{"_id":"64b00ecc98197b5d6e0651b6","slug":"waste-to-wealth-iit-indore-develops-green-hydrogen-from-pet-plastic-2023-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"innovation: आईआईटी इंदौर ने प्लास्टिक से बनाई ग्रीन हाइड्रोजन गैस, एक किलो में 100 किमी चलेगी कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
innovation: आईआईटी इंदौर ने प्लास्टिक से बनाई ग्रीन हाइड्रोजन गैस, एक किलो में 100 किमी चलेगी कार
Thu, 13 Jul 2023 09:00 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 13 Jul 2023 09:00 PM IST
सार
तीन साल तक रिसर्च के बाद विकसित हुई तकनीक, दुनियाभर में चल रही वेस्ट टू वेल्थ मुहिम में निभाएगी बड़ी भूमिका
विज्ञापन
स्टूडेंट्स के साथ प्रोफेसर।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आईआईटी इंदौर को बड़ी सफलता मिली है। यहां के स्टूडेंट्स ने पीईटी प्लास्टिक से बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन गैस का उत्पादन करने की एक प्रक्रिया विकसित कर ली है। आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) इंदौर के छात्रों ने लगभग तीन साल तक मेहनत के बाद इस तकनीक को विकसित किया है। आज पूरी दुनिया में वेस्ट टू वेल्थ मुहिम चल रही है और प्रयास किए जा रहे हैं कि किसी भी तरह से कचरे को किसी उपयोगी वस्तु में बदला जाए। वेस्ट टू वेल्थ के इस वाक्य को सार्थक करते हुए इंदौर आईआईटी के छात्रों ने यह सफलता हासिल की है।
इस तकनीक का पूरे विश्व में होगा फायदा
यह एक एेसी विकसित प्रक्रिया है जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने के साथ ही पीईटी के प्राथमिक घटकों को इस तरह से रूपांतरित किया जाएगा कि वे भविष्य में नए सिरे से पीईटी उत्पादन में मदद कर सकें। यह तकनीक राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और ग्लोबल सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल्स के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में भारत को कई स्तर पर लाभ पहुंचाएगी।
पेटेंट करवाया, अब बड़ी कंपनियों में जाएगी यह तकनीक
इस प्रक्रिया के माध्यम से स्टूडेंट्स की यह टीम 160 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पीईटी कचरे रिसायकल करने के साथ शुद्ध एच2 गैस (ग्रीन हाइड्रोजन) का उत्पादन करने में सफल रही। 33 किलोग्राम पीईटी 1 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस उत्पन्न कर सकता है और इससे हाइड्रोजन ईंधन से कार को 100 किमी तक चलाया जा सकता है। प्रोफेसर संजय के सिंह के निर्देशन में अंकित, महेंद्र, निरुपम और तुषार की टीम ने इस रिसर्च को पूरा किया है। अब यह टीम इस प्रक्रिया को कम बजट में लाकर बड़ी कंपनियों को देना चाहती है ताकि इससे कचरे को उपयोगी ग्रीन हाइड्रोजन गैस में बदला जा सके। इसे टीम ने पेटेंट भी करवा लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस तकनीक का पूरे विश्व में होगा फायदा
यह एक एेसी विकसित प्रक्रिया है जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने के साथ ही पीईटी के प्राथमिक घटकों को इस तरह से रूपांतरित किया जाएगा कि वे भविष्य में नए सिरे से पीईटी उत्पादन में मदद कर सकें। यह तकनीक राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और ग्लोबल सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल्स के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में भारत को कई स्तर पर लाभ पहुंचाएगी।
विज्ञापन
पेटेंट करवाया, अब बड़ी कंपनियों में जाएगी यह तकनीक
इस प्रक्रिया के माध्यम से स्टूडेंट्स की यह टीम 160 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पीईटी कचरे रिसायकल करने के साथ शुद्ध एच2 गैस (ग्रीन हाइड्रोजन) का उत्पादन करने में सफल रही। 33 किलोग्राम पीईटी 1 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस उत्पन्न कर सकता है और इससे हाइड्रोजन ईंधन से कार को 100 किमी तक चलाया जा सकता है। प्रोफेसर संजय के सिंह के निर्देशन में अंकित, महेंद्र, निरुपम और तुषार की टीम ने इस रिसर्च को पूरा किया है। अब यह टीम इस प्रक्रिया को कम बजट में लाकर बड़ी कंपनियों को देना चाहती है ताकि इससे कचरे को उपयोगी ग्रीन हाइड्रोजन गैस में बदला जा सके। इसे टीम ने पेटेंट भी करवा लिया है।
विज्ञापन
