MP News: गुजरात जैसे हादसे को कहीं दावत तो नहीं दे रहा इंदौर का यह झूला पुल, ब्रिज का वजन अधिक, नट पर लगा जंग
गुजरात के मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना करीब 143 साल पुराना पुल गिरने से अभी तक 134 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। इसी पैटर्न पर देश भर में बने अन्य पुलों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में खान नदी पर बने झूला पुल का जिक्र करना जालमी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गुजरात के मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना झूला पुल टूटने की घटना ने देश भर में इस पैटर्न पर बने पुलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर में भी 10 साल पहले खान नदी पर झूला पुल बनाया गया था। लेकिन उस पर लकड़ी हटाकर सीमेंट की सिल्लियां लगाकर ब्रिज का वजन बढ़ा दिया गया है।
बता दें कि ब्रिज को लोहे की रस्सियों से कसा गया है। ब्रिज के आसपास पड़े कचरे और नाले की गाद देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुल का रखरखाव नहीं होता। शहर के वरिष्ठ अभिभाषक आनंद मोहन माथुर की इच्छा थी कि ऋषिकेश की तर्ज पर इंदौर में भी झूला पुल बने। इसके लिए उन्होंने 40 लाख रुपये से ज्यादा की राशि दी थी।
इंदौर विकास प्राधिकरण ने ब्रिज निर्माण किया था। हालांकि, ब्रिज का इस्तेमाल ज्यादा लोग नहीं करते हैं। पहले ब्रिज का बेस लकड़ी का था, लेकिन उसे हटाकर सीमेंट की सिल्लियां रख दी गईं। ब्रिज के एंगलों को नट से कसा गया है। कहीं एक नट लगे हैं तो कही दो नट। ज्यादातर नट भी जंग खा रहे हैं। इस मामले में पूर्व प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा का कहना है, प्राधिकरण ने ब्रिज काफी मजबूत बनाया था। पहले बेस लकड़ी का था, लेकिन हमने उसे और मजबूती दी है। नीचे लोहे के एंगल भी लगाए गए हैं।
वाहन पार्क कर जाते हैं राजवाड़ा की तरफ...
झूला पुल के आसपास नगर निगम ने पार्किंग बना रखी है। अब कई लोग वाहन पार्क कर राजवाड़ा जाने के लिए झूला पुल का इस्तेमाल करते हैं। ब्रिज कान्ह नदी के ऊपर बना है। कई बार गाद के कारण पुल से गुजरते समय बदबू भी आती है।
जानकारी के लिए बता दें कि गुजरात के मोरबी में रविवार शाम बड़ा हादसा हो गया था। यहां के मच्छु नदी में बना केबल ब्रिज अचानक टूट जाने से कई लोग नदी में गिर गए थे। इस हादसे में अब तक 143 लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त पुल पर 400 से ज्यादा लोग मौजूद थे। ये लोग रविवार की छुट्टी होने पर ब्रिज पर घूमने पहुंचे थे। रेस्क्यू के लिए सेना, नेवी, एयरफोर्स एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। अब तक 177 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है।
