोरों का अनुभव संकट के समय लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित होता है। नावघाटखेड़ी में भी उनकी तत्परता ने संभावित हादसे को टाल दिया। यह घटना संदेश देती है कि नर्मदा नदी में आस्था और श्रद्धा के साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है। पानी कम दिखाई देने पर नदी को सुरक्षित मानकर लापरवाही करना भारी पड़ सकता है। जलस्तर में अचानक बदलाव की आशंका को देखते हुए सतर्क रहना और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करना हादसों से बचने का सबसे अहम तरीका है।
