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Indore: भैरव कुंड में तीन दोस्त डूबे, साथी को बचाने नदी में कूदे थे

Wed, 16 Aug 2023 12:17 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Wed, 16 Aug 2023 12:17 PM IST
सार

भैरव कुंड में बारिश के दौरान झरना फूट पड़ता है। झरने का बहाव तेज होने से कुंड काफी गहरा हो चुका है। गहराई होने के कारण कुंड में गिर रहे झरने का बहाव भीतर तेज होता है,  उपरी स्तर पर बहाव नजर नहीं आने से लोग कुंड के बीच के हिस्से तक तैरने चले जाते है।

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Three friends drowned in Bhairav Kund, jumped into the river to save their friend
भैरव कुंड में डूबने से तीन यूवकों की मौत - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

इंदौर के 30 किलोमीटर दूर भैरव कुंड में तीन दोस्तों की डूबने से मौत हो गई। तीनों इंदौर के चंदननगर क्षेत्र के निवासी है और अपने 14 दोस्तों के साथ 15 अगस्त को पिकनिक मनाने भैरव कुंड गए थे। पहले उनका एक साथी डूबने लगा। उसे बचाने दो अन्य साथ नदी में गए थे, लेकिन तीनों नदी से बाहर नहीं निकल पाए। 15 दिन के भैरव कुंड में यह दूसरा हादसा हुआ है। 30 जुलाई को दो युवकों की गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी।

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पुलिस के अनुसार डूबे युवकों के नाम यासीन, सूफियान और जफर खान है। चंदन नगर निवासी यासिन गहरे पानी में नहा रहा था, वह किनारे पर आने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बहाव तेज होने के कारण नहीं आ पाया। वह मदद के लिए चिल्लाने लगा तो सूफियान और जफर उसकी मदद के लिए बढ़े, लेकिन वे भी गहरे पानी में डूबने लगे।

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तीनों को डूबते देख नदी में नहा रहे दूसरे लोगों की उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं हुई।तीनों मदद के लिए चिल्लाते रहे और फिर नदी में डूब गए। घटना की सूचना मिलने पर खुडैल पुलिस जवान और बचाव दल मौके पर पहुंचे। शाम तक नदी से दो युवकों के शव निकाले  जा चुके थे, लेकिन अंधेरा होने के कारण तीसरे युवक का पता नहीं चला। बुधवार सुबह फिर नदी में उसका शव खोजा गया।

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इसलिए होते है भैरवकुंड में ज्यादा हादसे

भैरव कुंड में बारिश के दौरान झरना फूट पड़ता है। झरने का बहाव तेज होने से कुंड काफी गहरा हो चुका है। गहराई होने के कारण कुंड में गिर रहे झरने का बहाव भीतर तेज होता है, कुंड की उपरी स्तर पर बहाव नजर नहीं आने से लोग कुंड के बीच के हिस्से तक तैरने चले जाते है, लेकिन फिर बहाव के विपरित किनारे तक आने में उन्हें ज्यादा ताकत लगाना पड़ती है और फिर डूबने की आशंका बढ़ जाती है। दो साल में इस कुंड में दस से ज्यादा मौतें हो चुकी है।

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